
Menopause in Women: रात में अचानक पसीने से नींद खुलना, बिना वजह गर्मी महसूस होना, थकान या चिड़चिड़ापन। कई महिलाएं इन बदलावों को बढ़ती उम्र का असर मानकर नजरअंदाज कर देती हैं, जबकि ये मेनोपॉज यानी रजोनिवृत्ति के आसपास होने वाले हार्मोनल बदलावों के लक्षण हो सकते हैं। यह कोई बीमारी नहीं, बल्कि जीवन का स्वाभाविक पड़ाव है। सही जानकारी और जरूरत के अनुसार चिकित्सा सहायता से इस दौर को सहज बनाया जा सकता है। संयुक्त राष्ट्र जनसंख्या कोष (यूएनएफपीए) के अनुसार, हर साल करीब 4.7 करोड़ महिलाएं मेनोपॉज के बाद के चरण में प्रवेश करती हैं। वर्ष 2030 तक दुनिया में एक अरब से अधिक महिलाएं मेनोपॉज के बाद के दौर में होंगी।
आधी महिलाओं को स्वास्थ्य प्रभावों की जानकारी नहीं
वर्ष 2025 में क्लाइमेक्टेरिक जर्नल में प्रकाशित एक अध्ययन में वंचित समुदायों की 32,518 महिलाओं को शामिल किया गया। इसमें 50% महिलाओं को मेनोपॉज के स्वास्थ्य पर पड़ने वाले प्रभावों की जानकारी नहीं थी, जबकि 62% को उपलब्ध उपचारों के बारे में पता नहीं था।
विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के अनुसार, मेनोपॉज आमतौर पर 45 से 55 वर्ष की उम्र के बीच होता है। किसी अन्य कारण के बिना लगातार 12 महीने तक मासिक धर्म न आने पर इसे मेनोपॉज माना जाता है। इससे पहले के संक्रमणकाल को पेरिमेनोपॉज कहते हैं। इस दौरान पीरियड्स अनियमित होने के साथ अचानक गर्मी लगना, रात में पसीना आना, नींद में परेशानी, मनोदशा में बदलाव, जोड़ों में दर्द और योनि में सूखापन जैसे लक्षण हो सकते हैं। एस्ट्रोजन हार्मोन में कमी का असर हड्डियों और हृदय स्वास्थ्य पर भी पड़ सकता है। यदि लक्षण रोजमर्रा की जिंदगी को प्रभावित कर रहे हैं, तो स्त्री रोग विशेषज्ञ से सलाह लेनी चाहिए। जरूरत के अनुसार जीवनशैली में बदलाव और चिकित्सा उपचार से राहत मिल सकती है।
भारतीय मेनोपॉज सोसाइटी की 2026 की क्लिनिकल गाइडलाइन में मेनोपॉज को मेडिकल शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं में अधिक जगह देने की जरूरत बताई गई है। इसमें महिलाओं को जागरूक करने, स्वास्थ्यकर्मियों को प्रशिक्षित करने और 40 से 60 वर्ष की महिलाओं की जरूरतों पर विशेष ध्यान देने की सिफारिश की गई है।
मेनोपॉज पर काम करने वाले वेलनेस ब्रांड मेनोवेदा की मई 2026 की रिपोर्ट के मुताबिक, भारत में मेनोपॉज से जुड़ी समस्याओं के कारण हर साल करीब 150 अरब डॉलर यानी लगभग 13 लाख करोड़ रुपए के आर्थिक नुकसान का अनुमान है। इसमें स्वास्थ्य संबंधी खर्च और कामकाज की उत्पादकता में कमी शामिल है।
वर्ष 2026 में प्रकाशित जापान के एक अध्ययन ने मासिक धर्म और मेनोपॉज से जुड़े लक्षणों के कारण सालाना 2.296 ट्रिलियन येन यानी करीब 14.65 अरब डॉलर की उत्पादकता प्रभावित होने का अनुमान लगाया। इसमें बीमारी के कारण काम पर अनुपस्थित रहने और काम के दौरान कार्यक्षमता घटने, दोनों का असर शामिल है। यह आंकड़ा केवल मेनोपॉज का नहीं, बल्कि दोनों स्थितियों के संयुक्त प्रभाव का अनुमान है।