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Mahalaya Amavasya पर पितरों के श्राद्ध और पिंडदान के लिए जा सकते हैं इन 9 जगहों पर

Mahalaya Amavasya: महालया अमावस्या पर पितरों के लिए श्राद्ध और पिंडदान करने देश की किन किन जगहों पर जा सकते हैं, आइए जानते हैं ऐसी जगहों के बारे में जहां पूर्वजों के लिए तर्पण और पिंडदान करने की धार्मिक परंपरा रही है।
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Oct 07, 2026
Mahalaya Amavasya, Pitru Shraddha
Mahalaya Amavasya (Representative Image) Image Credit Magnific

Pitru Shraddha: महालया अमावस्या का दिन पितरों को याद करने और उनके प्रति श्रद्धा व्यक्त करने के लिए खास माना जाता है। इस दिन लोग अपने पूर्वजों के लिए श्राद्ध, तर्पण और पिंडदान जैसे धार्मिक कर्म करते हैं। कई लोग इस मौके पर किसी पवित्र नदी या तीर्थ स्थल पर जाकर पितरों का स्मरण करते हैं। देश में कई ऐसी जगहें हैं, जहां पिंडदान और श्राद्ध करने की परंपरा लंबे समय से चली आ रही है। इन तीर्थ स्थलों को लेकर अलग अलग धार्मिक मान्यताएं हैं। अगर आप महालया अमावस्या पर पितरों के लिए पिंडदान करने की सोच रहे हैं, तो इन प्रमुख जगहों पर जा सकते हैं।

हरिद्वार

उत्तराखंड का हरिद्वार गंगा नदी के किनारे बसा प्रमुख तीर्थ स्थल है। यहां नारायणी शिला को पितरों से जुड़े धार्मिक कर्मों के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है। लोग गंगा के किनारे तर्पण और पिंडदान करते हैं और अपने पूर्वजों को श्रद्धा से याद करते हैं।

मथुरा

उत्तर प्रदेश की मथुरा नगरी भगवान कृष्ण की जन्मभूमि के रूप में प्रसिद्ध है। यहां पितरों के लिए तर्पण और पिंडदान करने की भी परंपरा है। यमुना के किनारे बोधिनी तीर्थ, विश्रांति तीर्थ और वायु तीर्थ जैसे स्थानों पर पितरों के लिए धार्मिक कर्म किए जाते हैं।

प्रयागराज

उत्तर प्रदेश का प्रयागराज गंगा, यमुना और सरस्वती के संगम के लिए प्रसिद्ध है। संगम पर पितरों के लिए तर्पण और पिंडदान करने की परंपरा है। महालया अमावस्या जैसे खास अवसरों पर भी लोग यहां पहुंचकर अपने पूर्वजों के लिए धार्मिक कर्म करते हैं।

अयोध्या

अयोध्या में सरयू नदी का विशेष धार्मिक महत्व है। सरयू के किनारे भात कुंड को पितरों से जुड़े धार्मिक कर्मों के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है। यहां लोग अपने पूर्वजों के लिए पिंडदान, पूजा और हवन जैसे धार्मिक कर्म करते हैं।

वाराणसी

वाराणसी यानी काशी में गंगा के किनारे पितरों के लिए श्राद्ध और दूसरे धार्मिक कर्म किए जाते हैं। यहां लोग हवन, मंत्र जाप और पिंडदान जैसे कर्म करते हैं। काशी में पितरों के लिए धार्मिक अनुष्ठान करने की भी पुरानी परंपरा बताई जाती है।

उज्जैन

मध्य प्रदेश का उज्जैन देश के प्रमुख धार्मिक शहरों में शामिल है। यहां शिप्रा नदी के किनारे पितरों के लिए पिंडदान और तर्पण किया जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, शिप्रा के तट पर पितरों के लिए श्राद्ध और दूसरे धार्मिक कर्म करना महत्वपूर्ण माना जाता है।

गया

बिहार का गया पिंडदान के लिए देश के प्रमुख धार्मिक स्थलों में से एक माना जाता है। यहां फल्गु नदी के किनारे पितरों के लिए पिंडदान करने की परंपरा है। गया में कई ऐसे धार्मिक स्थल हैं, जहां लोग अपने पूर्वजों के लिए श्राद्ध और पिंडदान करने पहुंचते हैं।

जगन्नाथ पुरी

ओडिशा का जगन्नाथ पुरी भी पितरों के लिए धार्मिक कर्म करने वाले प्रमुख तीर्थ स्थलों में शामिल है। यहां महानदी और भार्गवी नदी से जुड़े क्षेत्र में पिंडदान करने की परंपरा बताई जाती है। जगन्नाथ पुरी चार धाम में शामिल होने के कारण भी हिंदू धर्म के प्रमुख तीर्थ स्थलों में गिना जाता है।

द्वारका

गुजरात की द्वारका भगवान कृष्ण से जुड़ी प्रमुख धार्मिक नगरी है। यहां गोमती नदी के किनारे स्थित गोमती घाट का खास धार्मिक महत्व है। लोग यहां दर्शन और पूजा के साथ पितरों के लिए तर्पण और पिंडदान जैसे धार्मिक कर्म भी करते हैं।

Updated on:
07 Oct 2026 01:58 pm
Published on:
07 Oct 2026 01:35 pm