एसआरएम आइएसटी कुलपति व आइआइएससी बेंगलूरु मेम्बर कौंसिल डॉ. संदीप संचेती ने पत्रिका से हुयी ख़ास बातचीत में कहा कि देश में प्रौद्योगिकी विस्तार से विभिन्न क्षेत्रों में लागत घटेगी और सुविधाएं बढ़ेंगी। विज्ञान और प्रौद्योगिकी में नवाचारों से गांवों व शहरों के बीच का अंतर समाप्त होगा, जीवन आरामदायक बनेगा। शिक्षा एवं स्वास्थ्य सेवाएं सस्ती होंगी, नए रोजगार विकल्प मिलेंगे तथा अर्थव्यवस्था मजबूत होगी। उनसे हुयी बातचीत के अंश -
सवाल- 2020 में विज्ञान के समक्ष कौन-सी चुनौतियां रहीं?
जवाब- इस साल जहां सिर्फ कोविड-19 महामारी ही सबसे बड़ी चुनौती रही। वहीं नए साल में भी यह हमें कसौटी पर परखेगी। इसका गहरा प्रभाव अर्थव्यवस्था, शिक्षण एवं परिवहन के क्षेत्र में पड़ा। बहरहाल, विज्ञान व प्रौद्योगिकी की दुनिया में विकास बदस्तूर जारी रहा। इस बीच नए शोध व अनुसंधान का दौर शुरू हुआ जो नए वर्ष में भी जारी रहेगा। इनोवेशन का दायरा भी बढ़ा है। अंतरिक्ष विज्ञान हो अथवा मिसाइल विज्ञान, जो पूर्व नियोजित कार्यक्रम थे वे सभी पूरे हुए। हालांकि, इसमें कुछ विलंब अवश्य हुआ, लेकिन हमने हर चुनौती का सामना किया।
सवाल-प्रौद्योगिकी विकास से देश का भविष्य कैसे बदलेगा?
जवाब-इस साल देश में कुछ अच्छी प्रवृत्तियां विकसित हुई हैं। सतत विकास लक्ष्य (एसडीजी) के 17 निर्धारित लक्ष्यों की बात करें तो उनमें से 13 का संबंध शिक्षा व साक्षरता से है। नई प्रौद्योगिकी से दूर बैठा बच्चा अब परंपरागत और तकनीक मिश्रित शिक्षण व्यवस्था को अपनाएगा। इससे सस्ती शिक्षा तक पहुंच आसान होगी। विदेशों में उच्च शिक्षा अध्ययन की राह आसान होगी। साक्षरता बढ़ेगी, रोजगार के नए अवसर सामने आएंगे।
मेडिकल वियरेबल, शिक्षा फोल्डेबल हुई
सवाल-मेडिकल और शिक्षा के क्षेत्र कैसे प्रभावित होंगे?
जवाब- नवाचारों के चलते चिकित्सा और शिक्षा के क्षेत्र में भी बड़ा परिवर्तन आया है। अब देश में ब्लेंडेड (मिश्रित) स्टडी का नया दौर रहेगा। चिकित्सा में वियरेबल और शिक्षण के क्षेत्र में फोल्डेबल उपकरण नए साथी होंगे।
तकनीक से साकार होगा 'आधुनिक' गांव का सपना
सवाल- तकनीक से गांवों को कैसे लाभ मिलेगा?
जवाब- प्रौद्योगिकी का लाभ शहरों से गांवों तक पहुंचेगा, तभी उद्देश्य सफल होगा। यह 'डिजिटल प्रोवाइड' के रूप में गांव को तकनीक से जोड़ने पर ही संभव हो सकेगा। इससे ग्रामीण क्षेत्रों में भी लोगों का जीवनस्तर ऊंचा उठाया जा सकेगा। गांवों में बसे लोगों का जीवनस्तर बढ़ने से शहर की ओर पलायन रुकेगा। इससे न केवल ग्रामीण क्षेत्र में जीवन सुविधाजनक होगा, जीवन की गुणवत्ता भी बढ़ेगी।