Horse Statue Rules History: क्या आप जानते हैं कि चौराहों पर लगी योद्धाओं की मूर्तियों में घोड़े के पैर से आप उस योद्धा के बारे में पता लगा सकते हैं? सुनने में आपको अजीब लग सकता है लेकिन यह सच है। आइए आज के इस लेख में जानते हैं कैसे।
Warrior Horse Statue Signs: आपने कभी न कभी ट्रैवलिंग के दौरान या किसी काम से घर से बाहर निकलने पर किसी चौराहे से गुजरते समय वहां किसी महान योद्धा की मूर्ति देखी होगी। आपने गौर किया होगा कि इन मूर्तियों में घोड़े अलग-अलग स्टाइल में खड़े होते हैं। ऐसे में ये देखने के बाद आपके दिमाग में कभी न कभी यह सवाल जरूर आया होगा कि आखिर ये सब अलग-अलग क्यों होते हैं? आपको जानकर हैरानी होगी कि घोड़े के पैरों की ये पोजीशन कोई इत्तेफाक नहीं है, बल्कि यह एक तरह का सीक्रेट मैसेज है। इसके जरिए आप यह पता लगा सकते हैं कि उस वीर योद्धा की मौत कैसे हुई थी। आइए इसके बारे में विस्तार से जानते हैं।
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म इंस्टाग्राम के @ajaymudgillofficial चैनल पर Ajay Mudgil द्वारा साझा किए गए एक वीडियो के अनुसार, अगर आप किसी ऐसी मूर्ति को देखते हैं जिसमें घोड़े के आगे के दोनों पैर हवा में उठे हुए हैं, तो इसका मतलब बहुत साफ है वह योद्धा जंग के मैदान में ही शहीद हुआ था। यानी उस वीर की जान लड़ाई लड़ते हुए दुश्मनों के बीच गई थी। यह पोजीशन उनकी बहादुरी और युद्ध में मिली शहादत को सलाम करने का एक तरीका है।
अगर घोड़े का सिर्फ एक पैर हवा में है और बाकी तीन पैर जमीन पर टिके हैं, तो इसका मतलब है कि योद्धा की मौत जंग में लगे जख्मों की वजह से हुई थी। यानी वह लड़ाई के दौरान बुरी तरह घायल तो हुआ था, लेकिन उसकी मौत तुरंत मैदान में नहीं हुई। जंग में लगी चोटों के कारण इलाज के दौरान या कुछ समय बाद उनकी जान गई।
अगर मूर्ति में घोड़ा अपने चारों पैरों पर बिल्कुल सीधा और नॉर्मल खड़ा है, तो इसका इशारा यह है कि योद्धा की मौत कुदरती (Natural Death) तरीके से हुई थी। इसका मतलब यह बिल्कुल नहीं है कि उन्होंने लड़ाइयां नहीं लड़ीं, बल्कि इसका मतलब यह है कि उन्होंने अपनी जिंदगी में कई जंग तो लड़ीं, लेकिन उनकी मौत किसी घाव या चोट से नहीं बल्कि बढ़ती उम्र या किसी बीमारी की वजह से हुई।