
Mamata Banerjee| image credit gemini
Mamata Banerjee Struggle Story: पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी भारतीय राजनीति का एक ऐसा चेहरा हैं जिन्हें नजरअंदाज करना मुश्किल है। दीदी के नाम से मशहूर ममता अपनी सादगी और जुझारू स्वभाव के लिए जानी जाती हैं। मुख्यमंत्री होने के बावजूद वो आज भी अपने पुराने छोटे से घर में रहती हैं, साधारण हवाई चप्पल पहनती हैं और सरकारी सैलरी तक नहीं लेतीं। बहुत से लोग उनकी सादगी के बारे में तो जानते हैं, लेकिन उनके जीवन के कड़े संघर्ष से वाकिफ नहीं हैं।
आइए, आज के इस लेख में ममता बनर्जी की लाइफ, उनके पॉलिटिकल सफर और राजनीति में आने से पहले की चुनौतियों के बारे में विस्तार से जानते हैं।
ममता बनर्जी का बचपन गरीबी में बीता। जब वह महज 9 साल की थीं, तभी उनके पिता जो एक स्वतंत्रता सेनानी थे उनका निधन हो गया। पिता के जाने के बाद घर की पूरी जिम्मेदारी उनके कंधों पर आ गई। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, अपने छोटे भाई-बहनों के पालन-पोषण और मां की मदद करने के लिए उन्होंने दूध बेचने का काम भी किया।
इतनी तंगी और मुश्किलों के बावजूद ममता ने कभी अपनी पढ़ाई से समझौता नहीं किया। उन्होंने जोगमाया देवी कॉलेज से इतिहास में ऑनर्स किया। इसके बाद कलकत्ता विश्वविद्यालय से इस्लामिक इतिहास में मास्टर डिग्री (MA) ली। उन्होंने बीएड (B.Ed) करने के साथ-साथ जोगेश चंद्र चौधरी लॉ कॉलेज से कानून (Law) की पढ़ाई भी पूरी की।
ममता बनर्जी ने कॉलेज के दिनों में ही राजनीति की शुरुआत कर दी थी और वह बेहद कम उम्र में ही महिला कांग्रेस की महासचिव बन गई थीं। 1984 के लोकसभा चुनाव में उन्होंने तब सबको हैरान कर दिया, जब उन्होंने जादवपुर सीट से सीपीएम के दिग्गज नेता सोमनाथ चटर्जी को हरा दिया। इस ऐतिहासिक जीत के साथ वह उस समय देश की सबसे युवा सांसद बनीं।
ममता बनर्जी लंबे समय तक कांग्रेस का हिस्सा रहीं और केंद्र सरकार में मंत्री भी बनीं। हालांकि, पश्चिम बंगाल की राजनीति और सीपीएम के विरोध के तरीके को लेकर उनकी अपनी पार्टी से अनबन रहने लगी। उन्हें लगा कि कांग्रेस बंगाल में सही से लड़ाई नहीं लड़ रही है। आखिरकार 1997 में उन्होंने कांग्रेस छोड़ दी और 1 जनवरी 1998 को अपनी खुद की पार्टी अखिल भारतीय तृणमूल कांग्रेस (TMC) बना ली।
ममता बनर्जी की सबसे बड़ी पहचान उनकी सादगी है। मुख्यमंत्री बनने के बाद भी वह आलीशान सीएम हाउस में नहीं रहतीं, बल्कि आज भी कालीघाट वाले अपने उसी पुराने पुश्तैनी घर में रहती हैं। उन्हें बड़ी गाड़ियों या ऐशो-आराम का कोई शौक नहीं है। वह आज भी वही साधारण सूती साड़ी पहनती हैं और अपनी मेहनत के दम पर अपनी पहचान बनाए हुए हैं।
Published on:
04 May 2026 10:57 am
