
Oral Hygiene: दांतों को स्वस्थ रखने के लिए सिर्फ ब्रश करना ही काफी नहीं है। दांतों के बीच फंसे भोजन और प्लाक को साफ करना भी जरूरी होता है, क्योंकि टूथब्रश इन जगहों तक पूरी तरह नहीं पहुंच पाता। इसके लिए डेंटल फ्लॉस और वॉटर फ्लॉसर जैसे विकल्प इस्तेमाल किए जाते हैं। लेकिन दोनों में क्या अंतर है और किसे इस्तेमाल करना चाहिए, आइए जानते हैं।
मेयो क्लिनिक (Mayo Clinic) के अनुसार डेंटल फ्लॉस दांतों के बीच की उन जगहों को साफ करने में मदद करता है, जहां टूथब्रश नहीं पहुंच पाता। यह दांतों के बीच जमा चिपचिपे प्लाक को हटाने में मदद करता है। प्लाक कम होने से मसूड़ों से खून आने और मसूड़ों की बीमारी का खतरा कम हो सकता है।
मेयो क्लिनिक (Mayo Clinic) के अनुसार वॉटर फ्लॉसर एक ऐसा उपकरण है, जिसमें पानी की धार को दांतों और उनके बीच की जगह पर डाला जाता है। इसे ओरल इरिगेटर या डेंटल वॉटर जेट भी कहा जाता है। यह दांतों के बीच फंसे खाने के टुकड़ों को निकालने में मदद कर सकता है और दांतों पर जमा कुछ प्लाक को भी हटाने में मदद करता है।
मेयो क्लिनिक (Mayo Clinic) के अनुसार अगर किसी व्यक्ति के दांतों में ब्रेसिज या दूसरी ऑर्थोडॉन्टिक चीजें लगी हैं या ऐसा डेंटल काम हुआ है जिसकी वजह से सामान्य फ्लॉस इस्तेमाल करना मुश्किल होता है, तो वॉटर फ्लॉसर उपयोगी हो सकता है। जिन लोगों को हाथ से डेंटल फ्लॉस इस्तेमाल करने में परेशानी होती है, उनके लिए भी यह एक विकल्प हो सकता है।
क्लीवलैंड क्लिनिक (Cleveland Clinic) के अनुसार वॉटर फ्लॉसर दांतों के बीच से खाने के बड़े टुकड़े और मलबा हटाने में मदद करता है, लेकिन दांतों की सतह पर मौजूद बायोफिल्म को हटाने के लिए पारंपरिक डेंटल फ्लॉस की जरूरत हो सकती है। इसलिए केवल वॉटर फ्लॉसर पर निर्भर रहने के बजाय अपनी जरूरत के अनुसार डेंटल फ्लॉस का इस्तेमाल करना चाहिए। वहीं मेयो क्लिनिक (Mayo Clinic) के अनुसार अगर कोई व्यक्ति सामान्य डेंटल फ्लॉस सही तरीके से इस्तेमाल कर रहा है और उसे मसूड़ों से खून आने या दूसरी परेशानी जैसी समस्या नहीं है, तो सिर्फ वॉटर फ्लॉसर इस्तेमाल करने के लिए अपना तरीका बदलना जरूरी नहीं है।
मेयो क्लिनिक (Mayo Clinic) के अनुसार दांतों के बीच की सफाई दिन में एक बार करनी चाहिए और दिन में दो बार ब्रश करना चाहिए। इसके साथ नियमित रूप से डेंटिस्ट से दांतों की जांच करवाना भी जरूरी है।
क्लीवलैंड क्लिनिक (Cleveland Clinic) के अनुसार दांतों को दिन में कम से कम दो बार फ्लोराइड वाले टूथपेस्ट और मुलायम ब्रिसल वाले टूथब्रश से साफ करना चाहिए। जीभ की सफाई करना, नियमित डेंटल चेकअप करवाना और धूम्रपान तथा अन्य तंबाकू उत्पादों से बचना भी ओरल हाइजीन के लिए जरूरी है। अगर मसूड़ों से बार बार खून आता है, दांतों में दर्द रहता है, दांत हिलने लगे हैं या लंबे समय से मुंह से बदबू आती है, तो डेंटिस्ट से जांच करवानी चाहिए।