
Baby Cereal: आजकल सोशल मीडिया पर बच्चों के लिए घर पर हेल्दी खाना बनाने से लेकर सेरेलेक जैसे बेबी फूड तैयार करने के कई वीडियो देखने को मिल जाते हैं। इन वीडियो को देखकर कई माता पिता भी बच्चे के लिए वही खाना बनाने की कोशिश करते हैं। लेकिन हर वीडियो में बताई गई सामग्री और उसकी मात्रा बच्चे की उम्र और जरूरत के हिसाब से सही हो, यह जरूरी नहीं है। छोटे बच्चे को खाना देते समय उसकी उम्र के साथ खाने की बनावट, पोषण और उसे निगलने में आसानी का भी ध्यान रखना जरूरी होता है। ऐसे में आइए जानते हैं कि करीब 6 महीने के बाद बच्चे को किस तरह का खाना दिया जा सकता है और खाना बनाते समय किन बातों का ध्यान रखना चाहिए।
राष्ट्रीय स्वास्थ्य सेवा (NHS) के अनुसार, करीब 6 महीने की उम्र से जब बच्चा ठोस खाना खाने के लिए तैयार हो, तब धीरे धीरे अलग अलग तरह के खाद्य पदार्थ उसकी डाइट में शामिल किए जा सकते हैं। शुरुआत में सब्जियों को अच्छी तरह पकाकर मैश या नरम बनाकर दिया जा सकता है। इसके अलावा फल, अनाज, दाल, बीन्स, अंडा, मांस, मछली और अन्य प्रोटीन वाले खाद्य पदार्थ भी बच्चे की डाइट का हिस्सा बनाए जा सकते हैं। इस उम्र में बच्चे को अलग अलग स्वाद और बनावट वाले भोजन की आदत डालना भी जरूरी है।
अमेरिकन एकेडमी ऑफ पीडियाट्रिक्स (American Academy of Pediatrics) के अनुसार, बच्चे को अलग अलग तरह के पौष्टिक खाद्य पदार्थ देना जरूरी है। एक ही तरह का अनाज या एक ही तरह का पैकेज्ड बेबी फूड बार बार देने के बजाय डाइट में अलग अलग अनाज, फल, सब्जियां और प्रोटीन वाले खाद्य पदार्थ शामिल करना बेहतर है।
राष्ट्रीय स्वास्थ्य सेवा (NHS) के अनुसार, छोटे बच्चों के खाने में अलग से नमक या चीनी डालने की जरूरत नहीं होती। बच्चे की उम्र के हिसाब से प्राकृतिक स्वाद वाले फल, सब्जियां, अनाज और दूसरे पौष्टिक खाद्य पदार्थ दिए जा सकते हैं। इसलिए सोशल मीडिया पर दिखने वाली किसी भी रेसिपी को बच्चे को देने से पहले यह देखना जरूरी है कि उसमें नमक, चीनी या ऐसी कोई सामग्री तो नहीं है जो इस उम्र के बच्चे के लिए जरूरी नहीं है।
यूनिसेफ (UNICEF) के अनुसार, करीब 6 महीने की उम्र में बच्चा चबाना और निगलना सीख रहा होता है। इसलिए शुरुआत में उसे नरम और आसानी से निगले जा सकने वाला खाना देना चाहिए। अच्छी तरह मैश किए हुए फल और सब्जियां या गाढ़ा दलिया जैसे विकल्प दिए जा सकते हैं। खाना बहुत पतला रखने के बजाय ऐसा रखना बेहतर है कि उसमें पोषण भी मिले और बच्चा उसे आसानी से खा सके। इसके साथ ही बच्चे को जबरदस्ती खाना खिलाने के बजाय उसकी भूख और पेट भरने के संकेतों पर भी ध्यान देना चाहिए। वहीं रोग नियंत्रण एवं रोकथाम केंद्र (Centers for Disease Control and Prevention) के अनुसार, छोटे बच्चों में खाना गले में अटकने का खतरा हो सकता है। इसलिए बच्चे की उम्र और विकास के हिसाब से खाने का आकार, बनावट और नरमी तय करनी चाहिए। कठोर, छोटे, चिपचिपे या ऐसे खाद्य पदार्थ जिन्हें बच्चा आसानी से चबा और निगल न सके, उनसे बचना चाहिए।
डिस्क्लेमर: यह लेख इंटरनेट पर उपलब्ध सार्वजनिक जानकारी के आधार पर लिखा गया है। बच्चे की डाइट में कोई नया खाद्य पदार्थ शामिल करने से पहले बाल रोग विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें।