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नन्हे लेखकों की कल्पनाओं की उड़ान

Kids Corner: चित्र देखो कहानी लिखो 89.... बच्चों की लिखी रोचक कहानियां परिवार परिशिष्ट (29 जुलाई 2026) के पेज 4 पर किड्स कॉर्नर में चित्र देखो कहानी लिखो 89 में भेजी गई सराहनीय कहानियां दी जा रही हैं।
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Jul 29, 2026
Kids Stories, Young Writers,

प्रकृति की गोद में एक यादगार सैर

अंकित गुर्जर, 10 वर्ष
एक सुंदर जंगल में दो अच्छे दोस्त रहते थे एक लड़का और एक लड़की। दोनों को प्रकृति से बहुत प्यार था। एक दिन सुहाने मौसम में दोनों अपनी-अपनी साइकिल लेकर घूमने निकले। सुरक्षा के लिए उन्होंने हेलमेट पहन रखा था। उनके साथ टोकरी में बैठा उनका छोटा पालतू कुत्ता भी इस यात्रा का आनंद ले रहा था। रास्ते में चमकता सूरज, चहचहाते पक्षी, उड़ती तितलियं और रंग-बिरंगे फूल उनका स्वागत कर रहे थे। दोनों दोस्त बातें करते हुए, हंसते-मुस्कुराते साइकिल चलाते रहे। कभी वे रुककर खेलते और फिर आगे बढ़ जाते। प्रकृति के बीच बिताया यह दिन उनके लिए हमेशा यादगार बन गया।
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मेहनत का असली इनाम

अंकित मेनारिया, 13 वर्ष
एक छोटे से गांव में आरव नाम का लड़का रहता था। उसका सपना था कि वह एक दिन बड़ा क्रिकेट खिलाड़ी बने। लेकिन गांव में न अच्छा मैदान था और न ही कोई कोच। फिर भी वह हर सुबह सूर्योदय से पहले उठकर खेत के किनारे दौड़ लगाता और पेड़ की टहनी से बने बल्ले जैसी लकड़ी से अभ्यास करता। गांव के लोग उसका मजाक उड़ाते और कहते, "इससे कुछ नहीं होगा।" आरव ने किसी की बात पर ध्यान नहीं दिया। उसने लगातार मेहनत की। कुछ महीनों बाद शहर में क्रिकेट ट्रायल हुए। उसने भी भाग लिया और अपने शानदार खेल से चयनकर्ताओं को प्रभावित कर टीम में जगह बना ली। कुछ वर्षों बाद वही लड़का देश की टीम के लिए खेलने लगा। जब वह अपने गांव लौटा, तो जिन लोगों ने कभी उसका मजाक उड़ाया था, वही उसकी सफलता पर गर्व करने लगे।
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इंसानियत की सबसे बड़ी खुशी

अक्षत शर्मा, 12 वर्ष
रविवार की सुहानी सुबह थी। रोहन और उसकी बहन रिया हेलमेट पहनकर पार्क में साइकिल चलाने पहुंचे। घूमते समय उन्हें एक छोटा सफेद पिल्ला दिखाई दिया, जो डरा हुआ था। दोनों ने उसे प्यार से पानी पिलाया और खाना खिलाया। उन्होंने उसके मालिक की तलाश शुरू की। तभी माली अंकल ने बताया कि पास में रहने वाले एक बुजुर्ग व्यक्ति का पिल्ला सुबह से लापता है। दोनों बच्चे पिल्ले को लेकर उनके घर पहुंचे। अपने पालतू को सुरक्षित देखकर बुजुर्ग की आंखों में खुशी के आंसू आ गए। उन्होंने बच्चों का धन्यवाद किया और उनकी दयालुता की प्रशंसा की। घर लौटते समय दोनों को एहसास हुआ कि किसी की मदद करने से मिलने वाली खुशी सबसे बड़ी होती है।
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दोस्ती और दया का उपहार

शौर्य साहू, 7 वर्ष
एक दिन रवि और रीमा अपनी-अपनी साइकिल लेकर पार्क में घूमने निकले। दोनों ने हेलमेट पहन रखा था। तभी रीमा की नजर एक छोटे सफेद पिल्ले पर पड़ी। वह भूखा और डरा हुआ था। दोनों ने उसे प्यार से खाना और पानी दिया तथा अपनी साइकिल की टोकरी में बैठाकर उसके मालिक की तलाश करने लगे। कुछ देर बाद एक बुजुर्ग व्यक्ति वहां पहुंचे। उन्होंने बताया कि वह उनका पालतू पिल्ला है, जो गलती से घर से निकल गया था। अपने पिल्ले को सुरक्षित देखकर वे बहुत खुश हुए और दोनों बच्चों की ईमानदारी व दयालुता की प्रशंसा की। घर लौटते समय दोनों ने समझा कि दूसरों की मदद करना सबसे बड़ी खुशी है।
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अनोखा सफर

अर्पण डूडी, 12 वर्ष
रविवार की सुहानी सुबह थी। सूरज की किरणें पूरे पार्क को रोशन कर रही थीं। पक्षियों का मधुर संगीत और फूलों की खुशबू से वातावरण महक रहा था। आरव और अनन्या अपनी-अपनी साइकिल लेकर पार्क पहुंचे। अनन्या की साइकिल की टोकरी में उनका नन्हा पिल्ला 'चीकू' भी बैठा था। उनका लक्ष्य पार्क के पुराने बरगद के पेड़ तक पहुंचना था। रास्ते में वे हंसते-खेलते आगे बढ़ते रहे। चीकू भी पूरे रास्ते उनका साथ देता रहा। जब वे बरगद के पेड़ तक पहुंचे, तो उन्हें कोई खजाना नहीं मिला, लेकिन उससे भी अनमोल चीज मिली दोस्ती, साथ और खूबसूरत यादें।
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दोस्तों के साथ एक सुंदर दिन

रुद्राक्ष साहू, 7 वर्ष
रविवार की प्यारी सुबह थी। सूरज मुस्कुरा रहा था और चिड़ियं मधुर गीत गा रही थीं। मैं और मेरी दोस्त अपनी-अपनी साइकिल लेकर पार्क घूमने निकले। हमने हेलमेट पहन रखा था। मेरी दोस्त की साइकिल की टोकरी में उसका प्यारा पिल्ला 'जूजू' बैठा था। रास्ते में हमने फूल, तितलियां और हरे-भरे पेड़ देखे। जूजू को पानी पिलाया और उसके साथ खूब खेला। हमने पार्क में कहीं भी कूड़ा नहीं फैलाया और दूसरों को भी साफ-सफाई रखने की सलाह दी। शाम को घर लौटते समय मुझे महसूस हुआ कि दोस्तों और प्रकृति के साथ बिताया हर पल सबसे सुंदर होता है।
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प्रकृति के बीच खुशी की सैर

दिक्षांत सैनी, 4 वर्ष
रवि और रीमा अच्छे दोस्त थे। एक दिन दोनों अपनी-अपनी साइकिल लेकर पार्क घूमने गए। रवि लाल साइकिल चला रहा था, जबकि रीमा अपनी नीली साइकिल की टोकरी में अपने प्यारे कुत्ते को साथ लाई थी। रास्ते में रंग-बिरंगे फूल खिले थे, पेड़ों पर चिड़ियां चहचहा रही थीं और तितलियां उड़ रही थीं। दोनों बच्चों ने प्रकृति की सुंदरता का आनंद लिया और खुशी-खुशी सैर की। शाम होने से पहले वे मुस्कुराते हुए अपने घर लौट आए।
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हिम्मत की जीत

दिविशा सुराना, 8 वर्ष
पार्क में सुबह की धूप खिली थी। फूल महक रहे थे और सूरज मुस्कुरा रहा था। दूर से देखने पर लगता था कि रोहन और रीता बस साइकिल चलाने का आनंद ले रहे हैं, लेकिन सच कुछ और था। कुछ महीने पहले एक हादसे के बाद डॉक्टर ने कहा था कि रीता शायद दोबारा साइकिल नहीं चला पाएगी। उसके लिए संतुलन बनाना बहुत कठिन हो गया था। लेकिन रोहन ने हार नहीं मानी। उसने अपनी बहन का हौसला बढ़ाया। कई हफ्तों की मेहनत, गिरने और फिर उठने के बाद आज रीता पहली बार बिना सहारे के साइकिल चला रही थी। साइकिल की टोकरी में बैठा उनका पिल्ला 'बडी' और साथ रखे फूल उनकी खुशी के प्रतीक थे। रीता ने कहा, "जब मैं अच्छी तरह साइकिल चलाने लगूंगी, तब ये फूल पार्क में लगाऊंगी।" उस दिन रीता ने समझ लिया कि दृढ़ निश्चय और अपने लोगों का साथ हो, तो कोई भी मुश्किल जीती जा सकती है।
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मोती की सैर

प्रद्युम्न मेडतवाल, 7 वर्ष
एक दिन मैं और मेरी दोस्त रिया पार्क में साइकिल चलाने गए। मौसम बहुत सुहावना था। सूरज चमक रहा था और तितलियांं उड़ रही थीं। रिया की साइकिल की टोकरी में उसका प्यारा पिल्ला 'मोती' बैठा था। अचानक मोती एक तितली देखकर टोकरी से कूद गया। हम दोनों घबरा गए और उसके पीछे दौड़े। थोड़ी दूर जाकर मोती रुक गया। रिया ने उसे प्यार से गोद में उठा लिया और फिर सुरक्षित टोकरी में बैठा दिया। इसके बाद हमने आराम से साइकिल चलाई और खूब आनंद लिया। समय पर घर लौटते हुए हमें एहसास हुआ कि जानवर भी हमारे अच्छे दोस्त होते हैं।
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दयालु बच्चों की सीख

गुरलीन कौर, 11 वर्ष
एक दिन गुरलीन और खुशजोत साइकिल चलाते हुए जा रहे थे। तभी उन्हें नाले में एक छोटा-सा पिल्ला दिखाई दिया। दोनों ने मिलकर उसे सावधानी से बाहर निकाला। फिर हैंडपंप पर उसे साफ किया और गुरलीन ने उसे अपनी साइकिल की टोकरी में बैठाकर घर ले आई। घर पहुंचकर उन्होंने अपनी मम्मी को पूरी बात बताई। मम्मी ने दोनों बच्चों की दयालुता की प्रशंसा की और उन्हें शाबाशी दी। गुरलीन और खुशजोत बहुत खुश हुए। उन्हें समझ आया कि जरूरतमंद जीवों की मदद करना सबसे बड़ा अच्छा काम है।
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सच्ची दोस्ती और दया का फल

देव्यांश रॉय, 12 वर्ष
रविवार की सुहानी सुबह थी। पार्क में हरियाली, रंग-बिरंगे फूल और चहचहाते पक्षियों के बीच आरव और अनन्या अपनी-अपनी साइकिल लेकर घूमने निकले। दोनों ने सुरक्षा के लिए हेलमेट पहन रखा था। रास्ते में उन्हें एक छोटा-सा सफेद पिल्ला मिला। वह भूखा और डरा हुआ था। अनन्या ने उसे बिस्कुट खिलाए और आरव पानी लेकर आया। दोनों ने उसकी देखभाल की और उसे साइकिल की टोकरी में बैठाकर उसके मालिक को ढूंढ़ने लगे। कुछ देर बाद एक बुजुर्ग व्यक्ति वहां पहुंचे। उन्होंने बताया कि वह उनका पालतू पिल्ला है, जो सुबह रास्ता भटक गया था। अपने पिल्ले को सुरक्षित देखकर उनकी आंखों में खुशी के आंसू आ गए। दोनों बच्चों को समझ आया कि दूसरों की मदद करने से मिलने वाली खुशी सबसे बड़ी होती है।
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आनंद की साइकिल सैर

माहिका चौधरी, 8 वर्ष
एक दिन अथर्व और उसकी बहन अवनि साइकिल चलाने निकले। अवनि की साइकिल की टोकरी में उनका नटखट पिल्ला 'सूरी' भी बैठा था। दोनों ने हेलमेट पहन रखा था और चारों ओर तितलियां उड़ रही थीं। रास्ते भर सूरी हवा का आनंद लेता रहा। पार्क पहुंचकर तीनों ने हरी घास पर दौड़ लगाई और खूब खेल खेले। घर लौटते समय अवनि ने कहा, "सूरी के साथ साइकिल चलाने में कितना मजा आया!" अथर्व मुस्कुराकर बोला, "अपने प्रियजनों के साथ प्रकृति के बीच बिताया हर पल खास होता है।"
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अनोखा सफर और दोस्ती की सीख

अमायरा मेहता 'लोलो, 7 वर्ष
सुबह की पहली किरण के साथ आरव और उसकी बहन अनन्या अपनी-अपनी साइकिल लेकर पार्क जाने निकले। दोनों ने हेलमेट पहन रखा था और अनन्या की साइकिल की टोकरी में उनका प्यारा पिल्ला 'मोती' बैठा था। रास्ते में ठंडी हवा चल रही थी, तितलियां उड़ रही थीं और पक्षी मधुर स्वर में चहचहा रहे थे। तभी उन्हें एक नन्हा पक्षी जमीन पर गिरा हुआ दिखाई दिया। दोनों ने सावधानी से उसे उठाकर पेड़ की सुरक्षित डाली पर बैठा दिया। पक्षी की मां जैसे चहचहाकर उनका धन्यवाद कर रही थी। शाम तक वे खुशी-खुशी घर लौट आए। उस दिन उन्हें समझ आया कि सच्ची खुशी प्रकृति से प्रेम करने, सुरक्षा का ध्यान रखने और जरूरतमंदों की मदद करने में है।
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एक सुहानी सैर

जीवेश मीणा, 9 वर्ष
सूरज आसमान में चमक रहा था। पक्षी चहचहा रहे थे और रंग-बिरंगी तितलियां फूलों पर मंडरा रही थीं। ऐसे सुंदर दिन में आरव और सिया ने साइकिल से सैर करने का निश्चय किया। उनकी प्यारी पालतू कुतिया 'फ्लफी' भी साइकिल की आगे वाली टोकरी में आराम से बैठी थी। दोनों हरे-भरे रास्तों पर बातें करते हुए साइकिल चलाते रहे। कभी वे रेस लगाते, तो कभी रुककर फूलों को निहारते। शाम होने पर वे खुशी-खुशी घर लौट आए। यह दिन उनके लिए हमेशा यादगार बन गया।
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पार्क की प्यारी सैर

मिस्टी भार्गव, 9 वर्ष
रविवार की सुबह थी। आसमान साफ था और सूरज मुस्कुरा रहा था। पार्क में हरे-भरे पेड़, रंग-बिरंगे फूल और चहचहाते पक्षी वातावरण को सुंदर बना रहे थे। आरव और सिया हेलमेट पहनकर अपनी-अपनी साइकिल से पार्क पहुंचे। सिया की साइकिल की आगे वाली टोकरी में उनका प्यारा पिल्ला 'टफी' बैठा था। दोनों दोस्त हंसते-मुस्कुराते साइकिल चलाते रहे। ठंडी हवा, फूलों की खुशबू और प्रकृति की सुंदरता ने उनकी सैर को यादगार बना दिया। घर लौटते समय उन्होंने निश्चय किया कि वे हर रविवार साथ साइकिल चलाने आएंगे और हमेशा हेलमेट पहनकर सुरक्षित यात्रा करेंगे।
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सैर का आनंद

युविका जाट, 10 वर्ष
रविवार की सुबह मौसम बहुत सुहावना था। आसमान में हल्की धूप खिली हुई थी और चारों ओर हरियाली फैली हुई थी। एक सुंदर पार्क में एक लड़का और एक लड़की अपनी-अपनी साइकिल लेकर घूमने आए। उनके साथ उनका प्यारा-सा पिल्ला भी था। वह कभी फूलों के पास तो कभी बच्चों के पीछे दौड़ता, जिसे देखकर दोनों बच्चे बहुत खुश होते। पार्क में रंग-बिरंगे फूल खिले थे, पेड़ों पर हरी-भरी पत्तियां लहरा रही थीं और ठंडी हवा चल रही थी। दोनों बच्चे सावधानी से साइकिल चला रहे थे। कुछ देर बाद वे अपने पिल्ले के साथ खेलने लगे। तभी उन्होंने देखा कि कुछ लोग पार्क में कचरा फेंक रहे हैं। बच्चों ने उन्हें विनम्रता से समझाया कि हमें पार्क और पर्यावरण को हमेशा साफ रखना चाहिए। लोगों ने उनकी बात मान ली। शाम होने पर दोनों बच्चे अपने पिल्ले के साथ खुशी-खुशी घर लौट आए।
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अनोखी यात्रा और नन्हा दोस्त

अनिका पंसारी, 7 वर्ष
एक सुहानी सुबह आरव और अनन्या अपनी-अपनी साइकिल लेकर पार्क की सैर पर निकले। दोनों ने सुरक्षा के लिए हेलमेट पहन रखा था। चारों ओर पेड़, फूल और चहचहाते पक्षी वातावरण को सुंदर बना रहे थे। रास्ते में उन्हें झाड़ियों के पीछे से एक नन्हे सफेद पिल्ले के रोने की आवाज सुनाई दी। आरव ने साइकिल रोकी और देखा कि वह भूखा और डरा हुआ था। अनन्या ने प्यार से उसे अपनी साइकिल की टोकरी में बैठाया। पिल्ला सुरक्षित महसूस करने लगा और खुशी से अपनी पूंछ हिलाने लगा। दोनों बच्चों ने निश्चय किया कि वे उसकी अच्छी तरह देखभाल करेंगे। उनकी दयालुता देखकर मानो सूरज भी मुस्कुरा रहा था।
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गार्डन के नए दोस्त

अनामिका, 9 वर्ष
एक दिन दो बच्चे एक सुंदर गार्डन में खेलने आए। खेलते-खेलते दोनों की दोस्ती हो गई। उन्होंने मिलकर कई खेल खेले और खूब आनंद लिया। कुछ देर बाद लड़के की नजर लड़की के प्यारे पिल्ले पर पड़ी। उसने पूछा, "तुम इसे साथ क्यों लाई हो?" लड़की मुस्कुराकर बोली, "यह मेरा सबसे प्यारा दोस्त है, इसलिए इसे भी साथ लाई हूं।" तभी ठंडी हवा चलने लगी। फूल और पौधे लहराने लगे। दोनों बच्चों ने रंग-बिरंगी तितलियों को उड़ते देखा और उनके पीछे खुशी-खुशी दौड़ पड़े। पेड़ों पर चहचहाती चिड़ियों की आवाज ने उनकी खुशी और बढ़ा दी।
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धूप, साइकिल और एक वादा

एंजल शर्मा, 9 वर्ष
गर्मियों की छुट्टियों की एक रविवार सुबह आरव और उसकी दोस्त सिया पार्क में साइकिल चलाने निकले। दोनों ने हेलमेट पहन रखा था। सिया की साइकिल की टोकरी में उसका प्यारा पिल्ला 'टॉमी' बैठा था। पार्क में घूमते समय उन्हें एक छोटा बच्चा रोता हुआ मिला। उसका गुब्बारा पेड़ की ऊंची डाल पर फंस गया था। आरव ने एक लंबी टहनी की मदद से गुब्बारा नीचे उतार दिया। बच्चा खुशी-खुशी उन्हें धन्यवाद देकर चला गया। सिया मुस्कुराकर बोली, "सबसे अच्छी दौड़ वही होती है, जिसमें खुशियां बांटी जाएं।" घर लौटते समय दोनों ने वादा किया कि वे हर रविवार किसी न किसी की मदद जरूर करेंगे।
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खुशी की साइकिल यात्रा

माहिर कुमावत, 12 वर्ष
रविवार की सुबह मौसम बहुत सुहावना था। चारों ओर हरियाली थी। पेड़ों पर पक्षी चहचहा रहे थे और तितलियां फूलों पर मंडरा रही थीं। आर्यन और सिया हेलमेट पहनकर अपनी-अपनी साइकिल से पार्क पहुंचे। सिया की साइकिल की टोकरी में उसका प्यारा पिल्ला 'मोती' बैठा था। सैर के दौरान उन्होंने देखा कि कुछ लोग पार्क में कचरा फैला रहे हैं। दोनों ने उन्हें विनम्रता से समझाया कि पार्क को साफ रखना हम सभी की जिम्मेदारी है। लोगों ने उनकी बात मानकर कचरा कूड़ेदान में डाल दिया। इसके बाद दोनों ने पक्षियों के लिए पानी रखा और पेड़ों की देखभाल की। शाम को वे खुशी-खुशी घर लौटे।
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साहस की साइकिल यात्रा

केशव जांगिड़, 11 वर्ष
एक सुंदर सुबह आरव और अन्वी हेलमेट पहनकर साइकिल से पार्क की सैर पर निकले। अन्वी की साइकिल की टोकरी में उसका प्यारा पिल्ला 'मोती' भी बैठा था।रास्ते में उन्हें एक तोता पतंग की डोर में उलझा हुआ मिला। दोनों ने सावधानी से उसकी मदद की और उसे आजाद कर दिया। आगे चलकर उन्हें एक बुजुर्ग दादाजी मिले, जिनकी साइकिल का टायर पंचर हो गया था। दोनों बच्चों ने उनकी साइकिल पास की दुकान तक पहंचाने में मदद की।शाम को घर लौटते समय उन्हें एहसास हुआ कि सच्चा रोमांच दूसरों की मदद करने में है।
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यादगार रविवार

जागृति यादव,7 वर्ष
रविवार की सुबह आसमान में चमकता सूरज मुस्कुरा रहा था। आरव और उसकी छोटी बहन अनाया अपनी नई साइकिलें लेकर पार्क पहुंचे। दोनों ने सुरक्षा के लिए हेलमेट पहन रखा था। अनाया की साइकिल की टोकरी में उनका प्यारा पिल्ला 'टॉमी' बैठा था। वह खुशी से इधर-उधर देख रहा था। दोनों भाई-बहन हरे-भरे पार्क में साइकिल चलाते हुए प्रकृति का आनंद लेते रहे। उन्होंने तय किया कि हर रविवार साथ साइकिल चलाने आएंगे। उन्हें समझ आया कि सुरक्षा, प्रकृति से प्रेम और परिवार का साथ जीवन की सबसे बड़ी खुशियां हैं।
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मेरी सुंदर साइकिल सैर

अंकित,8 वर्ष
एक सुबह मैं जल्दी उठा तो बाहर सुनहरी धूप खिली हुई थी। चिड़ियां चहचहा रही थीं और मौसम बहुत सुहावना था। मैंने अपनी बहन तन्नू से कहा कि चलो साइकिल चलाने चलते हैं। मम्मी ने हमें पहले हेलमेट पहनने की सलाह दी। हमने हेलमेट पहने और अपनी-अपनी साइकिल लेकर पार्क पहुंच गए। मेरी बहन की साइकिल की टोकरी में हमारा प्यारा पिल्ला भी बैठा था। पार्क में हरी घास, रंग-बिरंगे फूल और ठंडी हवा ने हमारा मन खुश कर दिया। हम दोनों खूब हंसे, साइकिल चलाई और प्रकृति का आनंद लिया। उस दिन की सैर मेरे लिए हमेशा यादगार बन गई।

Updated on:
29 Jul 2026 05:44 pm
Published on:
29 Jul 2026 05:44 pm