Fatty Liver Diet : कुछ खाद्य पदार्थ लीवर को डिटॉक्स और फैटी लिवर कम करने में मदद करते हैं। जयपुर की न्यूट्रिशनिस्ट नेहा दुआ ने ऐसी 5 फायदेमंद चीजें बताईं और उनका कारण भी बताया।
Fatty Liver Diet : आपको पता है कुछ खाने की चीजें लीवर को स्वस्थ रखने और फैटी लीवर की समस्या को कम करने में मदद कर सकती हैं. जयपुर की डायटीशियन और न्यूट्रिशनिस्ट नेहा दुआ ने ऐसी 5 फायदेमंद चीजें बताईं और ये भी समझाया कि इन्हें क्यों खाना चाहिए.
हमारा लीवर शरीर का एक बहुत जरूरी अंग है. यह हमें स्वस्थ रखने के लिए कई बड़े काम करता है, जैसे शरीर से गंदगी निकालना और कार्बोहाइड्रेट, फैट व प्रोटीन को पचाना.
डायटीशियन और न्यूट्रिशनिस्ट नेहा दुआ ने कहा फैटी लीवर (Fatty Liver) बीमारी तब होती है जब आपके लीवर में जितना फैट होना चाहिए उससे ज़्यादा जमा होने लगता है.
हल्दी लीवर को साफ करने में मदद करती है. आप इसे एक हफ्ते तक रोज़ पानी या दूध में थोड़ी सी काली मिर्च के साथ ले सकते हैं. फिर दो हफ्ते का गैप देकर दोबारा शुरू कर सकते हैं.
लहसुन लीवर में जमा फैट (Fatty Liver) को कम करने में सहायक है. आप इसे कद्दूकस करके पानी के साथ निगल सकते हैं या अपने खाने में डाल सकते हैं.
नींबू लीवर की सफाई में काम आता है. रोज़ एक नींबू का रस पानी में मिलाकर पी सकते हैं, या इसे अपने खाने पर भी छिड़क सकते हैं.
टमाटर एंटीऑक्सीडेंट से भरपूर होते हैं, जो लीवर के लिए बहुत अच्छे हैं. इन्हें आप अपनी सलाद में डालकर खा सकते हैं.
ओट्स में फाइबर खूब होता है और ये लीवर के लिए हल्के होते हैं. आप इसे किसी भी तरह से खा सकते हैं—जैसे ओट्स का आटा बनाकर रोटी या चीला, या फिर साधारण ओट्स भेल.
अगर आपको फैटी लीवर की समस्या है, तो आपके मन में ये सवाल आ सकता है कि क्या कॉफी पीना आपके लिए अच्छा है. अच्छी खबर ये है कि कई रिसर्च बताती हैं कि कॉफी फैटी लीवर के लिए फायदेमंद हो सकती है.
लिवर को नुकसान से बचाती है: कॉफी लीवर को डैमेज होने से बचाने में मदद कर सकती है, खासकर उन लोगों में जिन्हें फैटी लीवर के कारण सिरोसिस (लीवर का सिकुड़ना) होने का खतरा होता है.
एंटीऑक्सीडेंट से भरपूर: कॉफी में एंटीऑक्सीडेंट होते हैं जो शरीर को नुकसान पहुंचाने वाले फ्री रेडिकल्स से बचाते हैं. ये लीवर के स्वास्थ्य के लिए भी अच्छा है.
Fatty Liver Diet: फैटी लिवर से बचें, खाएं ये चीजें!
फैटी लीवर की बीमारी, जिसे हेपेटिक स्टीटोसिस भी कहते हैं तब होती है जब लीवर की कोशिकाओं में बहुत ज़्यादा फैट जमा हो जाता है. यह जमा हुआ फैट लीवर की कोशिकाओं के सामान्य कामों में रुकावट डालता है.
अल्कोहल से होने वाला फैटी लीवर (AFLD): यह तब होता है जब कोई व्यक्ति बहुत ज़्यादा शराब पीता है.
नॉन-अल्कोहल फैटी लीवर (NAFLD): यह शराब पीने से जुड़ा नहीं है, बल्कि इसका संबंध मोटापा, डायबिटीज या शरीर में होने वाली मेटाबॉलिक गड़बड़ियों से होता है.
तो आसान शब्दों में कहें तो फैटी लीवर का मतलब है आपके लीवर में जरूरत से ज़्यादा फैट का जमा हो जाना, जो उसकी कार्यप्रणाली को प्रभावित करता है.
डिसक्लेमर: इस लेख में दी गई जानकारी केवल जागरूकता के लिए है और यह किसी चिकित्सा सलाह का विकल्प नहीं है। पाठकों को सलाह दी जाती है कि वे किसी भी दवा या उपचार को अपनाने से पहले विशेषज्ञ या डॉक्टर से सलाह लें।