टेक्नोलॉजी

कोई तैराकी के लिए बने मास्क का उपयोग कर रहा तो किसी ने वैक्यू क्लीनर से बनाया वंटिलेटर- ली जा सकती है

-कोरोना वायरस से जूझ रही दुनिया को चिकित्सकीय उपकरणों की कमी से भी लडऩा पड़ रहा है-ऐसे में इनोवेशन का सहारा लेकर लोग न केवल इस कमी को दूर कर रहे हें बल्कि जान भी बचा रहे हैं-वैश्विक रूप से कोरोना के गंभीर रूप से पीडितों के लिए वेंटिलेटर्स की सबसे ज्यादा कमी है
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Updated: 5 Apr 2020, 2:50 AM IST
कोई तैराकी के लिए बने मास्क का उपयोग कर रहा तो किसी ने वैक्यू क्लीनर से बनाया वंटिलेटर- ली जा सकती है
कोई तैराकी के लिए बने मास्क का उपयोग कर रहा तो किसी ने वैक्यू क्लीनर से बनाया वंटिलेटर- ली जा सकती है

कोरोनावायरस कोविड-19 से पूरी दुनिया में 1,193,653 लोग संक्रमित हैं जबकि 64,278 लोगों की वायरस के कारण मौत हो चुकी है। अस्पतालों में वेंटिलेटर्स, मास्क और फेस शील्ड जैसे जरूरी चिकित्सकीय उपकरणों की मांग को पूरा करने के लिए डायसन, फोर्ड मोटर कंपनी जैसी नामी-गिरामी कंपनियां आगे आ रही हैं। समुद्र में मनोरंजन के लिए की जाने वाली सर्फिंग के लिए खास तौर से डिजायन किए गए मास्क का उपयोग इटली के डॉक्टर कोरोनावायरस रोगियों का इलाज करने में कर रहे हैं। ऐसे ही वैक्यूम क्लिीनर बनाने वाली डायसन कंपनी ने 10 दिनों में जरुरतमंद अस्पतालों के लिए एक नया वेंटिलेटर डिजाइन किया है। कोरोना से लडऩे के ये तो सिर्फ दो ही उदाहरण हैं। नए कोरोनावायरस से संक्रमित रोगियों के फेफड़ों के काम न करने पर वेंटिलेटर्स जान बचाने का एकमात्र साधन हैं।

कहीं इंजीनियरिंग तो कहीं जुगाड़
ब्रिटेन के प्रधानमंत्री के आह्वान पर डायसन कंपनी के मालिक जेम्स डायसन ने अपनी टीम की मदद से कोवेंट वेंटिलेटर तैयार किया है जो अप्रेल से अस्पतालों में उपयोग होने लगेगा। वे इस पोर्टेबल वेंटिलेटर की 5 हजार यूनिट्स अन्य जरुरतमंद देशों को भी देंगे। ऐसे ही जीई हैल्थकेयर ने फोर्ड मोटर्स कंपनी के साथ साझेदारी में वेंटिलेटर्स बना रही है। वहीं वेल्स में एक सीनियर कंसल्टेंट ने सेना के अपने अनुभव का उपयोग कर अस्थायी और जुगाड़ू वेंटिलेटर डिजायन किए हैं जिसे एक इंजीनियरिंग कंपनी बना रही है। इसे उन्होंने कोविड इमरजेंसी वेंटिलेटर नाम दिया है। कंपनी का दावा है कि वह ऐसे 10 वेंटिलेटर रोज बना सकती है।

छात्रों ने बनाया श्वसन यंत्र
इनोवेशन की इसी कड़ी में यूनिवर्सिटी कॉलेज लंदन के छात्रों ने एक खास श्वसन यंत्र विकसित किया है जिसे वेंटिलेटर की जरुरत को काफी ह तक सीमित किया जा सकता है। मर्सिडीज फॉर्मूला-1 और मेडिकल छात्रों ने मिलकर इसे बनाया है। यह उपकरण बिना वेंटिलेटर के ही मरीज को सांस लेने में मदद करता है। टीम ने इसे 'कन्टीन्युअस पॉजिटिव एयरवे प्रेशर या सीपीएपी नाम दिया है। अगर उपकरण परीक्षण में पास हो जाता है तो लंदन के चार बडे अस्पतालों में 1000 मशीनों की सप्लाई अगले सप्ताह से होने लगेगी। फ्रांसीसी sports कंपनी डेकाथलॉन ने स्नॉकर्लिंग (गोता लगाने के दौरान सांस लेने में मदद करने वाला उपकरण) के लिए ईज़ीब्रेथ मास्क विकसित किया था लेकिन अब कंपनी कोरोनोवायरस के चलते एक इटालियन डॉक्टर रैनेटो फेवरो की मदद से इसे मरीजों को संास लेने में मदद करने के लिए वार्ड में उपयोग कर रहे हैं। डॉ. रेनैटो ने इटली की 3 डी प्रिंटिंग कंपनी इसिनोवा की मदद से 3 डी मुद्रित वाल्व बनाया जो मास्क को एक पारंपरिक श्वासयंत्र से कनेक्ट कर देता है। फिलहाल इस मास्क का उपयोग डॉ. रेनैटो 500 रोगियों का इलाज कर रहे हैं।

3डी प्रिंटर से एन-19 मास्क
बिना मास्क के संक्रमित रोगियों के बीच रहना जान जोखित डालने जैसा है। इसलिए अमरीकी टेक कंपनी कॉपर-3डी जो कि एंटीमाइक्रोबायल उपकरण बनाने में विशेषज्ञ है ने ऐसे 3 डी प्रिंअिंग वाले मास्क बनाने की फाइल्स जारी की हैं जिससे 3डी प्रिंटिंग रखने वाला कोई भी संस्थान कंपनी का खास नैनो हैक मास्क मास्क बना सकता है।

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5 Apr 2020, 2:50 AM IST
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