Benefits of Sesame Oil On Face: चेहरे पर तिल का तेल लगाने से त्वचा को गहरी नमी मिलती है, जिससे रूखापन और खिंचाव धीरे-धीरे कम होता है। इसमें मौजूद प्राकृतिक एंटीऑक्सीडेंट झुर्रियों को कम करने में मदद करते हैं और स्किन को सॉफ्ट व हेल्दी बनाते हैं।
Benefits of Sesame Oil On Face: तिल का तेल सदियों से आयुर्वेद में त्वचा की देखभाल के लिए इस्तेमाल किया जाता रहा है। चेहरे पर इसका नियमित उपयोग त्वचा की नमी को बनाए रखने में मदद करता है, जिससे रूखापन धीरे-धीरे कम होने लगता है। इसमें मौजूद प्राकृतिक फैटी एसिड और एंटीऑक्सीडेंट त्वचा को पोषण देते हैं और फाइन लाइन्स व झुर्रियों की समस्या को हल्का करने में सहायक होते हैं। तिल का तेल त्वचा की गहराई तक जाकर उसे मुलायम, स्वस्थ और चमकदार बनाने का काम करता है।
आजकल बदलती लाइफस्टाइल, धूल-मिट्टी, तेज धूप और बढ़ता तनाव हमारी त्वचा पर जल्दी असर डालने लगा है। कम उम्र में ही चेहरे पर झुर्रियां, रूखापन और बेजानपन दिखने लगता है। ऐसे में अगर आप किसी प्राकृतिक और पुराने नुस्खे की तलाश में हैं, तो तिल का तेल एक बेहतरीन उपाय है।
तिल का तेल आयुर्वेद में हजारों सालों से इस्तेमाल होता आ रहा है। इसमें भरपूर मात्रा में विटामिन E, एंटीऑक्सीडेंट और फैटी एसिड पाए जाते हैं, जो त्वचा को अंदर से पोषण देते हैं।
तिल का तेल त्वचा की गहराई तक जाकर ड्रायनेस को दूर करता है और उसे अंदर से पोषण देता है। इसमें मौजूद एंटीऑक्सीडेंट त्वचा को फ्री रेडिकल्स से बचाते हैं, जो झुर्रियों की मुख्य वजह होते हैं। नियमित इस्तेमाल से त्वचा में लचीलापन बना रहता है और स्किन सेल्स की मरम्मत होती है, जिससे फाइन लाइन्स धीरे-धीरे हल्की होने लगती हैं।
अगर आपकी स्किन बहुत ड्राय रहती है, खासकर सर्दियों में, तो तिल का तेल एक रामबाण उपाय साबित हो सकता है। यह त्वचा पर प्राकृतिक नमी की परत बनाकर उसे लंबे समय तक हाइड्रेट रखता है और फटी-फटी व खिंची हुई स्किन को आराम देता है।रात में चेहरे पर हल्का सा तिल का तेल लगाने से सुबह स्किन ज्यादा सॉफ्ट, स्मूद और फ्रेश नजर आती है, जिससे रूखापन धीरे-धीरे कम होने लगता है।
डिसक्लेमरः इस लेख में दी गई जानकारी का उद्देश्य केवल रोगों और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के प्रति जागरूकता लाना है। यह किसी क्वालीफाइड मेडिकल ऑपिनियन का विकल्प नहीं है। इसलिए पाठकों को सलाह दी जाती है कि वह कोई भी दवा, उपचार या नुस्खे को अपनी मर्जी से ना आजमाएं बल्कि इस बारे में उस चिकित्सा पैथी से संबंधित एक्सपर्ट या डॉक्टर की सलाह जरूर ले लें।