एक नज़र दुनिया के उन देशों पर जहां ड्रोन का इस्तेमाल सिर्फ तस्वीर लेने के लिए नहीं बल्कि दुसरे महत्वपूर्ण कामों में भी हो रहा है
-भारत ड्रोन का इस्तेमाल कर टिड्डी भगाने वाला पहला देश बन गया है। कीनिया और रवांडा में तो ड्रोन की मदद से कीटनाशकों का छिउ़काव, मलेरिया के मच्छरों को मारने और लारवा पनपने की जगहों को नष्ट करने में भी काम ले रहे हैं।
-अमरीका स्थित फर्म 'एईवम' ने रैवन एक्स नाम का एक ड्रोन बनाया है। इसे खासतौर से छोटे उपग्रहों के लिए एक ऑटोनोमस, हवाई प्रक्षेपण प्रणाली के रूप में कार्य करने के लिए डिज़ाइन किया गया है। 'एईवम' कंपनी का दावा है कि उनका बनाया रैवन एक्स दुनिया का सबसे बड़ा ड्रोन है, जो ऑटोनोमस रूप से करीब 1.6 किमी लंबे रनवे पर भी उतर सकता है। यह ड्रोन करीब 80 फीट लंबा (24 मीटर), 18 फुट (5.5 मीटर) ऊंचा और 60 फुट (पंखों का व्यास 18 मीटर) चौड़ा है। इसे 8 हजार वर्ग फुट (743 वर्ग मीटर) हैंगर में खड़ा किया जाता है। रैवन एक्स में नियमित विमान के समान ही जेट ईंधन का उपयोग होता है। 'एईवम' का कहना है कि रैवन एक्स पर मौसमी परिस्थितियों का कोई असर नहीं होता है और यह लगभग सभी जटिल परिस्थितियों में लॉन्च हो सकता है। इस ड्रोन का 70 प्रतिशत हिस्सा दोबारा उपयोग किया जा सकता है। लेकिन कंपनी इसे 100 फीसदी रीयूजेबल बनाने पर काम कर रही है। पूरी तरह से तैयार होने पर रेवन एक्स 180 मिनट प्रति लॉन्च की गति से अंतरिक्ष में पेलोड फायर करने में सक्षम होगा।
-गूगल की पैरेंटल कंपनी 'अल्फाबेट इंक' की विंग एलएलसी ने बीते साल 'ओपन स्काई' नाम का ऐप लॉन्च किया है। कंपनी का दावा है कि यह ऐप निजी ड्रोन के लिए बेहतर एयर ट्रैफिक नियंत्रक साबित होगा। कंपनी ने तीन महाद्वीपों में 80 हजार से ज्यादा ड्रोन उड़ानों का परीक्षण किया है। जैसे-जैसे डिलिवरी ड्रोन ज्यादा उन्नत ट्रैकिंग उपकरणों से लैस होते जाएंगे ओपन स्काई जैसे ऐप कम ऊंचाई पर उडऩे वाले ड्रोन के लिए एक एयर-ट्रैफिक प्रबंधन प्रणाली का आधार बन जाएंगे। इनके जरिए कंप्यूटर से ही ड्रोन को हवा में स्वचालित रूप से नियंत्रित किया जा सकेगा। इससे ड्रोन दुर्घटनाओं में भी कमी आएगी।
-नीदरलैंड स्थित एयरबस समूह 'स्काईवेज प्रोजेक्ट' का परीक्षण कर रहा है। 'एयरबस' के नाम से कंपनी ने हाल ही सिंगापुर में ड्रोन डिलीवरी ट्रायल किया। इसमें मानव रहित ड्रोन बंदरगाहों पर खड़े जहाजों पर पैकेज पहुंचाएंगे। इन्हें खास लोडिंग परिचालनों को सुव्यवस्थित करने के लिए डिज़ाइन किया गया है। परीक्षण में ड्रोन ने 1.5 किलो सामान स्वचालित तकनीक का उपयोग कर पहुंचाया। इस दौरान ने ड्रोन ने 10 मिनट में करीब 2 किलोमीटर की उड़ान पूरी की।
-स्पेनिश स्टार्टअप 'क्वांटरनियम' का हाइब्रिड ड्रोन संस्करण बैट्री-इलेक्ट्रिक मल्टीकॉप्टर 'हाइब्रिक्स 2.1' ने ड्रोन की उड़ानों के सभी रिकॉड्र्स को तोड़ते हुए 10 घंटे हवा में उड़ान भरकर नया विश्व रिकॉर्ड बनाया है। इसमें 16 लीटर का गैसोलीन बैटरी का इलेक्ट्रिक हाइब्रिड ड्राइव सिस्टम है। यह 360 डिग्री पर hd पिक्सल क्वालिटी में वीडियो और 40 मेगापिक्सल फोटो खींचने में सक्षम है। 2 स्ट्रोक इंजन वाले 'हाइब्रिक्स 2.1' का वजन करीब 13 किग्रा है। यह 10 किग्रा तक वजन ढो सकता है।