
नर्इ दिल्ली।सुप्रीम कोर्ट द्वारा आधार पर तो रोक कस आदेश दिया है उसका सबसे बड़ा असर टेलीकाॅम सेक्टर आैर आप पड़ने जा रहा है। जी हां, आधार से जो मोबाइल सिम आपको कुछ मिनटों में मिल जाता था अब उसमें आपको कर्इ दिनों का इंतजार करना पड़ सकता है। वहीं दूसरी आेर मोबाइल कंपनियों को एक ग्राहक बनाने में 10 गुना ज्यादा खर्च करने पड़ेंगे। जिससे मोबाइल कंपनियों पर आैर भी ज्यादा बोझ बढ़ सकता है। आइए आपको भी बताते हैं कि अब मोबाइल सिम पाने आैर मोबाइल कंपनियों को किस तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ेगा?
मोबाइल कंपनियों पर बढ़ेगा बोझ
सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद टेलिकॉम सेक्टर पर कर्इ तरह का बोझ बढ़ जाएगा। सेक्टर के जानकारों की मानें तो कोर्ट के फैसले के बाद टेलीकाॅम कंपनियों पर वित्तीय बोझ बढ़ेगा। अभी एक ग्राहक को बनाने में 30 रुपए की लागत आती है। अब कंपनी को मोबाइल सिम के इच्छुक ग्राहक के घर पर एग्जीक्यूटिव को वेरिफिकेशन के लिए भेजना होगा। कंपनियों एक बार नहीं कर्इ बार भी एग्जीक्यूटिव को कस्टमर के घर भेजना पड़ सकता है। जिसकी वजह से कंपनी की लागत एक ग्राहक पर 300 रुपए तक हो सकती है। आपको बता दें कि इंडस्ट्री की आमदनी और मुनाफे में कुछ सालों काफी गिरावट देखने को मिली है। कंपनियों पर पहले से ही 7 लाख करोड़ रुपए का कर्ज है।
मोबाइल कनेक्शन में लगेगी देरी
वहीं टेलीकाॅम सेक्टर का कहना है कि आधार पर रोक लगाने के बाद मोबाइल कनेक्शन देने में देरी लगेगी। जानकारों की मानें तो आधार से कस्टमर एनरोलमेंट करने में आधे से एक घंटा लगता है। अब कस्टमर के एड्रेस और दूसरी डिटेल्स के वेरिफिकेशन के लिए 5-6 दिन का इंतजार करना पड़ेगा। यानि जो मोबाइल सिम कस्टमर को एक से दाे दिन में मिल जाता है अब करीब 7 दिन का इंतजार करना होगा। कंपनियों की मानें तो सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले के बाद कंपनियां एक बार फिर से इतिहास में चली गर्इ है। इससे कंपनियों आैर कस्टमर दोनों को ही फायदा नहीं होगा।
क्या कहती है सरकार आैर एसोसिएशन?
इस बारे में टेलिकॉम मिनिस्टर मनोज सिन्हा का कहना है कि वो सुप्रीम कोर्ट के फैसले को देख रहे हैं। इसे समझने के बाद हम तय करेंगे कि आगे क्या करना है।' वहीं, टेलिकॉम कंपनियों की संस्था सेल्युलर ऑपरेटर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (सीओएआई) के डायरेक्टर जनरल राजन मैथ्यूज ने कहा कि इस मामले में इंडस्ट्री को दूरसंचार विभाग के निर्देश का इंतजार है।