
Akhilesh Yadav AI Video CM Yogi Controversy:उत्तर प्रदेश में अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव से पहले प्रदेश की राजनीति में हलचल तेज हो गई है। राजनीति बयानबाजी के बीच अब पोस्टर और वीडियो के जरिए एक दूसरे पर आरोप लगा रहे है। इसी कड़ी में समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का एआई वीडियो जारी कर नया विवाद पैदा कर दिया है। इस वीडियो में सीएम योगी को चिलम पीते हुए दर्शाया गया था। इस अमर्यादित प्रस्तुति पर भाजपा नेताओं ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने इसे बेहद निंदनीय और राजनीति के स्तर को गिराने वाला कदम बताया है। इससे पहले अखिलेश ने भाजपा समर्थकों द्वारा उन्हें अराजक बताते हुए जारी किए गए एआई वीडियो को भी दिखाया था।
भाजपा सांसद जगदंबिका पाल ने कहा कि अखिलेश यादव खुद मुख्यमंत्री रह चुके हैं। राजनीतिक विरोध हो सकता है, लेकिन राजनीति का स्तर और गरिमा इतनी गिराना उचित नहीं। उन्होंने जोर देकर कहा कि योगी आदित्यनाथ गोरखपीठ के पीठाधीश्वर भी हैं। कोई संत या तपस्वी निस्वार्थ भाव से देश और राष्ट्र की सेवा करता है तथा लोगों की आस्था का केंद्र होता है। अगर अखिलेश यह नहीं समझते तो यह दुर्भाग्यपूर्ण है। पाल ने चेतावनी दी कि 2027 के चुनाव में जनता इसका जवाब देगी।
भाजपा सांसद प्रवीण खंडेलवाल ने अखिलेश यादव पर हमला बोलते हुए कहा कि उत्तर प्रदेश की जनता अच्छी तरह समझती है कि अखिलेश यादव और अन्य विपक्षी दल पूर्ण रूप से बेरोजगार नेता हैं। जनता ने उन्हें बार-बार जनमत से रौंदा है। इसी वजह से उनकी परेशानी और बौखलाहट उनके चेहरे पर साफ दिखती है। उन्होंने कहा कि अपने राजनीतिक नैरेटिव को प्रासंगिक बनाए रखने के लिए अखिलेश जैसे लोग ऐसे काम करने को मजबूर हैं, जिनका जमीनी हकीकत से कोई ताल्लुक नहीं है।
उत्तर प्रदेश के डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक ने कहा कि समाजवादी पार्टी पूरी तरह पटरी से उतर चुकी है। पार्टी की कथनी और करनी में जमीन-आसमान का अंतर है। राज्य की जनता उन्हें कभी माफ नहीं करेगी। पाठक ने आरोप लगाया कि सपा का चाल और चरित्र अब जनता के सामने पूरी तरह उजागर हो चुका है। एआई की मदद से मुख्यमंत्री का अमर्यादित वीडियो बनाना और दिखाना उनकी मानसिकता को दर्शाता है।
कैबिनेट मंत्री संजय निषाद ने इस विवाद पर कहा कि प्रदेश के मुख्यमंत्री का इस तरीके का अमर्यादित पोस्ट या वीडियो बनाना बेहद निंदनीय है। यह भगवान राम की धरती है और यहां के मुख्यमंत्री के प्रति ऐसी सोच रखना ही गलत है। उन्होंने अखिलेश यादव से कहा कि अपने शासनकाल में वे क्या करते थे, पहले उस पर ध्यान दें। निषाद ने इसे सपा की दिशाहीनता का प्रमाण बताया।
भाजपा नेताओं का कहना है कि एआई तकनीक का दुरुपयोग कर किसी मुख्यमंत्री और संत की छवि को इस तरह तोड़ना लोकतंत्र और राजनीति दोनों के लिए खतरनाक है। अखिलेश यादव पर बौखलाहट में दिशाहीन होने का आरोप लगाते हुए भाजपा ने 2027 के चुनाव में जनता के फैसले का इंतजार करने की बात कही है। पूरा मामला अब सोशल मीडिया और राजनीतिक चर्चाओं में छाया हुआ है।