पूरे दुनिया में एशिया के बारे में शिक्षित करने वाली गैर-लाभकारी संस्था एशियन सोसाइटी ने 62 वर्षीय इंदिरा नूर्इ को 'गेम चेंजर आॅफ द इयर' अवार्ड से सम्मानित किया है।
नर्इ दिल्ली। भारतीय मूल की एवं पेप्सिकाे की पूर्व सीर्इआे इंदिरा नूर्इ ने कहा है कि यदि वो राजनीति में कदम रखती हैं तो तीसरा विश्व युद्ध हो जाएगा क्योंकि वो बहुत बेबाक है। हाल ही में पूरे दुनिया में एशिया के बारे में शिक्षित करने वाली गैर-लाभकारी संस्था एशियन सोसाइटी ने 62 वर्षीय इंदिरा नूर्इ को 'गेम चेंजर आॅफ द इयर' अवार्ड से सम्मानित किया है। एशियन सोसाइटी ने इंदिरा नूर्इ को ये सम्मान उनके बिजनेस अचीवमेंट्स, मानवतावदी कार्य आर महिलाआें के लिए हमेशा खड़े रहने को लेकर लिया किया है। इस सम्मान समारोह में जब उनसे पूछा गया चूंकि आप रिटायर हो गर्इ हैं तो क्या आप अमरीकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का कैबिनेट ज्वाइन करेंगी। इस सवाल को सुनते ही नूर्इ ने कहा, "मेरे आैर राजनीति का कोर्इ मिश्रण नहीं है। मैं बहुत बेबाक हूं। मैं कूटनीति नहीं कर सकती है। मुझे तो यह भी नहीं पता की कूटनीति क्या होती है। मेरी वजह से तीसरा विश्व युद्ध हो जाएगा।"
प्रतिदिन18 से 20 घंटे काम करती थीं इंदिरा नूर्इ
गौरतलब है कि बीते 2 अक्टूबर को पेप्सिको सीर्इआे इंदिरा नूर्इ अपने पद से रिटायर हुर्इं थीं। अगस्त माह में ही पेप्सिकाे के निदेशक मंडल ने घोषणा किया था कि 54 वर्षीय रमन लगुआर्ता कंपनी के अगले सीर्इआे होंगे। हालांकि नूर्इ साल 2019 तक कंपनी की चेयरमैन बनी रहेंगी। नूर्इ ने कहा कि पिछले 40 सालों से हर रोज 18 से 20 घंटे तक काम करने के बाद मुझे राहत मिली है। उन्होंने कहा, "जब मैं रिटायर हुर्इ तो मुझे लगा कि ये मुश्किल होगा। पिछले 40 साल से मैंने कुछ नहीं किया बल्कि सुबह 4 बजे उठकर बस ये देखती थी कि अगले 18 से 20 घंटे तक क्या-क्या काम करना है।" नूर्इ बताती हैं कि रिटायरमेंट के अगले दिन मुझे लगा कि काम सिवाय भी एक जिंदगी है। मेरे दिल में अभी भी पेप्सिको बसता है लेकिन मैं इस बात को महसूस करने लगी हूं की इसके आलावा भी एक जिंदगी है।
काम आैर करियर को लेकर संतुलन बनाना जरूरी
रिटायरमेंट के बाद अपना समय व्यतीत करने को लेकर नूर्इ बताती हैं कि मैं अधिक से अधिक समय लिखने अौर दुनिया के अधिकतर देशाें में घूमने के व्यतीत करना चाहती हूं। मैं कर्इ देशों में इस बात की पड़ताल करना चाहती हूं की वहां आखिर कैसे काम आैर जिंदगी में संतुलना बनाया जाता है। वो आैर भी कर्इ तरह की एक्सट्रा करिकुलर एक्टिवीटी में काम करना चाहती हैं। मुझे तो ये भी कहा जाता है कि मुझे स्लीप स्कूल जाना चाहिए ताकि मैं ये सीख सकूं की 6 से 8 घंटे तक कैसे सोया जाता है। मुझे नहीं पता कि ये सब कैसे होगा लेकिन ये जरूर पता है कि इसमें मजा आने वाला है। अपनी अनुभव को साझा करते हुए नूर्इ कहती हैं कि महिलाआें को वर्क-लाइफ में संतुलन बनाने की जरूरत है। उन्होंने कैसे अपने बेटियों के साथ अपने करियर में संतुलन बनाए रखने के लिए 'एशियन माॅडल' का फॅार्म्युला अपनाया था। उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि इस माॅडल को पश्चिम में अपनाया जाना चाहिए।