नोटबंदी के दौरान सोशल मीडिया पर भी तमाम तरह की अफवाह फैली थी। कोई नई नोटों में चिप लगी होने की बात कर रहा था तो किसी का कहना था कि अगर जमीन के नीचे पैसों को गाड़ दिया जाएगा तो सेटेलाइट की मदद से सरकार नोटों को जमीन से ढूंढ निकालेगी।
लखनऊ. नोटबंदी के दौरान उत्तर प्रदेश में हुई एक घटना की चर्चा आज भी खूब होती है। नोटबंदी के दौरान बैंक में नोटों को बदलवाने के लिए लाइन में लगी है गरीब परिवार की बहूं ने बैंक के सामने एक बच्चे को जन्म दिया। इस घटना की जानकारी समाजवादी पार्टी सुप्रीमो अखिलेश यादव को मिली जिसके बाद अखिलेश यादव ने गरीब परिवार की मां की हर संभव मदद की और केंद्र सरकार पर तंज कसते हुए बैंक के बाहर जनमें नवजात का नाम खजांची रखा। अब अखिलेश यादव हर वर्ष खजांची का जन्मदिन मनाते हैं। खजांची अब 5 साल का हो गया है और यह उत्तर प्रदेश में काफी फेमस भी है। हर साल खजांची अपनी मां के साथ अखिलेश यादव से मिलने समाजवादी पार्टी कार्यालय पहुंचता है और अखिलेश यादव धूमधाम से खजांची का जन्मदिन मनाते हैं।
पांच साल पहले हुई थी नोटबंदी
आज से ठीक 5 साल पहले केंद्र सरकार ने नोटबंदी का ऐलान किया था। नोटबंदी के ऐलान के दौरान तमाम दावे किए गए थे कि नोटबंदी से अर्थव्यवस्था बेहतर होगी, भ्रष्टाचार पर लगाम लगेगी, नकली नोट के कारोबार को खत्म कर दिया जाएगा लेकिन केंद्र सरकार अब तक अपने दावों को पूर्ण होने का कोई पुख्ता प्रमाण नहीं दे पाई है। नोटबंदी के दौरान समाज में तमाम तरह की अव्यवस्था देखने को मिली थी बैंकों के बाहर लाइन में लगे हुए लोगों की जान तक चली गई थी। 5 साल बाद भी नोटबंदी का कोई बड़ा प्रभाव भारतीय अर्थव्यवस्था पर देखने को नहीं मिल रहा।
फैली थीं अफवाह
नोटबंदी के दौरान सोशल मीडिया पर भी तमाम तरह की अफवाह फैली थी। कोई नई नोटों में चिप लगी होने की बात कर रहा था तो किसी का कहना था कि अगर जमीन के नीचे पैसों को गाड़ दिया जाएगा तो सेटेलाइट की मदद से सरकार नोटों को जमीन से ढूंढ निकालेगी।
क्या हुआ पुरानी नोटों का
500 व 1000 के नोट बंदी करने के बाद पुरानी नोटों को चलन से बाहर कर दिया गया और इन नोटों को आरबीआई ने जमाकर लिया। ऐसे में सभी के दिमाग में यह बात आती है कि आखिर उन पुराने नोटों का किया क्या गया। आपको बता दें इन पुरानी नोटों को दोबारा से चलन में नहीं लाया जा सकता लिहाजा इन नोटों को काटकर खपा दिय गया है। आरबीआई ने कटी हुई नोटों से कुछ साज सज्जा के सामान बनाने योजना शुरू की गई थी जिसके तहत नोटों से सजावट के सामान बनाए जा रहे हैं।