
Shaligram Stone Nepal: नेपाल में आई हाल की विनाशकारी बाढ़ के बीच सोशल मीडिया पर एक विशाल काले पत्थर की तस्वीर तेजी से वायरल हो रही है। तस्वीर को लेकर दावा किया जा रहा है कि यह दुनिया की सबसे बड़ी शालिग्राम शिला है। ऐसे में आइए जानते हैं शालिग्राम क्या होता है, कैसे बनता है, कहां मिलता है और इससे जुड़ी धार्मिक मान्यताएं क्या हैं।
हिंदू धर्म में शालिग्राम को भगवान विष्णु का स्वरूप माना जाता है। यह एक खास तरह की शिला है, जिसका हिंदू धर्म में धार्मिक महत्व काफी ज्यादा है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, शालिग्राम को भगवान विष्णु का निवास स्थान भी माना जाता है। इसे एक प्रकार का जीवाश्म पत्थर से जुड़ी शिला बताया जाता है और भगवान विष्णु का प्रतिरूप माना जाता है। पद्मपुराण के अनुसार, गंडकी या नारायणी नदी के एक क्षेत्र में शालिग्राम स्थल नाम का एक महत्वपूर्ण स्थान है। यहां से निकलने वाली शिला को शालिग्राम कहा जाता है।
नेपाल पर्यटन बोर्ड के अनुसार, काली गंडकी नदी में कागबेनी से लेकर दक्षिण में रिडी तक शालिग्राम पाए जाते हैं। मुक्तिनाथ के उत्तर में करीब 6400 मीटर की ऊंचाई पर स्थित दामोदर कुंड को काली गंडकी नदी का स्रोत माना जाता है और यहां बड़ी संख्या में शालिग्राम मिलते हैं।
शालिग्राम का प्राकृतिक रूप खास माना जाता है। इसे जीवाश्म से जुड़ी शिला बताया जाता है। शालिग्राम पर बने कुछ निशान सुदर्शन चक्र जैसे दिखाई देते हैं। नेपाल पर्यटन बोर्ड के अनुसार, शालिग्राम अमोनाइट जीवों के जीवाश्म हैं, जो लाखों साल पहले जुरासिक काल में समुद्र में रहते थे। वहीं धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, शालिग्राम अलग अलग रंगों में पाए जाते हैं। इनमें लाल, नीला, पीला, काला और हरा रंग शामिल हैं। मान्यता के अनुसार, पीले और सुनहरे रंग के शालिग्राम को शुभ माना जाता है।
शालिग्राम को हिंदू धर्म में भगवान विष्णु का प्रतीक माना जाता है। धार्मिक ग्रंथों में भी इसका उल्लेख मिलता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, शालिग्राम का दर्शन और पूजा करना शुभ माना जाता है। इसे घर में रखना भी भगवान के करीब रहने के समान माना जाता है।