
नई दिल्ली।इंडियाबुल्स हाउसिंग फाइनेंस लिमिटेड के खिलाफ डाली गई याचिका को याचिकाकर्ता अभय यादव ने सुप्रीम कोर्ट से वापस ले ली है। उसने कंपनी और उसके अध्यक्ष समीर गहलोत पर फंड की हेराफेरी का आरोप लगाया था। अब इस घटनाक्रम के बाद कई तरह के सवाल खड़े हो गए हैं। क्योंकि बुधवार को कंपनी की ओर से अदालत को कहा गया था कि इस केस की सुनवाई जल्द की जाए। ताकि सच्चाई सामने आ सके। कंपनी की ओर से यह भी कहा गया था कि कंपनी के अकाउंट में 90 हजार करोड़ रुपए है। उसे इनती बड़ी हेराफेरी करने की कोई जरुरत नहीं है। जिसके बाद याचिकाकर्ता की ओर से याचिका को वापस लिया गया। इसके बाद इंडियाबुल्स के शेयरों में 11.86 फीसदी या 75.65 रुपए की तेजी दर्ज की गई और यह गुरुवार को 694.70 पर बंद हुआ।
शक की श्रेणी में आए याचिकाकर्ता
सवाल ये भी खड़ा हो रहा है कि कहीं याचिकाकर्ताओं ने यह याचिका गलत इरादों से तो दाखिल नहीं की है। क्योंकि जिस तरह से फिनटेक कार्वी की रिपोर्ट में बात सामने आई है कि अभय यादव और उसके साथ के पास इंडियाबुल्स के शेयरों की संख्या से मात्र 3 से 5 है। जो उन्होंने याचिका डालने से कुछ दिन पहले ही खरीदे हैं। ऐसे में इस बात पर विश्वास करना कि याचिकार्कताओं ने व्हिसलब्लोअर्स के रूप में काम किया है, यह बात कुछ शक की श्रेणी में आ रही है।
कंपनी के खिलाफ साजिश की आशंका
वहीं इंडियाबुल्स के अनुसार याचिकाकर्ता ने अदालत में खुद स्वीकार किया कि याचिका में खामी है और वे इसे सुधार कर दोबारा दाखिल करेंगे। ऐसे में यह सभी घटनाक्रम कंपनी के खिलाफ एक बड़ी आपराधिक साजिश की ओर इशारा करती हुई दिखाई दे रहीं हैं। जिसमें शेयरधारकों की जमा पूंजी लगी हुई है। वहीं इस घटना ने एक बार फिर साबित किया कि सेबी की निगरानी के बावजूद कुछ लोग अपने निजी लाभ के लिए कंपनियों को नुकसान पहुंचाने से नहीं चूक रहे हैं।
यह लगाए थे आरोप
सुप्रीम कोर्ट में सोमवार को एक आपराधिक रिट याचिका दायर कर यह आरोप लगाया गया था कि कंपनी के वरिष्ठ अधिकारियों ने छद्म कंपनियों का उपयोग कर कंपनी में करीब 98,000 करोड़ रुपए का घोटाला किया है। याचिका में आरोप लगाया गया था कि कंपनी के अध्यक्ष समीर गहलौत ने स्पेन के एक एनआरआई हरीश फाबियानी के साथ मिलकर कथित रूप से कई 'छद्म कंपनियों' का गठन किया है, जिसे आईएचएफएल ने भारी भरकम रकम कर्ज के रूप में दिया, जबकि ये कंपनियां महज कागजों पर थीं और कर्ज में मिली रकम को ठिकाने लगाने के लिए बनाई गई थीं।
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