मायावती की खामोशी के बाद पहली बार खुलकर बोले अखिलेश यादव...
लखनऊ. कैराना लोकसभा उपचुनाव के बाद समाजवादी पार्टी और राष्ट्रीय लोकदल के नेताओं ने तो जश्न मनाया लेकिन बसपा सुपीमो मायावती खामोश रहीं। मायावती की खामोशी ने कहीं न कहीं लखनऊ से लेकर दिल्ली तक सियासत की को गर्म कर दिया है। जिसके चलते जानकार इसे गठबंधन में दरार की तरह देख रहे हैं। वहीं सपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष ने चुप्पी तोड़ते हुए कहा कि आगामी लोकसभा चुनावों के लिए बहुजन समाज पार्टी के साथ सीट बंटवारे को लेकर अभी तक कोई बात नहीं हुई। इसको लेकर सही समय पर विचार-विमर्श किया जाएगा। अखिलेश ने कहा कि भाजपा को अगर हराना है तो सभी को बड़ा दिल दिखाना होगा। समाजवादियों का दिल बहुत बड़ा है और संप्रदायिक ताकतों को सत्ता से दूर रखने के लिए हम तैयार हैं।
40 सीटों की मायावती ने की डिमांड
बसपा सुप्रीमो मायावती ने आगामी लोकसभा चुनाव में सपा के साथ गठबंधन पर बोलते हुए कहा था कि उनकी पार्टी 80 में से 40 सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारेगी। मायावती ने कहा कि अगर ऐसा नहीं हुआ तो हम अकेले ही 2019 के मिशन में उतरने के लिए मजबूर होंगे। बसपा कैडर ने भी बसपा सुप्रीमो को एक रिपोर्ट दी है, जिसमें कहा गया है कि पार्टी का वोट बैंक सपा के मुकाबले ज्यादा है। बसपा का वोट बैंक को सपा को ट्रांसफर किया जा सकता है, लेकिन अखिलेश का वोट बैंक हाथी के बजाए अन्य दलों में जा सकता है। मायावती ने गठबंधन को लेकर एक फार्मूला सुझाया था। जिसके मुताबिक 2014 के लोकसभा चुनाव में पार्टी जिस लोकसभा सीट पर दूसरे मंबर पर रही, वह सीट 2019 के चुनाव में उसी को दल को मिले। जिसके मुताबिक बसपा ने गठबंधन में 40 सीटों की डिमांड की।
हम दिलवाले हैं
अखिलेश यादव ने बसपा सुप्रीमो की 40 सीटों की मांग पर बोलते हुए कहा कि समाजवादी बड़े दिलवाले होते हैं और देश हित की बात आ जाए तो सब कुछ देने को तैयार रहते हैं। नेता जी ने पूरी जिंदगी संप्रदायिक ताकतों को हराने के लिए लगा दी, अब वही कार्य हम कर रहे हैं। गठबंधन धर्म शर्तों पर नहीं होता, बल्कि सम्मान के साथ होना चाहिए। अखिलेश यादव ने कहा कि सीटों के बंटवारे की जो भी खबरें हैं, वो सिर्फ अखबारों तक हैं। जमीन पर उनका अस्तित्व नहीं। आफको बता दें कि अखिलेश का ये बयान उन खबरों के बीच आया है, जिनमें ऐसा कहा जा रहा था कि बीएसपी यूपी में 80 लोकसभा सीटों में से 40 सीटें मांग रही है।
कन्नौज से लड़ सकते हैं चुनाव
गोरखपुर और फूलपुर उपचुनाव की जीत के बाद राज्यसभा चुनाव में यूपी की 10 सीटों पर कांटे की टक्कर देखने को मिली थी। जहां बीजेपी अपने 9 उम्मीदवारों को जिताने में कामयाब रही। वहीं, सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने 1 सीट पर जया बच्चन को तो जीत दिला दी, लेकिन बसपा के प्रत्याशी भीमराव अंबेडकर को जितवाने में कामयाब नहीं हुए।अखिलेश यादव ने बसपा उम्मीदवार भीमराव अंबेडकर को जिताने की हरसंभव कोशिश की थी, लेकिन बीजेपी के समीकरण और बीएसपी विधायक की क्रॉस वोटिंग जैसी तमाम वजहों ने उनके मंसूबों पर पानी फेर दिया। पर मायावती ने इसी के बाद अखिलेश से दोस्ती कर ली और 2019 का चुनाव साथ-साथ लड़ने का ऐलान कर दिया। वहीं अखिलेश ने भी अब यूपी से निकल कर दिल्ली की तरफ कदम बढ़ा लिए हैं। वह कन्नौज से लोकसभा का चुनाव लड़ सकते हैं।
बसपा ने बनाई दूरियां
गोरखपुर और फूलपुर उपचुनाव से पहले सपा और बसपा के बीच गठबंधन हुआ था, जो मौखिक तौर पर अभी तक कायम है। अखिलेश भी इस गठबंधन को लेकर काफी सकारात्मक नजर आ रहे हैं तो वहीं मायावती भी सपा के साथ चुनाव लड़ना चाह रही हैं। पर उन्होंने 40 सीटें मांगकर अखिलेश की टेंशन बढ़ा दी है। सपा की तरफ से 40 सीटें दिए जाने का कोई संकेत फिलहाल तो नहीं मिला, हालांकि अखिलेश ने ये जरूर कहा है कि समाजवादी बहुत दिलवाले होते हैं। वहीं जमीन पर मायावती के कार्यकर्ताओं ने सपा से दूरियां बना ली हैं। बसपा के कार्यकर्ताओं की मानें तो वह हर हालत में 80 में 40 सीटों पर चुनाव लड़ने के लिए पार्टी सुप्रीमो पर दबाव बनाए हुए हैं। यदि मन मुताबिक सीटें नहीं मिलीं तो बसपा अकेले चुनाव के मैदान में उतरेगी।