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मंडूक तंत्र पर बना है मेंढक मंदिर, भगवान शिव के साथ होती है मेंढक की पूजा 

Mendhak Mandir Lakhimpur Kheri: सावन 2026 में अगर आप उत्तर प्रदेश घूमने जा रहे हैं, तो लखीमपुर खीरी जिले में स्थित प्रसिद्ध मेंढक मंदिर में भगवान शिव का दर्शन करने के लिए जा सकते हैं।
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Aug 17, 2026
Mendhak Mandir
लखीमपुर खीरी का फेमस Mendhak Mandir / image credit instagram/uttarpradeshtourism

MendhakTemple Lakhimpur Kheri: सावन के पावन महीने में वैसे तो पूरे महीने ही शिव मंदिरों में श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ती है, लेकिन खासकर सोमवार को भगवान शिव के दर्शन के लिए बड़ी संख्या में भक्त मंदिरों में पहुंचते हैं। भक्त जलाभिषेक और पूजा-अर्चना करने के साथ ही भगवान भोलेनाथ का दर्शन करने के लिए दूर-दूर से शिव मंदिर पहुंचते हैं। ऐसे में अगर आप उत्तर प्रदेश में रहते हैं या यहां घूमने जा रहे हैं, तो लखीमपुर खीरी जिले के ओयल में स्थित प्रसिद्ध मेंढक मंदिर दर्शन करने जा सकते हैं। आइए जानते हैं इस मंदिर के बारे में।

‘मंडूक तंत्र’ से जुड़ा है मेंढक मंदिर

उत्तर प्रदेश के लखीमपुर खीरी जिले से करीब 12 किलोमीटर दूर ओयल में स्थित यह मंदिर भगवान शिव को समर्पित है। इसकी सबसे खास बात इसकी अनोखी संरचना है, क्योंकि मंदिर एक विशाल मेंढक की आकृति पर बना है। मंदिर की वास्तुकला को प्राचीन ‘मंडूक तंत्र’ से जोड़कर देखा जाता है। यही अनोखी बनावट इसे सामान्य शिव मंदिरों से अलग पहचान देती है।

1860 से 1870 के बीच हुआ था मंदिर का निर्माण

लखीमपुर खीरी जिला प्रशासन की आधिकारिक वेबसाइट के अनुसार , मेंढक मंदिर का निर्माण ओयल रियासत के तत्कालीन राजा ने वर्ष 1860 से 1870 के बीच कराया था। मंदिर करीब 18 मीटर लंबा और 25 मीटर चौड़े क्षेत्र में बना हुआ है। इसकी संरचना में अष्टकोणीय कमल की आकृति के साथ विशेष ज्यामितीय स्वरूप देखने को मिलता है। मंदिर की वास्तुकला में रहस्यमयी तांत्रिक वास्तुकला और गहन आध्यात्मिक ऊर्जा का प्रभाव बताया जाता है।

विशाल मेंढक की आकृति है मंदिर की पहचान

मंदिर के नीचे बनी विशाल मेंढक की आकृति इसे सबसे अलग बनाती है। मेंढक का चेहरा करीब 2 मीटर लंबा, डेढ़ मीटर चौड़ा और 1 मीटर ऊंचा बताया जाता है। मंदिर का मुख्य द्वार पूर्व दिशा की ओर खुलता है, जबकि दूसरा द्वार दक्षिण दिशा में है। मंदिर की यह अनोखी संरचना इसे धार्मिक स्थल के साथ-साथ वास्तुकला में रुचि रखने वाले लोगों के लिए भी आकर्षण का केंद्र बनाती है।

शिवलिंग और मंदिर की विशेष मान्यताएं

मंदिर में भगवान शिव का शिवलिंग स्थापित है। इस शिवलिंग को “बानसुर प्रदरी नरमेश्वर नरदादा कंड” से लाया गया था। मंदिर की दीवारों पर की गई नक्काशी और पारंपरिक स्थापत्य शैली भी इसकी खूबसूरती बढ़ाती है।

Updated on:
17 Aug 2026 10:56 am
Published on:
17 Aug 2026 10:56 am