Health Alert: फास्ट फूड की बढ़ती आदत अब सिर्फ वजन नहीं, बल्कि जिंदगी के साल भी छीन रही है। हेल्थ एक्सपर्ट्स के मुताबिक जरूरत से ज्यादा पिज्जा और प्रोसेस्ड फूड का सेवन सिगरेट जितना ही खतरनाक साबित हो सकता है, जिससे लोगों की औसत आयु तेजी से घट रही है।
Health Alert: आज की फास्ट-फूड लाइफस्टाइल में पिज्जा सिर्फ एक ट्रीट नहीं, बल्कि रोजमर्रा की आदत बनता जा रहा है। लेकिन हेल्थ एक्सपर्ट्स की चेतावनी चौंकाने वाली है जरूरत से ज्यादा पिज्जा और प्रोसेस्ड फूड का सेवन सिगरेट जितना ही नुकसानदायक हो सकता है। ज्यादा नमक, रिफाइंड कार्ब्स और ट्रांस फैट से भरा यह खाना धीरे-धीरे दिल, मेटाबॉलिज्म और इम्युनिटी को कमजोर कर रहा है, जिससे लोगों की औसत आयु तेजी से घटने का खतरा बढ़ रहा है।
बिहार के आरा में एक दर्दनाक घटना सामने आई है, जहां 15 साल के एक लड़के की संदिग्ध हालात में मौत हो गई। परिजनों के अनुसार, रात में पिज्जा खाने के कुछ समय बाद ही उसकी तबीयत अचानक बिगड़ गई और वह बेहोश होकर गिर पड़ा। घबराए घरवाले उसे तुरंत पास के पीएचसी लेकर पहुंचे, जहां से हालत गंभीर होने पर उसे आरा सदर अस्पताल रेफर किया गया। हालांकि, अस्पताल पहुंचने से पहले ही रास्ते में उसकी मौत हो गई। मृतक दसवीं कक्षा का छात्र था और इसी साल बोर्ड परीक्षा देने वाला था। डॉक्टरों ने शुरुआती जांच में फूड पॉइजनिंग की आशंका जताई है, मामले की जांच जारी है।
पिछले दो तीन दशकों में दुनिया भर में औसत जीवन प्रत्याशा में गिरावट देखी जा रही है। भारत में जहां पहले यह आंकड़ा लगातार बढ़ रहा था, वहीं अब यह लगभग 69 वर्ष पर आकर ठहर गया है। इसकी एक बड़ी वजह बदलती लाइफस्टाइल और असंतुलित खान-पान है। मोटापा, डायबिटीज, हृदय रोग और पाचन से जुड़ी समस्याएं अब कम उम्र में ही लोगों को घेर रही हैं।
अब तक माना जाता था कि केवल धूम्रपान और शराब ही आयु घटाने वाले बड़े कारण हैं। शोध बताते हैं कि एक सिगरेट औसतन जीवन के 11 मिनट कम कर देती है। लेकिन मिशिगन यूनिवर्सिटी के एक अध्ययन में सामने आया कि पिज्जा जैसी अल्ट्रा-प्रोसेस्ड चीजें भी 7–8 मिनट तक जीवन अवधि घटा सकती हैं। यानी नुकसान के मामले में यह सिगरेट के बेहद करीब है।
पिज्जा के अलावा हॉट डॉग, चिकन विंग्स जैसे फूड्स में अत्यधिक नमक, ट्रांस फैट, रिफाइंड कार्बोहाइड्रेट और केमिकल प्रिजर्वेटिव्स होते हैं। नॉर्थईस्ट रीजनल सेंटर फॉर रूरल डेवलपमेंट के शोध के अनुसार, ऐसे आहार का नियमित सेवन करने वालों में मानसिक क्षमता में गिरावट, सूजन और हृदय रोग का जोखिम अधिक पाया गया।
सर्वे बताते हैं कि कई लोग हफ्ते में दो-तीन बार फास्ट फूड खाने को सुरक्षित मानते हैं। लेकिन स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि समस्या मात्रा से ज्यादा आदत की है। अल्ट्रा-प्रोसेस्ड फूड शरीर के मेटाबॉलिज्म को धीरे-धीरे बिगाड़ता है, जिसका असर लंबे समय बाद सामने आता है।
एनआईएच के रिपोर्ट के अनुसार, सही भोजन से इस नुकसान की भरपाई की जा सकती है। रिसर्च बताती है कि रोज नट्स, सीड्स, फल, हरी सब्जियां और ओमेगा-3 से भरपूर मछली खाने से जीवन प्रत्याशा बढ़ सकती है। नियमित व्यायाम और संतुलित आहार न सिर्फ बीमारियों से बचाते हैं, बल्कि लंबी और स्वस्थ जिंदगी का रास्ता भी खोलते हैं।