सरकार बालिकाओं के उत्थान के लिए कई योजनाएं संचालित कर रही है। 'बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ' जैसे नारों के साथ मिशन शक्ति जौसे आयोजन हो रहे हैं, लेकिन फिर भी उनको आज भी बोझ समझा जा रहा है।
ललितपुर. सरकार बालिकाओं के उत्थान के लिए कई योजनाएं संचालित कर रही है। 'बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ' जैसे नारों के साथ मिशन शक्ति जौसे आयोजन हो रहे हैं, लेकिन फिर भी उनको आज भी बोझ समझा जा रहा है। गुरुवार को इसी कारण एक पिता ने मौत को गले लगा लिया। वजह, उसको पत्नी से चौथी बेटी हुई थी। बेटा पाने के अरमानों पर पानी फिर गया और पिता ने दुःखी होकर जहर खा लिया। परिजनों ने उसे मड़ावरा सीएचसी से प्रार्थिमिक उपचार के बाद जिला चिकित्सालय रिफर किया, लेकिन जिला चिकित्सालय पहुंचने से पहले उसने रास्ते में ही दम तोड़ दिया।
यह था मामला-
मामला थाना मड़ावरा अंतर्गत ग्राम धुरवारा का है। जहां की निवासी एक महिला ने जब चौथी पुत्री को जन्म दिया तो उसके पति विनोद अहिरवार (29) पुत्र पजन ने लड़की पैदा होने के गम में घर जाकर कीटनाशक दवा का सेवन कर लिया जिससे उसकी हालत बिगड़ गई। आनन-फानन में परिजनों द्वारा उसे सीएचसी मड़ावरा में भर्ती कराया गया, जहां से उसे प्राथिमिकी उपचार के बाद गम्भीर हालत में जिला चिकित्सालय रिफर कर दिया गया। लेकिन जिला चिकित्सालय पहुंचने से पहले उसने रास्ते में ही दम तोड़ दिया।
सूचना पर पहुंची पुलिस ने मृतक के शव को कब्जे में लेकर पंचनामा भरकर पोस्टमार्टम के लिए भिजवा दिया। उसकी मौत से परिवार में कोहराम की स्थिति उत्पन्न हो गई क्योंकि वह गरीब तबके का व्यक्ति था जो मेहनत मजदूरी कर अपना और अपने परिवार का भरण पोषण कर रहा था। उसकी मौत के बाद आप परिवार पर भरण पोषण का संकट आ खड़ा हुआ है तो वहीं हाल ही में जन्मी पुत्री को भी लोग कोसने में लगे हुए हैं। बताया गया है कि मृतक के यहां पहले से ही 3 पुत्रियां थी जिनको लेकर वह परेशान रहता था और उसी पुत्र की इच्छा थी।