Human Hair for River Cleaning in India: नदियों में बढ़ते प्रदूषण को कम करने के लिए इन दिनों इंसानी बालों का इस्तेमाल किया जा रहा है।आइए जानते हैं कि इंसानी बालों से नदियों की सफाई (How human hair cleans polluted rivers) कैसे हो रही है।
Cleaning Rivers with Human Hair: नदियों के बढ़ते प्रदूषण के बारे में हम अक्सर खबरें पढ़ते रहते हैं, लेकिन आपको जानकर हैरानी होगी कि इसे साफ करने के लिए इंसानों के बाल का इस्तेमाल किया जा रहा है। इस तकनीक का इस्तेमाल अब यमुना नदी को प्रदूषण मुक्त करने के लिए किया जा रहा है। आइए, समझते हैं इसके पीछे की पूरी कहानी।
बालों में प्राकृतिक रूप से तेल (हाइड्रोकार्बन) को सोखने की एक क्षमता होती है। इस तकनीक का इस्तेमाल कर जल प्रदूषण को कम करने के लिए किया जा रहा है।
इंसानी बाल 'लिपोफिलिक' (Lipophilic) होते हैं, जिसका अर्थ है कि वे पानी को दूर रखते हैं और तेल, ग्रीस तथा अन्य हाइड्रोकार्बन (पेट्रोलियम पदार्थों) को अपनी ओर आकर्षित करते हैं। वैज्ञानिक रूप से, 1 किलोग्राम मानव बाल अपने वजन से लगभग 9 गुना ज्यादा तेल सोख सकते हैं।
नदियों की सफाई के लिए विशेष 'हेयर मैट्स' (Hair Mats) और 'हेयर बूम्स' (Hair Booms) बनाए जाते हैं। इसके लिए सैलून से निकले बेकार बालों और दान किए गए बालों को इकट्ठा किया जाता है। फिर मशीनों की मदद से इन्हें गूंथकर या दबाकर मोटी चटाइयां और लंबी थैलियां तैयार की जाती हैं।
बालों से बने इन जालों और चटाइयों को प्रदूषित नदियों या नहरों के पानी के बहाव के बीच में डाल दिया जाता है। जब पानी इनके ऊपर से गुजरता है, तो बाल पानी में घुले हुए तेल, ग्रीस और अन्य जहरीले रासायनिक प्रदूषकों को अपने अंदर सोख लेते हैं। भारत में 'केशकंबली फाउंडेशन' (Kesa Kamli Foundation) और 'मैटर ऑफ ट्रस्ट' (Matter of Trust) जैसी संस्थाएं इस तकनीक का उपयोग कर रही हैं।
इस तकनीक की सबसे अच्छी बात यह है कि यह 'जीरो वेस्ट' है। यानी एक बार जब ये मैट्स पूरी तरह तेल और कचरे से भर जाते हैं, तो इन्हें फेंकने के बजाय प्रोसेस करके खेती के लिए खाद या मल्च के रूप में रीसायकल कर लिया जाता है, जिससे कोई नया कचरा पैदा नहीं होता।
बालों से बने मैट्स उन नालों में डाले जाते हैं जो यमुना में गिरते हैं। इसे लगाने के बाद टेस्ट में देखा गया है कि इनके इस्तेमाल से पानी में गंदगी और तेल का स्तर काफी कम हुआ है और पानी के BOD और COD लेवल में करीब 40% तक की कमी आई है।
इस शानदार आइडिया के पीछे राहुल गुप्ता हैं, जिन्होंने 'मैटर ऑफ ट्रस्ट' के साथ मिलकर भारत में इसकी शुरुआत की। 'द बेटर इंडिया' (The Better India) की एक रिपोर्ट के अनुसार, शुरुआत में जब उन्होंने लोगों से बाल दान करने की अपील की, तो कई लोग इसे 'काला जादू' समझकर डर गए थे। लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी और आज 1,000 किलो से ज्यादा बालों को रिसाइकिल करके नदियों को साफ करने में मदद कर रहे है।