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Reels देखने से शराब पीने जैसा असर? नई स्टडी में रील देखने को लेकर पता चली ये बातें

Effects of Reels on brain: रील्स स्क्रॉल का ज्यादा इस्तेमाल दिमाग के लिए खतरनाक हो सकता है। जानें कैसे ये आपकी नींद, फोकस और खुश रहने की क्षमता पर असर डालते हैं और क्यों जरूरी है स्क्रीन टाइम कंट्रोल करना।

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Aug 16, 2025
Effects of Reels on brain (photo- freepik)

Effects of Reels on brain: आज के समय में रील्स स्क्रॉल करने की लत आम हो गई है। रील्स या टिकटॉक जब देखना शुरू करते हैं तो घंटों कैसे निकल जाता है पता ही नहीं चलता। हमें लगता है कि ये तो टाइमपास है, लेकिन दिमाग की दुनिया कुछ और ही कहती है।

दरअसल, चीन की तियानजिन नॉर्मल यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर कियांग वांग की टीम ने रिसर्च में पाया कि ज़्यादा शॉर्ट वीडियो देखने से दिमाग के रिवार्ड सिस्टम (वही हिस्सा जो हमें मजा और खुशी महसूस कराता है) पर असर पड़ता है। ये असर वैसा ही है जैसा शराब या जुए की लत में देखने को मिलता है।

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दिमाग को मिल रही है डोपामिन की ओवरडोज

हर बार जब आप रील स्वाइप करते हैं या वीडियो देखते हैं, तो दिमाग में डोपामिन नाम का फील-गुड केमिकल रिलीज होता है। प्लेटफॉर्म्स वीडियो को छोटा, तेज और सरप्राइज से भरा रखते हैं ताकि दिमाग को बार-बार ये डोपामिन किक मिले। समस्या ये है कि धीरे-धीरे दिमाग को इसकी इतनी आदत पड़ जाती है कि रोजमर्रा की चीजें जैसे किताब पढ़ना, खाना खाना या दोस्तों से बात करना बोरिंग लगने लगता है।

ध्यान और फोकस पर असर

रील्स की तेज-तेज कटिंग और नया कंटेंट देखने की आदत आपके दिमाग के उस हिस्से को थका देती है जो फोकस, सोच-समझकर फैसले लेने और इमोशन्स कंट्रोल करने के काम आता है। नतीजा यह कि पढ़ाई या काम में मन नहीं लगता, छोटी-छोटी बातें याद नहीं रहतीं और अक्सर तुरंत रिएक्ट करने का मन करता है।

नींद की सबसे बड़ी दुश्मन लेट नाइट स्क्रॉलिंग

रात को लेटकर रील्स देखना नींद का सबसे बड़ा दुश्मन है। मोबाइल की तेज रोशनी और दिमाग को उत्तेजित करने वाले वीडियो शरीर की स्लीप हार्मोन मेलाटोनिन को दबा देते हैं। इससे नींद देर से आती है और गहरी नींद भी पूरी नहीं होती। नतीजा सुबह उठकर दिमाग सुस्त लगता है, ध्यान कम रहता है और दिनभर थकान महसूस होती है।

क्या करें?

रील्स और शॉर्ट वीडियो देखना मजेदार है, लेकिन हद से ज्यादा देखने पर दिमाग की सेहत बिगड़ सकती है। इसलिए जरूरी है कि स्क्रीन टाइम की लिमिट सेट करें, सोने से पहले मोबाइल से दूरी रखें, बीच-बीच में ब्रेक लेकर दिमाग को आराम दें, धीरे-धीरे ऐसी एक्टिविटीज अपनाएं जो सुकून दें, जैसे किताब पढ़ना या वॉक पर जाना।

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