कोरोना वायरस महामारी के कारण लॉकडाउन की सबसे बड़ी मार प्रवासी मजदूरों पर पड़ी है।
लखनऊ. उत्तर प्रदेश में कोरोना वायरस महामारी के कारण लॉकडाउन की सबसे बड़ी मार प्रवासी मजदूरों पर पड़ी है। सबसे बड़े राज्य उत्तर प्रदेश में इस वक्त मजदूरों को बसों से घर पहुंचाने के लिए राजनीति अपने चरम पर जारी है। लॉकडाउन के दौरान प्रदेश में पहुंचाने वाली श्रमिक ट्रेनों का आंकड़ा 1000 के पार हो गया है, जिनमें अबतक 16 लाख से अधिक मजदूरों को वापस यूपी लाया जा चुका है। केंद्र सरकार की ओर से राज्यों की सिफारिश पर देशभर में श्रमिक ट्रेन चलाई जा रही हैं, जिनमें मजदूरों को अपने राज्य में वापस लाया जा रहा है। देश के अलग-अलग हिस्सों से अबतक यूपी के अलग-अलग शहरों में 1000 से अधिक ट्रेनें पहुंच चुकी हैं, जिनमें अबतक 16 लाख से अधिक प्रवासी मजदूर अपने घर पहुंच चुके हैं।
उत्तर प्रदेश देश का ऐसा राज्य है, जहां सबसे अधिक श्रमिक ट्रेनें पहुंची हैं। बांकी राज्यों की अपेक्षा यूपी की जनसंख्या भी देशभर में सबसे अधिक है। इसके अलावा प्रदेश में अन्य साधनों से भी करीब 6 लाख प्रवासी मजदूर यूपी पहुंच चुके हैं। बता दें कि उत्तर प्रदेश की योगी सरकार प्रदेश वापस लौट रहे हर प्रवासी श्रमिक को 1000 रुपए की आर्थिक मदद दे रही है, जो भरण-पोषण भत्ता के रूप में दिया जा रहा है।
उत्तर प्रदेश में श्रमिक ट्रेनों के अलावा 27 हजार बसों को भी श्रमिकों के लिए लगाया गया है, जिनके जरिए उन्हें स्टेशन से क्वारनटीन सेंटर या गांव पहुंचाया जा रहा है। राज्य में 12 हजार बसों से 6 लाख प्रवासी श्रमिकों को लाया गया है, इसके अलावा हर जिले को दो सौ अतिरिक्त बसें दी गई हैं। ताकि सभी मजदूरों को उनके गांव वापस भेजा जा सके। इसके साथ ही कांग्रेस पार्टी की ओर से श्रमिकों के लिए 1000 बसें देने का प्रस्ताव दिया गया, जिसे लंबे विवाद के बाद यूपी सरकार ने स्वीकारा लेकिन आरोप लगाया कि इसमें सिर्फ बस नहीं बल्कि एंबुलेंस, बाइक समेत अन्य वाहन का भी नंबर है। हालांकि, अभी तक इन बसों का इस्तेमाल मजदूरों को ले जाने के लिए नहीं किया गया है और कांग्रेस लगातार यूपी सरकार पर राजनीति का आरोप लगाती चली आ रही है।