
Types Of Eyeglass Lenses: पास या दूर की चीजें साफ देखने में परेशानी हो या फिर दिनभर मोबाइल, कंप्यूटर और लैपटॉप की स्क्रीन देखने से आंखों में थकान महसूस होने पर लोग चश्मा खरीदने के बारे में सोचते हैं। लेकिन चश्मा बनवाते समय अक्सर ब्लू कट, एंटी ग्लेयर, स्क्रैच रेसिस्टेंट और फोटोक्रोमिक जैसे कई तरह के लेंस और कोटिंग के बारे में सुनने के बाद आम लोगों के लिए यह समझना मुश्किल हो जाता है कि आखिर उनके लिए कौन सा लेंस सही रहेगा। ऐसे में आइए जानते हैं चश्मे के अलग अलग लेंस और कोटिंग से जुड़ी जरूरी बातें।
क्लीवलैंड क्लिनिक (Cleveland Clinic) के अनुसार, जब हम किसी वस्तु को देखते हैं तो प्रकाश आंखों में प्रवेश करके कॉर्निया और लेंस से गुजरता है और रेटिना तक पहुंचता है। सामान्य स्थिति में आंखें प्रकाश को सही तरीके से मोड़कर रेटिना पर स्पष्ट तस्वीर बनाती हैं। लेकिन नजर से जुड़ी कुछ समस्याओं में प्रकाश सही जगह पर फोकस नहीं हो पाता और चीजें धुंधली दिखाई दे सकती हैं। चश्मे के लेंस प्रकाश के मुड़ने की दिशा को बदलकर इस समस्या को सुधारने में मदद करते हैं। इसी वजह से सही नंबर का चश्मा पहनने पर पास या दूर की चीजें ज्यादा स्पष्ट दिखाई दे सकती हैं।
चश्मा मुख्य रूप से आंखों की रिफ्रैक्टिव एरर से जुड़ी समस्याओं को ठीक करने में मदद करता है।
इसमें पास की चीजें साफ दिखाई देती हैं, लेकिन दूर की चीजें धुंधली दिखाई दे सकती हैं।
इसमें पास की चीजों पर फोकस करने में परेशानी हो सकती है। कुछ लोगों को दूर की चीजें थोड़ी साफ दिखाई दे सकती हैं।
इसमें पास और दूर दोनों जगह की चीजें धुंधली दिखाई दे सकती हैं। कुछ लोगों को खासकर रात में रोशनी के आसपास फैलती हुई किरणें भी दिखाई दे सकती हैं।
उम्र बढ़ने के साथ आंखों के लिए पास की चीजों पर फोकस करना मुश्किल हो सकता है। पढ़ने के लिए इस्तेमाल होने वाले चश्मे की जरूरत इसी स्थिति में पड़ सकती है।
जरूरत और आंखों की समस्या के अनुसार अलग अलग प्रकार के लेंस इस्तेमाल किए जाते हैं।
सिंगल विजन लेंस इनमें एक ही प्रकार का नंबर होता है और इन्हें खास दूरी के लिए इस्तेमाल किया जाता है।
मल्टीफोकल लेंस इनमें अलग अलग दूरी के लिए एक से अधिक नंबर शामिल होते हैं।
बाइफोकल लेंस इनमें दो अलग नंबर होते हैं। एक हिस्सा दूर देखने और दूसरा हिस्सा पास देखने में मदद करता है।
ट्राइफोकल लेंस इनमें तीन अलग प्रकार के नंबर शामिल होते हैं।
प्रोग्रेसिव लेंस इनमें अलग नंबरों के बीच कोई स्पष्ट लाइन नहीं होती। लेंस का नंबर ऊपर से नीचे की ओर धीरे धीरे बदलता है।
रीडिंग ग्लासेस इनका इस्तेमाल मुख्य रूप से पास की चीजें पढ़ने में मदद के लिए किया जाता है।
प्रिज्म लेंस कुछ मामलों में आंखों के सही संरेखण से जुड़ी डबल विजन की समस्या में इनका इस्तेमाल किया जा सकता है।
चश्मा बनवाते समय परेशानी के साथ ही लेंस पर कोटिंग के कई ऑप्शन भी मौजूद होते हैं। ऐसे में आप अपनी जरूरत के हिसाब से लेंस पर की गई कोटिंग का चुनाव कर सकते हैं।
लेंस को खरोंच से बचाने के लिए उस पर एक खास तरह की कोटिंग लगाई जाती है। इसे स्क्रैच रेसिस्टेंट या हार्ड कोटिंग कहते हैं। यह लेंस को रोजाना इस्तेमाल के दौरान होने वाली छोटी मोटी खरोंच से बचाने में मदद करती है।
एंटी ग्लेयर कोटिंग लेंस पर पड़ने वाली चमक और रोशनी के प्रतिबिंब को कम करने में मदद करती है। इससे चश्मे से देखने में परेशानी कम हो सकती है और चीजें ज्यादा साफ दिखाई दे सकती हैं। यह कोटिंग खासकर रात में गाड़ी चलाने या तेज रोशनी में काम करने वाले लोगों के लिए उपयोगी हो सकती है। इससे चश्मे के लेंस पर रोशनी की चमक कम दिखाई देती है।
सूरज की यूवी किरणें आंखों के लिए नुकसानदायक हो सकती हैं। लंबे समय तक इन किरणों के संपर्क में रहने से आंखों की सेहत पर असर पड़ सकता है। इसलिए बाहर निकलते समय आंखों को यूवी किरणों से बचाना जरूरी है।
फोटोक्रोमिक लेंस ऐसे लेंस होते हैं जो धूप में जाने पर अपने आप गहरे हो जाते हैं और घर के अंदर आने पर फिर से हल्के या लगभग साफ हो जाते हैं। अगर आप बार बार धूप का चश्मा और सामान्य चश्मा बदलना नहीं चाहते हैं तो फोटोक्रोमिक लेंस आपके लिए सुविधाजनक हो सकते हैं।
ब्लू कट चश्मे के लेंस स्क्रीन से आने वाली ब्लू लाइट की कुछ तरंगों को फिल्टर करते हैं। इन्हें आमतौर पर मोबाइल, कंप्यूटर और लैपटॉप की स्क्रीन से आने वाली ब्लू लाइट को कम करने के लिए इस्तेमाल किया जाता है।