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Iran Israel News: ईरान के ‘सुप्रीम’ नेता खामेनेई का वायरल हुआ ‘Book’ शौक, नेहरू की किताबों के थे जबरा शौकीन

Iran Israel News: ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला खामेनेई की मौत के बाद सोशल मीडिया पर उनकी किताबों की पसंद चर्चा में है। नेहरू की किताबों से लेकर जेन ऑस्टिन की किताबों तक, पढ़िए पूरी कहानी।

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भारत

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Charvi Jain

Mar 07, 2026

नेहरू की किताबों के थे जबरदस्त शौकीन

ईरान के नेता खामेनेई (source: X khamenei_ir)

Iran Israel News: ईरान के नेता अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत के बाद उनके एक्स अकाउंट से सोशल मीडिया पर उनका एक ऐसा रूप वायरल हो रहा है, जिसे बहुत कम लोग जानते थे। खामेनेई सिर्फ एक सख्त नेता ही नहीं, बल्कि किताबों के बहुत बड़े शौकीन भी थे। खास बात यह है कि वे भारत के पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू की किताबों के दीवाने थे और अक्सर लोगों को नेहरू को पढ़ने की सलाह देते थे। आइए जानते हैं कि नेहरू की किताबों से उन्हें क्यों प्रेम था।

नेहरू की किताब से अपने देश को सिखाते थे

खामेनेई ने 2013 में एक्स पर लिखते हुए बताया था कि नेहरू की किताब पढ़ने से उन्हें पता चला कि पहले भारत कई क्षेत्रों में काफी आगे था। उन्होंने नेहरू की मशहूर किताब 'ग्लिम्प्स ऑफ वर्ल्ड हिस्ट्री' (Glimpses of World History) पढ़ी थी। खामेनेई ने माना कि इस किताब को पढ़ने से पहले उन्हें पता ही नहीं था कि अंग्रेजों के आने से पहले भारत कितना आगे और अमीर देश था। उन्होंने नेहरू को एक भरोसेमंद और बुद्धिमान इंसान बताया था। वे अक्सर अपने देश के युवाओं से कहते थे कि देखो, अंग्रेजों ने कैसे जानबूझकर भारत की तरक्की को रोका और वहां के उद्योगों को बर्बाद किया। वे भारत के इतिहास से अपने देश को सबक सिखाना चाहते थे।

किताबों के साथ साहित्य से भी था लगाव

सोशल मीडिया पर वायरल हुई दूसरी पोस्टों से यह भी पता चलता है कि खामेनेई को केवल राजनीति ही नहीं बल्कि साहित्य में भी काफी रुचि थी। खामेनेई को अंग्रेजी और रूसी कहानियां पढ़ने का भी शौक था। 2016 में उन्होंने खुद बताया था कि उन्होंने मशहूर लेखिका जेन ऑस्टिन का उपन्यास 'प्राइड एंड प्रेजुडिस' पढ़ा था। इतना ही नहीं, उन्हें रूसी लेखक जैसे टॉलस्टॉय की किताबें भी बहुत पसंद थीं।

खामेनेई को नेहरू की किताबों में थी दिलचस्पी

खामेनेई की मौत के बाद उनकी ये पुरानी बातें अब सोशल मीडिया पर काफी चर्चा में हैं। लोग यह जानकर हैरान हैं कि एक विदेशी नेता भारत के इतिहास और नेहरू के विचारों में इतनी दिलचस्पी रखता था। उनकी ये बातें दिखाती हैं कि अच्छी किताबें और अच्छी बातें किसी सरहद या राजनीति की गुलाम नहीं होतीं, वो कहीं भी अपना असर दिखा सकती हैं।

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