69000 शिक्षक भर्ती मामले में सुप्रीम कोर्ट ने कहा- शिक्षा मित्रों को न छेड़ा जाए...
लखनऊ. 69000 शिक्षक भर्ती मामले में नया मोड़ आ गया है। शिक्षामित्रों की याचिका खारिज कर सुप्रीम कोर्ट के दो जजों ने आदेश में संशोधन की इच्छा जताई और मामले को ओपन कोर्ट में सुनने का आदेश दिया। इसका याचिकाकर्ताओं ने विरोध किया। इसके बाद मामले की सुनवाई हुई और कोर्ट ने सभी पक्षों से जवाब मांगा। मामले की अगली सुनवाई अब 14 जुलाई को होगी। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि राज्य सरकार 6 जुलाई से पहले अपना पक्ष भेजे। सुप्रीम कोर्ट ने पूछा कि सरकार बताए 45 फीसद सामान्य और आरक्षित के लिए 40 फीसदी के आधार को क्यों बदला। 6 जुलाई तक कोर्ट चार्ट के जरिए भर्ती के सारे चरण और डिटेल बताए। तब तक शिक्षामित्र, जो सहायक शिक्षक के तौर पर कार्यरत हैं, उनको छेड़ा न जाए। शीर्ष अदालत ने कहा कि फिलहाल हम भर्ती प्रक्रिया पर रोक नहीं लगाएंगे। सरकार भर्ती प्रक्रिया जारी रखे, लेकिन यह याचिकाओं के अंतिम निपटारे पर निर्भर करेगी।
सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा?
दरअसल इस मामले में एक याचिकाकर्ता की ओर से सबसे पहले वरिष्ठ मुकुल रोहतगी ने दलील रखी। उनकी दलील को सुनने के बाद कोर्ट ने याचिका को खारिज कर दिया था। फिर कोर्ट ने दुष्यंत दवे और अर्यमा सुंदरम की दलील पर याचिका को खारिज के आदेश में संशोघधन करने की इच्छा जताई। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि इस मामले में इतने पक्षकार हैं कि उन सबको वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए सुनना मुश्किल है। लिहाजा सभी मामलों की सुनवाई तब तक लंबित रहेगी। मामले की सुनवाई ओपन कोर्ट में होगी। तब तक कोई अंतरिम आदेश नहीं जारी किया जाएगा।
सरकार ने क्यों बदला भारांक
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि सरकार बताए कि बताए कि सामान्य श्रेणी के लिए भारांक 45 फीसदी और आरक्षित के लिए 40 फीसदी के आधार को क्यों बदला। शिक्षा मित्र जो सहायक शिक्षक के तौर पर कार्यरत हैं उनको छेड़ा न जाए। 6 जुलाई तक सरकार चार्ट के जरिए भर्ती के चरण और उनकी विवरण बताए। शिक्षा मित्रों ने आरोप लगाया है कि सरकार उनकी जगह बीएड वालों को भर्ती कर रही है। जबकि अदालत ने उन्हें रियायती अंकों के आधार पर भर्ती करने का आदेश दिया था।