Chaitra Navratri 2026 Vrat Rules: आज के इस लेख में आइए जानते हैं कि 12 बजते ही व्रत शुरू हो गया या व्रत खत्म हो गया, इस नियम को मानने से व्रत खंडित होता है या नहीं।
Chaitra Navratri 2026 Vrat Rules: चैत्र नवरात्रि 2026 की शुरुआत इस साल 19 मार्च से हो रही है। श्रद्धा और शक्ति के इस पावन पर्व में भक्त माता रानी को प्रसन्न करने के लिए 9 दिनों का उपवास रखते हैं, वहीं कुछ लोग शुरुआत का पहला और आखिरी दिन व्रत रखते हैं। अक्सर लोग व्रत के लगभग सभी नियमों का पालन तो करते हैं, लेकिन अनजाने में 12 बजते ही व्रत शुरू हो गया या व्रत खत्म हो गया जैसी छोटी सी गलती कर बैठते हैं, जिससे व्रत खंडित हो सकता है। इसी बात को ध्यान में रखते हुए सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म इंस्टाग्राम पर रोहिणीनंदन दास जी ने 12 बजे से जुड़ी कुछ जरूरी बातें शेयर की हैं, जिन्हें फॉलो करके आप अपना व्रत सही तरीके से पूरा कर सकते हैं।
इंस्टाग्राम वीडियो में रोहिणीनंदन दास जी ने बताया है कि ज्यादातर लोगों को लगता है कि जैसे ही रात के 12 बजते हैं, तारीख बदल जाती है और उसी पल से व्रत शुरू हो जाता है। इस चक्कर में लोग 12 बजने के बाद पानी की एक बूंद पीने से भी कतराते हैं, या फिर जिनका व्रत पूरा हो रहा होता है, वे तुरंत कुछ खाने बैठ जाते हैं। बता दें कि रात के 12 बजे दिन बदलने का नियम ब्रिटिश कैलेंडर का हिस्सा है, जिसे सिर्फ ऑफिस या बैंक के कामों के लिए इस्तेमाल किया जाता है। हमारे आध्यात्मिक और धार्मिक कार्यों में इस घड़ी का कोई महत्व नहीं है, इसलिए 12 बजे के बाद यह सोचना कि अब मैं कुछ नहीं खा सकता, पूरी तरह से एक भ्रम है।
अगर आप शास्त्रों और भारतीय परंपरा की बात करें, तो दिन की शुरुआत अंधेरी रात में नहीं बल्कि सूर्योदय से होती है। किसी भी व्रत का संकल्प और उसकी शुरुआत तब मानी जाती है जब सूरज की पहली किरण धरती पर पड़ती है। लेकिन इससे भी सूक्ष्म समय ब्रह्म मुहूर्त का होता है, जो सूर्योदय से ठीक 1 घंटा 36 मिनट पहले शुरू होता है। यानी जब तक ब्रह्म मुहूर्त या सूर्योदय नहीं होता, तब तक पिछला दिन ही चल रहा होता है। इसलिए नवरात्रि हो या शिवरात्रि, इन सभी में घबराने की जरूरत नहीं है कि 12 बज गए तो दिन बदल गया।
यह नियम सिर्फ नवरात्रि के लिए नहीं है। चाहे आप जन्माष्टमी का व्रत रख रहे हों, पूर्णिमा का हो या फिर भगवान शिव की आराधना कर रहे हों, सारे व्रत सूर्योदय के समय से ही मान्य होते हैं। प्रकृति के चक्र के हिसाब से जब तक सूर्य देव उदय नहीं होते, तब तक आपके व्रत की घड़ी शुरू नहीं होती। बस एकादशी एक ऐसा व्रत है जो ब्रह्म मुहूर्त से शुरू होता है, बाकी सभी व्रतों में सूर्योदय का ही महत्व होता है।