
Former MLA Vijay Mishra Case Update: उत्तर प्रदेशपुलिस ने पहली बार राज्य की सीमा से बाहर गैंगस्टर्स एक्ट के तहत बड़ी कार्रवाई करते हुए महाराष्ट्र में स्थित करीब 100 करोड़ रुपये की एक दाल मिल (एग्रो इंडस्ट्री) को कुर्क किया है। पुलिस का आरोप है कि यह संपत्ति जेल में बंद पूर्व विधायक विजय मिश्रा के कथित आपराधिक नेटवर्क से अर्जित अवैध कमाई से बनाई गई थी। इस कार्रवाई के साथ ही विजय मिश्रा और उनके कथित गिरोह से जुड़ी अब तक कुर्क की गई संपत्तियों का कुल मूल्य लगभग 241.5 करोड़ रुपये तक पहुंच गया है।
पुलिस के अनुसार, कुर्क की गई संपत्ति महाराष्ट्र के धाराशिव जिले के जाकेकुर गांव में स्थित 'लल्ली एग्रो इंडस्ट्रीज' है। यह इकाई पिछले करीब 15 सालों से संचालित हो रही है। पुलिस का दावा है कि इसकी कीमत लगभग 100.25 करोड़ रुपये है और इसे विजय मिश्रा के दामाद मुकेश तिवारी द्वारा स्थापित किया गया था।
पुलिस का आरोप है कि इस एग्रो इंडस्ट्री का निर्माण विजय मिश्रा, उनकी पत्नी राम लली, बेटे विष्णु और उनके कथित गिरोह के अन्य सदस्यों की अवैध कमाई से किया गया था। कार्रवाई से पहले सभी आवश्यक कानूनी मंजूरियां ली गईं और महाराष्ट्र प्रशासन के साथ समन्वय स्थापित किया गया। भदोही पुलिस ने स्थानीय जिला प्रशासन की अनुमति मिलने के बाद कुर्की का आदेश लागू किया।
बता दें कि भदोही की ज्ञानपुर विधानसभा सीट से 4 बार विधायक रहे विजय मिश्रा वर्ष 2020 से आगरा केंद्रीय कारागार में बंद हैं। उनके खिलाफ कई मामलों में मुकदमे चल रहे हैं। इनमें साल 2010 में उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh) के मंत्री नंद गोपाल गुप्ता 'नंदी' पर हुए बम हमले का मामला भी शामिल है, जिसमें द इंडियन एक्सप्रेस के वरिष्ठ पत्रकार विजय प्रताप सिंह की मौत हो गई थी।
भदोही के पुलिस अधीक्षक अभिनव त्यागी ने कहा कि यह कार्रवाई संगठित अपराध से अर्जित कथित संपत्तियों को ध्वस्त करने की मुहिम का हिस्सा है। पुलिस के मुताबिक, साल 2022 से 2025 के बीच गैंगस्टर्स एक्ट के तहत विजय मिश्रा से जुड़े मामलों में अब तक 241.29 करोड़ रुपये से ज्यादा की संपत्तियां कुर्क की जा चुकी हैं।
विजय मिश्रा ने भदोही की ज्ञानपुर विधानसभा सीट से 4 बार जीत दर्ज की थी। उन्होंने 2002, 2007 और 2012 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव समाजवादी पार्टी के टिकट पर जीते थे, जबकि 2017 का चुनाव उन्होंने निषाद पार्टी के टिकट पर जीता था। पूर्व विधायक विजय मिश्रा का नाम लंबे समय से राजनीति और आपराधिक मामलों दोनों को लेकर चर्चा में रहा है। आरोप है कि राजनीति में सक्रिय होने से पहले भी उनका नाम कई आपराधिक घटनाओं से जुड़ता रहा। बाद के सालों में भी विभिन्न मामलों में उनके खिलाफ कई मुकदमे दर्ज हुए, जिसके चलते वे लगातार सुर्खियों में बने रहे।
विजय मिश्रा ने अपने राजनीतिक करियर की शुरुआत करीब 36 साल पहले की थी। उन्होंने कांग्रेस से जुड़कर साल 1990 में भदोही के ब्लॉक प्रमुख का पद संभाला। यहीं से उनके राजनीतिक सफर की शुरुआत हुई और धीरे-धीरे उन्होंने क्षेत्रीय राजनीति में अपनी मजबूत पहचान बनाई।
ब्लॉक प्रमुख बनने के बाद विजय मिश्रा ने ज्ञानपुर, भदोही और मिर्जापुर क्षेत्र में जिला प्रमुख के चुनाव भी जीते। लगातार चुनावी सफलताओं के चलते पूर्वांचल की राजनीति में उनकी मजबूत पकड़ मानी जाने लगी।
साल 2022 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में निषाद पार्टी ने विजय मिश्रा को टिकट नहीं दिया। इसके बाद उन्होंने प्रगतिशील मानव समाज पार्टी के टिकट पर चुनाव मैदान में उतरने का फैसला किया। हालांकि, इस चुनाव में उन्हें सफलता नहीं मिली और वे तीसरे स्थान पर रहे।
पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार, विजय मिश्रा के खिलाफ वर्षों में कुल 87 आपराधिक मामले दर्ज किए गए हैं। इनमें से सात मामलों में उन्हें दोषी ठहराया जा चुका है, जबकि कई अन्य मामले अभी अदालतों में लंबित हैं।
इस साल मई में भदोही की एक अदालत ने रिश्तेदार की संपत्ति पर अवैध कब्जा करने के मामले में विजय मिश्रा को 10 साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई थी। इसी मामले में उनकी पत्नी एवं पूर्व MLC राम लली और बेटे विष्णु को भी 10-10 साल की सजा मिली थी। वहीं उनकी बहू रूपा मिश्रा को 4 साल की सजा सुनाई गई थी। रूपा मिश्रा को बाद में जमानत मिल गई, जबकि अन्य दोषी अब भी जेल में हैं।