Cinnamon Side Effects : एक नई रिसर्च में पता चला है कि दालचीनी कुछ ऐसी दवाओं पर असर डाल सकती है जो डॉक्टर लिखते हैं। इस स्टडी के मुताबिक, दालचीनी में मौजूद एक तत्व (कंपाउंड) दवाओं के काम में रुकावट पैदा कर सकता है। यह रिसर्च National Center for Natural Products Research ने की है।
Cinnamon Side Effects : दालचीनी तो हम सभी जानते हैं, ये दुनिया के सबसे पुराने और सबसे ज्यादा इस्तेमाल होने वाले मसालों में से एक है। इसे मीठे पकवानों से लेकर चाय या शरबत तक, खाने-पीने की बहुत सारी चीज़ों में डाला जाता है।
लेकिन एक नई रिसर्च में एक चौंकाने वाली बात सामने आई है। पता चला है कि दालचीनी (Cinnamon Side Effects) कुछ ऐसी दवाओं के साथ रिएक्शन कर सकती है जो डॉक्टर हमें लिखते हैं।
National Center for Natural Products Research नाम की एक संस्था ने यह नई स्टडी की है। उन्होंने पाया कि दालचीनी में एक खास तरह का तत्व (जिसे कंपाउंड कहते हैं) होता है, और यही तत्व कुछ दवाओं के असर में रुकावट डाल सकता है। यह पूरी स्टडी 'Food Chemistry: Molecular Sciences' नाम के एक साइंस जर्नल में छपी है।
अमेरिका के नेशनल सेंटर फॉर नैचुरल प्रोडक्ट्स रिसर्च की स्टडी, जो Food Chemistry: Molecular Sciences में प्रकाशित हुई है, बताती है कि दालचीनी में मौजूद कौमरीन (Coumarin) नामक एक कंपाउंड खून को पतला करने का काम करता है। इसका मतलब ये है कि अगर आप ब्लड थिनर या बीपी की दवा ले रहे हैं, तो दालचीनी का अधिक सेवन आपके लिए नुकसानदायक (Cinnamon Side Effects) हो सकता है।
डॉ. क्लिंट स्टील, जो एक न्यूरोलॉजिस्ट हैं और इंस्टाग्राम पर उनके 300K से ज्यादा फॉलोअर्स हैं उन्होंने एक वीडियो में बताया कि रोजाना एक चम्मच या उससे ज्यादा दालचीनी का सेवन बीपी दवाओं के असर (Cinnamon Side Effects) को बिगाड़ सकता है। इसका कारण है कि कौमरीन दवाओं के प्रभाव को ज़्यादा बढ़ा सकता है, जिससे ब्लीडिंग या अन्य जटिलताएं हो सकती हैं।
हालांकि डॉ. स्टील यह भी कहते हैं कि "एक आठवां चम्मच दालचीनी" मस्तिष्क से जुड़ी समस्याओं, जैसे स्मृति ह्रास को कम करने में मदद कर सकता है। लेकिन वह यह भी साफ़ करते हैं कि "मैं आपको दवा छोड़कर दालचीनी लेने को नहीं कह रहा हूं, बल्कि आप अपने डॉक्टर से बात ज़रूर करें।"
शोधकर्ताओं के अनुसार, दालचीनी का एक मुख्य घटक सिनेमाल्डिहाइड (Cinnamaldehyde) शरीर में दवाओं के मेटाबॉलिज़्म को तेज़ कर देता है। इससे दवाएं जल्दी शरीर से बाहर निकल जाती हैं और अपना पूरा असर नहीं दिखा पातीं।
श्रीलंका की असली दालचीनी (Ceylon Cinnamon) में कौमरीन की मात्रा कम होती है, इसलिए वो तुलनात्मक रूप से सुरक्षित मानी जाती है। इसके विपरीत कैसिया दालचीनी, जो आमतौर पर बाज़ार में मिलती है, उसमें कौमरीन की मात्रा अधिक होती है और ये ज्यादा खतरा पैदा कर सकती है।
इस स्टडी का मतलब ये नहीं है कि आप अपनी पसंदीदा दालचीनी लट्टे या फजिता से दूरी बना लें। लेकिन अगर आप बीपी की दवा, ब्लड थिनर या किसी क्रॉनिक बीमारी (जैसे डायबिटीज़, कैंसर, अस्थमा, मोटापा आदि) से जूझ रहे हैं, तो डॉक्टर से सलाह लिए बिना दालचीनी का नियमित सेवन ना करें।
दालचीनी स्वाद और सेहत दोनों का खज़ाना हो सकती है, लेकिन हर चीज़ की एक सीमा होती है। अपने आहार में इसे शामिल करते वक्त जानकारी और सतर्कता ज़रूरी है। याद रखें, छोटी मात्रा में दालचीनी फायदेमंद हो सकती है, लेकिन अधिक मात्रा में वही नुकसान पहुंचा सकती है।