
लखनऊ में कृषि नीति पर बड़ा मंथन: क्षेत्रीय जरूरतों के आधार पर तय होगी खेती की नई दिशा -शिवराज सिंह चौहान (फोटो सोर्स : भाषा WhatsApp News Group)
Shivraj Singh Chouhan Agri Policy: राजधानी लखनऊ में आयोजित उत्तर क्षेत्रीय कृषि सम्मेलन के दौरान केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण व ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कृषि क्षेत्र में बड़े बदलाव के संकेत दिए। प्रेस कॉन्फ्रेंस में उन्होंने स्पष्ट किया कि अब देश में खेती की रणनीति “एक देश, एक नीति” के बजाय क्षेत्रीय परिस्थितियों-जलवायु, जल उपलब्धता और फसल पैटर्न के आधार पर तैयार की जाएगी। उन्होंने कहा कि केंद्र और राज्य सरकारें मिलकर खेती को अधिक लाभकारी, टिकाऊ और किसानोन्मुख बनाने के लिए एक ठोस और व्यावहारिक रोडमैप तैयार कर रही हैं।
लखनऊ में आयोजित यह उत्तर क्षेत्रीय कृषि सम्मेलन देशभर में प्रस्तावित पांच क्षेत्रीय सम्मेलनों की श्रृंखला का दूसरा चरण है। सरकार का मानना है कि भारत जैसे विशाल और विविधतापूर्ण देश में एक समान कृषि नीति प्रभावी नहीं हो सकती। मंत्री ने कहा कि देश के अलग-अलग हिस्सों में मिट्टी, मौसम, पानी और फसलें अलग-अलग हैं। ऐसे में क्षेत्रवार रणनीति बनाकर ही किसानों को वास्तविक लाभ पहुंचाया जा सकता है।
केंद्रीय मंत्री ने कृषि नीति के तीन प्रमुख उद्देश्यों को रेखांकित किया। देश की खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करना। किसानों की आय और आजीविका में सुधार। आम जनता को पोषणयुक्त खाद्यान्न उपलब्ध कराना। उन्होंने बताया कि भारत ने गेहूं और चावल उत्पादन में उल्लेखनीय उपलब्धियां हासिल की हैं। चावल उत्पादन में देश वैश्विक स्तर पर अग्रणी स्थिति में है और गेहूं उत्पादन में वृद्धि के चलते 50 लाख मीट्रिक टन निर्यात की अनुमति दी गई है।
हालांकि खाद्यान्न उत्पादन में सफलता के बावजूद मंत्री ने स्पष्ट किया कि दलहन और तिलहन में आत्मनिर्भरता अभी भी एक बड़ी चुनौती है। उन्होंने कहा कि आयात पर निर्भरता कम करने के लिए इन फसलों के उत्पादन को बढ़ाना जरूरी है। इसके लिए विशेष मिशन चलाए जा रहे हैं और राज्यों के साथ मिलकर रणनीति बनाई जा रही है।
शिवराज चौहान ने कहा कि केवल गेहूं और धान पर आधारित खेती भविष्य के लिए पर्याप्त नहीं है। उन्होंने कृषि विविधीकरण पर जोर देते हुए कहा कि किसानों को फल-सब्जी, बागवानी, प्रसंस्करण और वैल्यू एडिशन की ओर बढ़ना होगा। इससे न केवल आय बढ़ेगी बल्कि बाजार में प्रतिस्पर्धा भी मजबूत होगी।
उत्तर प्रदेश जैसे राज्यों में छोटे और सीमांत किसानों की बड़ी संख्या को देखते हुए मंत्री ने इंटीग्रेटेड फार्मिंग मॉडल को बेहद उपयोगी बताया। उन्होंने सुझाव दिए,इंटरक्रॉपिंग (मिश्रित खेती),पशुपालन,मछली पालन,मधुमक्खी पालन,वृक्ष आधारित खेती,इन मॉडलों से कम जमीन पर अधिक आय प्राप्त की जा सकती है।
किसान क्रेडिट कार्ड (KCC) को लेकर मंत्री ने कहा कि अभी भी कई किसानों तक सस्ते ऋण की पहुंच नहीं है। उन्होंने कहा कि अभियान चलाकर हर पात्र किसान को KCC से जोड़ा जाएगा, ताकि वह समय पर बेहतर बीज, उर्वरक और उपकरण खरीद सके।
फार्मर आईडी को उन्होंने कृषि क्षेत्र में क्रांतिकारी कदम बताया। इसके तहत किसान की जमीन, खसरा नंबर और पशुधन की जानकारी एक प्लेटफॉर्म पर होगी। योजनाओं का लाभ लेने में आसानी होगी। पारदर्शिता और गति बढ़ेगी। उन्होंने बताया कि करोड़ों किसानों की फार्मर आईडी बनाई जा चुकी है और इसे तेजी से पूरा करने का लक्ष्य है।
मंत्री ने “लैब टू लैंड” अवधारणा पर जोर देते हुए कहा कि वैज्ञानिक शोध का लाभ तभी मिलेगा जब वह खेत तक पहुंचे। इसके लिए विकसित कृषि संकल्प अभियान चलाया जाएगा, जिसमें वैज्ञानिक और अधिकारी गांव-गांव जाकर किसानों से संवाद करेंगे और उन्हें नई तकनीकों की जानकारी देंगे।
उत्तर प्रदेश के आलू किसानों को राहत देते हुए मंत्री ने बताया कि एमआईएस योजना के तहत 20 लाख मीट्रिक टन आलू खरीदने की अनुमति दी गई है। साथ ही, राज्य में एक इंटरनेशनल प्रोसेसिंग सेंटर स्थापित करने की योजना है, जिससे किसानों को बेहतर मूल्य और रोजगार के अवसर मिलेंगे।
उर्वरक कीमतों को लेकर मंत्री ने बड़ा ऐलान किया। उन्होंने बताया कि नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में 41,000 करोड़ रुपये की अतिरिक्त सब्सिडी मंजूर की गई है।इससे किसानों को यूरिया 266 रुपये प्रति बोरी, डीएपी 1,350 रुपये प्रति बोरी की दर से मिलता रहेगा, भले ही अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमतें बढ़ रही हों।
मंत्री ने नकली बीज और कीटनाशकों को गंभीर समस्या बताते हुए कहा कि इसके खिलाफ सख्त कानून लाए जाएंगे। उन्होंने कहा कि मौजूदा कानून पर्याप्त कठोर नहीं हैं, इसलिए सीड एक्ट और पेस्टिसाइड एक्ट में बदलाव की तैयारी की जा रही है।
रासायनिक उर्वरकों के दुष्प्रभाव को देखते हुए सरकार प्राकृतिक खेती को बढ़ावा दे रही है। उन्होंने बताया कि प्राकृतिक खेती अपनाने वाले किसानों को शुरुआती समय में आर्थिक सहायता दी जाएगी, ताकि वे इस बदलाव को आसानी से अपना सकें।
बागवानी क्षेत्र को मजबूत करने के लिए देशभर में 9 क्लीन प्लांट सेंटर स्थापित किए जा रहे हैं। इनका उद्देश्य किसानों को रोगमुक्त और उच्च गुणवत्ता वाले पौधे उपलब्ध कराना है, जिससे उत्पादन और आय दोनों में वृद्धि हो सके।
मंत्री ने कहा कि कृषि उत्पादों के प्रसंस्करण और निर्यात को बढ़ावा देने के लिए अलग-अलग रणनीतियां तैयार की जा रही हैं। उत्तर भारत के फल, सब्जियां और अन्य उत्पादों को वैश्विक बाजार तक पहुंचाने के लिए समन्वित प्रयास किए जाएंगे।
लखनऊ में आयोजित यह सम्मेलन न केवल नीतिगत बल्कि व्यावहारिक दृष्टि से भी बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इससे निकलने वाले सुझाव आने वाले खरीफ और रबी सीजन की दिशा तय करेंगे और किसानों की आय, उत्पादन, पोषण सुरक्षा और टिकाऊ खेती के लिए मजबूत आधार तैयार करेंगे। केंद्र सरकार का यह प्रयास साफ संकेत देता है कि आने वाले समय में भारतीय कृषि अधिक वैज्ञानिक, विविधतापूर्ण और किसान-केंद्रित बनने की दिशा में आगे बढ़ रही है।
Published on:
24 Apr 2026 11:42 pm
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