Bharat Gen AI: भारत सरकार का भारत जेन एआई 22 भारतीय भाषाओं में संवाद कर सकेगा। जानिए यह सरकारी सॉवरेन एआई क्या है और आम लोगों के लिए कैसे उपयोगी हो सकता है।
Bharat Gen AI: भारत सरकार देश का अपना सॉवरेन आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) मॉडल तैयार कर रही है, जो 22 भारतीय भाषाओं में लोगों से संवाद कर सकेगा। इस परियोजना के तहत विकसित हो रहा टेक्स्ट आधारित एआई मॉडल इसी महीने पूरा होने की उम्मीद है। इसकी जानकारी केंद्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने राज्यसभा में दी।
यह एआई सिस्टम इंडिया एआई मिशन के तहत विकसित किया जा रहा है और इसे भारत जेनएआई नाम दिया गया है। यह देश का पहला राष्ट्रीय फाउंडेशनल लार्ज लैंग्वेज मॉडल होगा, जिसे पूरी तरह भारतीय जरूरतों, भाषाओं और सामाजिक-सांस्कृतिक संदर्भों को ध्यान में रखकर डिजाइन किया जा रहा है। शुरुआती चरण में इसका टेक्स्ट वर्जन आएगा, जबकि आगे चलकर इसमें स्पीच (बोलने) और विजन (देखने) की क्षमताएं भी जोड़ी जाएंगी।
सरकार के मुताबिक, स्पीच और विजन से जुड़ी एआई क्षमताएं पहले ही 15 भारतीय भाषाओं में विकसित की जा चुकी हैं। इन्हें चरणबद्ध तरीके से बढ़ाकर 22 भाषाओं तक ले जाया जाएगा, ताकि अलग-अलग क्षेत्रों और भाषाई पृष्ठभूमि के लोग इसका उपयोग कर सकें।
सरकार का कहना है कि भारत जेनएआई का इस्तेमाल सिर्फ चैट या सामान्य जानकारी देने तक सीमित नहीं रहेगा। इसे कृषि, आयुर्वेद, स्वास्थ्य सेवाओं और कानूनी सहायता जैसे क्षेत्रों में उपयोग के लिए तैयार किया जा रहा है। उद्देश्य यह है कि किसान, मरीज और आम नागरिक अपनी भाषा में सवाल पूछ सकें और उन्हें उपयोगी जानकारी मिल सके।
इस परियोजना का नेतृत्व आईआईटी बॉम्बे कर रहा है। इसके साथ आईआईटी मद्रास, आईआईटी हैदराबाद, आईआईटी कानपुर, आईआईटी मंडी और आईआईटी इंदौर जैसे प्रमुख संस्थान शामिल हैं। सरकार ने इसे राष्ट्रीय स्तर की साझा पहल बताया है।
भारत जेनएआई के तीन मुख्य हिस्से - टेक्स्ट, स्पीच और विजन होंगे। इसके लिए देशभर में 25 टेक्नोलॉजी इनोवेशन हब बनाए गए हैं। साथ ही, एआई विकास के लिए जरूरी कंप्यूटिंग संसाधन (जैसे जीपीयू और सर्वर) सब्सिडी दरों पर उपलब्ध कराने की व्यवस्था की जा रही है।
सरकार ने एआई और नई तकनीकों के लिए 1 लाख करोड़ रुपये का रिसर्च, डेवलपमेंट एंड इनोवेशन फंड शुरू किया है। इसमें निजी क्षेत्र की भागीदारी भी होगी। मंत्री के अनुसार, भारत जेनएआई सरकारी स्वामित्व वाला सॉवरेन सिस्टम रहेगा, लेकिन स्टार्टअप, संस्थानों और आम लोगों के लिए खुला होगा। इसके उपयोग, डेटा सुरक्षा और कीमत को लेकर अलग-अलग नियम तैयार किए जा रहे हैं।
सरकार का मानना है कि भारत जेनएआई से डिजिटल सेवाओं तक पहुंच आसान होगी और भारतीय भाषाओं में तकनीक का उपयोग बढ़ेगा। हालांकि, इसके वास्तविक प्रभाव का आकलन इसके लॉन्च और उपयोग के बाद ही हो सकेगा। फिलहाल, यह पहल भाषाई समावेशन और डिजिटल आत्मनिर्भरता की दिशा में एक अहम कदम माना जा रहा है।