इंदिरा नूई का पूरा नाम इंदिरा कृष्णमूर्ति नूई है। उनका जन्म 28 अक्टूबर 1955 को चेन्नई में हुआ था। उन्होंने 1976 में कोलकाता स्थित इंडियन इंस्टिड्यूट ऑफ मैनेजमेंट से पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा किया और उसके बाद अमरीकी हेल्थकेयर कंपनी जॉनसन एंड जॉनसन में नौकरी की।
नर्इ दिल्ली। दुनिया की सबसे ताकतवर महिलाआें में से एक आैर पेप्सीको की पूर्व सीर्इआे इंदिरा नूर्इ का आज जन्मदिन है। गत वर्ष दुनिया की सबसे मशहूर मैगजीन में से एक फाॅर्च्युन ने बिजनेस क्षेत्र में इंदिरा नूर्इ को विश्व की दूसरी सबसे ताकतवर महिला के घोषित किया था। उनके कार्यकाल में पेप्सीको विश्व की 'शीर्ष 500' कंपनियों में शामिल हुर्इ। उनके सीर्इआे रहते हुए पेप्सीको के पास 100 से भी अधिक ब्रांड व ट्रेडमार्क है। हाल ही में इंदिरा ने पेप्सीको के सीर्इआे पद से इस्तीफा दिया है। इस्तीफे कुछ दिनों बाद ही उन्होंने इच्छा जतार्इ थी कि वो महिला सशक्तीकरण के लिए कुछ करना चाहती हैं। इसके साथ ही उनकी इच्छा है कि वो दुनिया घूमें आैर अलग-अलग जगहों पर लोगों की कार्यशैली के बारे में जानें। कभी एक कंपनी में रिसेप्शनिस्ट के तौर पर अपने करियर की शुरुआत करने वाली इंदिरा नूर्इ ने आज जो मुकाम हासिल किया है वो दुनियाभर की महिलाआें के लिए किसी मिसाल से कम नहीं हैं। आइए आज उनके जन्मदिन पर उनके बारे में कुछ बातें आपसे साझा करते हैं जो निश्चि तौर पर आपके लिए प्रेरणादायी होगी।
इंदिरा नूई का पूरा नाम इंदिरा कृष्णमूर्ति नूई है। उनका जन्म 28 अक्टूबर 1955 को चेन्नई में हुआ था। उन्होंने 1976 में कोलकाता स्थित इंडियन इंस्टिड्यूट ऑफ मैनेजमेंट से पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा किया और उसके बाद अमरीकी हेल्थकेयर कंपनी जॉनसन एंड जॉनसन में नौकरी की। नूई ने 1994 में पेप्सीको को ज्वाइन किया था। इसी कंपनी में 2001 में उन्हें चीफ फाइनेंस आॅफिसर के पद पर प्रमोशन दिया गया। इंदिरा नूई को पेप्सीको का CEO अक्टूबर 2006 में नियुक्त किया गया था। इस पद पर वह लगभग 12 साल से बनी हुई हैं। साल 2015 में नूई को फॉर्चून की लिस्ट में दुनिया की सबसे शक्तिशाली महिलाओं में दूसरा स्थान दिया था।
जब मां की एक सलाह ने दी जिंदगी की सबसे बड़ी सीख
कभी 18 वर्ष की उम्र में ही इंदिरा की शादी करने की बात करने वाली उनकी मां ने उनको जीवन की सबसे बड़ी सलाह दी थी जो आगे चलकर उनके जीवन के हर मोड़ पर काम आया। इंदिरा की मां ने उनसे कहा था कि वो सपने देखना ना छोड़ें। उम्र के किसी भी मोड़ पर सपने पूरे किए जा सकते हैं, बशर्ते ईमानदारी और लगन से मेहनत की जाए। इस बात को इंदिरा नूर्इ ने गांठ बांधकर रखा। एक मामूली रिसेप्शनिस्ट से पेप्सीको कंपनी की सीईओ बनीं।
बचपन से ही लोगों के लिए कुछ करना चाहती थीं इंदिरा नूर्इ
बचपन में उनकी मां इंदिरा से एक सवाल करती थीं कि तुम संसार को बदलने के लिए क्या करोगी? इंदिरा नूर्इ ने इस सवाल का जवाब देने के लिए एक एेसी कंपनी से जुड़ने की ठानी जो लोगों की भलाई के लिए काम करती हो ताकि अधिक से अधिक लोगों का हित किया जा सके। इस बात से कोर्इअंजान नहीं कि पेप्सीको कर्इ एेसे कामों को करती है जिससे लोगों की भलार्इ हो सके।
कर्मचारियों के लिए अच्छा माहौल होना जरूरी
इंदिरा नूर्इ का मानना है अच्छे एम्प्लॉई को कंपनी से जोड़ने के लिए कंपनी में अच्छा माहौल होना चाहिए। वहां पर स्टॉफ की तरक्की होनी चाहिए, तभी लोग काम करने के लिए मोटीवेट होते हैं। उनका यह भी मानना था कि हमें कभी भी कठिन यात्रा को नहीं देखना चाहिए बल्कि हमें यात्रा के पूरा होने पर मिलने वाले लक्ष्य और खुशी को देखना चाहिए। इससे कठिनाईयों से पार जाने की ताकत मिलती है।
'जैसे देश वैसा भेस' को मानने वाली नूर्इ
वहीं इंदिरा नूर्इ का यह भी मानना है कि विदेश में सफलता पाने के लिए सबसे जरूरी है कि खुद को वहां के माहौल में ढाला जाए। आप अंदर से भारतीय बने रहे परन्तु दूसरे देश की जरूरतों को भी समझे। यही बात आपको अपने देश के बाहर सफलता दिलाई। उनका यह भी कहना है कि जीवन में हमेशा सही व्यक्ति के लिए काम करना चाहिए, सही कंपनी के लिए काम करना चाहिए। क्योंकि यही आपकी तरक्की के रास्ते खोलता है और आपको आसमान छूने की ताकत देता है।