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HDFC Bank: शेयर में गिरावट के बाद HDFC बैंक का बड़ा एक्शन, AT-1 बॉन्ड घोटाले में तीन सीनियर अधिकारी किए बर्खास्त

HDFC Bank ने कथित तौर पर अपनी दुबई शाखा में AT-1 बॉन्ड्स की मिस-सेलिंग के कारण तीन कर्मचारियों को बर्खास्त किया।

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HDFC Bank termination employees Bank Fraud AT1 bond mis selling

बैंक ने तीन अफसरों को दिखाया बाहर का रास्ता। फोटो: एआइ

अतनु चक्रवर्ती के अचानक इस्तीफे के बाद से ही HDFC बैंक लगातार चर्चा में बना हुआ है। शुक्रवार को शेयर बाजार में तेजी के बावजूद बैंक के शेयर लाल निशान पर थे। इसकी बड़ी वजह सामने आई है दरअसल, कंपनी ने अपने तीन सीनियर कर्मचारियों को नौकरी से बर्खास्त कर दिया है। गौरतलब है कि इससे पहले गुरुवार को बैंक के चेयरमैन अतनु चक्रवर्ती के अचानक इस्तीफे के बाद भी शेयर में गिरावट आई थी।

बैंक ने अपने UAE ऑपरेशंस में एडिशनल टियर-1 (AT-1) बॉन्ड्स की कथित मिस-सेलिंग की इंटरनल जांच के बाद तीन सीनियर कर्मचारियों को नौकरी से बर्खास्त कर दिया है। इस कार्रवाई के बाद बैंक के शेयर 2.4% गिरकर बंद हुए।

पहले समझिए AT-1 बॉन्ड्स क्या होते हैं?

मान लीजिए आपने किसी बैंक को पैसे उधार दिए। बदले में बैंक आपको हर साल अच्छा ब्याज देगा। यही AT-1 बॉन्ड का बेसिक आइडिया है। ये बॉन्ड्स सामान्य FD या डेट इंस्ट्रूमेंट्स से ज्यादा ब्याज देते हैं, इसीलिए बड़े निवेशकों को ये आकर्षक लगते हैं।
लेकिन इसमें एक बड़ा पेच है। अगर बैंक की माली हालत खराब हो जाए यानी उसकी नेटवर्थ एक तय सीमा से नीचे गिर जाए, तो बैंक आपके पूरे पैसे डुबो सकता है और आप कुछ नहीं कर सकते।

यह शर्त पहले से ही इन बॉन्ड्स में लिखी होती है।
सबसे खतरनाक बात यह है कि अगर बैंक दिवालिया हो जाए, तो सबसे पहले बाकी सभी कर्जदारों को पैसे मिलेंगे और AT-1 बॉन्डधारकों को सबसे आखिर में। यानी की हो सकता है कुछ भी न मिलें।

किन अधिकारियों को हटाया गया?

बैंक ने जिन तीन अधिकारियों को हटाया है उनमें शामिल हैं- संपत कुमार, जो ब्रांच बैंकिंग के ग्रुप हेड थे। हर्ष गुप्ता, जो मिडिल ईस्ट, अफ्रीका और NRI बिजनेस के EVP थे। पायल मंधयान, जो SVP के पद पर थीं। इन तीनों पर आरोप है कि इन्होंने बैंक की दुबई ब्रांच के जरिए NRI क्लाइंट्स को हाई-रिस्क AT-1 बॉन्ड्स बेचे। यह मामला जनवरी 2025 में सामने आया था।

HDFC बैंक ने इस मामले पर सफाई देते हुए कहा कि UAE की DIFC ब्रांच में क्लाइंट ऑनबोर्डिंग में कुछ खामियां पाई गई थीं। बैंक ने कहा, मामले की विस्तृत और निष्पक्ष समीक्षा पूरी कर ली गई है। इंटरनल पॉलिसी के मुताबिक जरूरी सुधारात्मक कदम उठाए गए हैं और बैंक के कंडक्ट रेगुलेशन के तहत उचित कार्रवाई की गई है।

क्या है पूरा घटनाक्रम

आरोपों के मुताबिक दुबई और बहरीन ब्रांच के स्टाफ ने NRI क्लाइंट्स को बहला-फुसलाकर उनके भारत में जमा FCNR डिपॉजिट को बहरीन शिफ्ट करवाया और इन बॉन्ड्स को फिक्स्ड मैच्योरिटी प्रोडक्ट बताकर गारंटीड रिटर्न का झांसा दिया। क्लाइंट्स से ब्लैंक डॉक्यूमेंट्स पर साइन करवाए गए और AT-1 बॉन्ड्स की हाई रिस्क नेचर के बारे में जरूरी जानकारी जानबूझकर छुपाई गई।

बाद में जब यूनियन बैंक ऑफ स्विट्जरलैंड (UBS) ने क्रेडिट सुइस का बेलआउट किया, तो ये बॉन्ड्स पूरी तरह राइट-ऑफ कर दिए गए और निवेशकों को भारी नुकसान उठाना पड़ा। NRI निवेशकों की शिकायतों के बाद जनवरी 2025 में जांच शुरू हुई और हर्ष गुप्ता व पायल मंधयान को सस्पेंड किया गया। इंटरनल जांच 18 मार्च को पूरी हुई जिसके बाद तीनों की बर्खास्तगी हुई। दुबई के फाइनेंशियल रेगुलेटर DFSA ने बैंक पर नए क्लाइंट ऑनबोर्ड करने पर रोक लगा दी है और बैंक को निवेशकों के मुकदमों का भी सामना करना पड़ रहा है।