Recognition of Madrasas:राज्य में 97 मदरसों को मान्यता मिल गई है। इसके साथ ही उनका रिन्यूवल भी कर दिया गया है। राज्य में पांच साल बाद मदरसों की मान्यता और नवीनीकरण हुआ है। संचालकों ने मदरसा बोर्ड का आभार जताया है।
Recognition of Madrasas:राज्य में पांच साल बाद 97 मदरसों को मान्यता मिली है। दरअसल, उत्तराखंड में पिछले पांच साल से किसी भी नए मदरसे को मान्यता नहीं मिली थी। इस बार सरकार ने एक साथ 97 मदरसों को मान्यता देते हुए नवीनीकरण कराया है।शनिवार को देहरादून में मदरसा बोर्ड की ओर से भगत सिंह कॉलोनी स्थित कार्यालय के कांफ्रेंस हॉल में कार्यक्रम आयोजित कर संचालकों को प्रमाण पत्र बांटे। इनमें देहरादून, हरिद्वार, नैनीताल, यूएसनगर के अधिकांश मदरसे शामिल हैं। इसी के साथ ही अब राज्य में मदरसों की संख्या 466 पहुंच गई है। उन्होंने इसके लिए मदरसा बोर्ड का आभार व्यक्त किया है। मदरसा बोर्ड के अध्यक्ष मुफ्ती शमून कासमी ने कहा कि मदरसों में एनसीईआरटी का पाठ्यक्रम लागू कर दिया गया है। डिग्रियों को समकक्षता का मामला जल्द हल हो जाएगा। उन्होंने कहा कि सरकार मदरसा छात्रों को मुख्यधारा में लाना चाहती है। एनसीईआरटी पाठ्यक्रम के अलावा भी कार्यक्रम मदरसों में संचालित किए जाएंगे। बता दें कि राज्य के मदरसों में संस्कृत शिक्षा की पहल भी शुरू हो रही है। मदरसों को मान्यता मिलने से मुस्लिम समाज में खुशी का माहौल है।
उत्तराखंड के विभिन्न जिलों में अवैध मदरसों के खिलाफ प्रशासन का व्यापक अभियान चला था। कई अवैध मदरसे सील भी किए गए थे। इसे लेकर मुस्लिम समाज में आक्रोश पनप रहा था। बीते दिनों इसे लेकर देहरादून में खूब हंगामा हुआ था। कई लोगों को हिरासत में भी लिया गया था। इधर, अब मान्यता मिलने से बीते दिनों सील किए गए कई मदरसों को भी राहत मिलेगी। बोर्ड अध्यक्ष और डिप्टी रजिस्ट्रार उबेदुल्लाह अंसारी ने प्रमाण पत्र बांटे। इस दौरान हारुन रसीद, फराह अजीम, खुर्शीद अहमद, विजय, रमीज समेत बड़ी संख्या में मदरसा संचालक आदि मौजूद रहे।