कोरोनावायरस के प्रकोप के चलते उत्तर प्रदेश के सभी कोर्ट भी बंद पड़े हैं। मुवक्किलों की आवाजाही पर रोक लगा दी गयी है।
लखनऊ.कोरोनावायरस के प्रकोप के चलते उत्तर प्रदेश के सभी कोर्ट भी बंद पड़े हैं। मुवक्किलों की आवाजाही पर रोक लगा दी गयी है। इलाहाबाद हाईकोर्ट अगले 28 मार्च तक के लिए बंद कर दिया गया है। इस दौरान केवल अत्यावश्यक मामले ही सुने जाएंगे। इसकी व्यवस्था की गई है । इससे पहले हाई कोर्ट ने 23 मार्च से लेकर 25 मार्च तक अवकाश घोषित किया था और अब जिसे बढ़ाते हुए 28 मार्च कर दिया गया है। इलाहाबाद हाईकोर्ट की कमेटी ने प्रदेश की जिला अदालतों को भी 28 मार्च तक के लिए बंद करने का आदेश दिया है। सभी जिला जजों को निर्देश दिया गया है कि कि वह सिर्फ अति आवश्यक मुकदमे की सुनवाई हेतु व्यवस्था करें, इनमें जमानत प्रार्थना पत्र जैसे आवश्यक मामले भी शामिल है। इसके चलते प्रदेश के कई अधिवक्ताओं वकीलों को आर्थिक परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। लेकिन अगर बार काउंसिल ऑफ इंडिया की अपील का असर हुआ को सभी वकीलों की इस समस्या का निदान हो सकता है। उन्हें 20-20 हजार रुपए मिल सकते हैं। वर्तमान में यूपी में कुल 288,297 वकीलें हैं।
बार काउंसिल ऑफ इंडिया ने देश के प्रधानमंत्री व सभी राज्यों के मुख्यमंत्रियों को पत्र लिख अपील की है जरूरतमंद वकीलों की कम से कम बीस-बीस हजार रुपये की आर्थिक सहायता की जाए। पत्र में कोरोना के चलते न्यायालयों में कार्य पूरी तरह से ठप होने की बात कही है। इसमें बताया गया है कि ज्यादातर वकील आर्थिक संकट से गुजर रहे हैं, मकान किराया, खाने-पीने का सामान दवाइयाँ व इलाज, परिवार का अन्य आवश्यक व जायज खर्च वहन करने की स्थिति में बहुतेरे वकील नहीं है। राज्य बार काउंसिल से भी इस सिलसिले में आग्रह किया गया है कि जिला प्रशासन के माध्यम से हरेक जरूरतमंद वकील को कम से कम बीस हजार रुपये की राशि मुहैया करायी जाये। देखना है कि क्या प्रदेश सरकार या राज्य बार काउंसिल इस पर कोई निर्णय लेता है।