नोटबंदी और जीएसटी जैसे बड़े आर्थिक बदलाव के बाद नरेन्द्र मोदी सरकार को इस बार रैंकिंग को लेकर विश्व बैंक से काफी आस हैं।
नई दिल्ली। आज विश्व बैंक दुनियाभर के देशों का ईज ऑफ डूइंग बिजनेस रैकिंग्स की घोषण करने वाला हैं। नोटबंदी और जीएसटी जैसे बड़े आर्थिक बदलाव के बाद नरेन्द्र मोदी सरकार को इस बार रैंकिंग को लेकर विश्व बैंक से काफी आस हैं। मोदाी सकरार को उम्मीद है कि आर्थिक विकास के लिए उठाए गए इन कदमों से इस बार देश में इज ऑफ डूइंग बिजनेस रैंकिंग बढ़ेगी। इसके पहले पिछले साल 2017 की रैंकिंग में 190 देशों में भारत को 130 स्थान मिला था, जो कि साल 2016 के रैंकिंग से मात्र एक स्थान उपर था।
जीएसटी से रैकिंग बढऩे के आसार
कुछ रिर्पोट्स के मुताबिक, सरकार को तीन मापदंडो पर अपनी स्थिति सुधरने की उम्मीद हैं। पिछले साल भारत को नए बिजनेस शुरू करने में 155वां स्थान, किसी भी तरह के निर्माण संबंधी परमिट के लिए 185वां स्थान, और दिवालियापन का निपटारा करने में 136वां स्थान मिला था। देश में अप्रत्यक्ष टैक्स सिस्टम को आसान करने वाले जीएसटी से सरकार को रैंकिंग सुधरने की उम्मीद हैं। पिछली बार की रैंकिंग में जीएसटी को शामिल नहीं किया गया था। टैक्स जमा करने के मामले में भारत को 172वां स्थान मिला था।
क्या है इज आफ डूइंग बिजनेस
विश्व बैंक इज ऑफ डूइंग बिजनेस का रिपोर्ट जारी करता हैं। इस रिपोर्ट में मुख्यत: दस मापदंडो को ध्यान में रखा जाता हैं। इन्ही मापदंडो के आधार पर यह तया होता है कि कौन से देश में कारोबार करना अधिक सुगम है जिसके बाद देशों को रैंकिंग की जाती हैं। पिछले साल इस लिस्ट में न्यूजीलैंड पहले स्थान पर जबकि सिंगापुर दूसरे स्थान पर था। बिजनेस की शुरूआत, गोदाम की सुविधा, बिजली, संपत्ति निबंधन, निवशकों को सुविधा, टैक्स भुगतान, देश से बाहर निर्यात, दो कंपनियों में आमतौर पर होने वाले कॅन्ट्रैक्ट को लेकर क्या नियम हैं, दिवालियापन से जुड़े क्या नियम है आदि बातों को इज ऑफ डूइंग बिजनेस रैंकिंग में ध्यान मे रखा जाता हैं।