गोरखपुर में जेल में बंद 23 कैदियों में एचआईवी की पुष्टि होने के बाद स्वास्थ्य महकमे के साथ ही जेल प्रशासन हरकत में आ गया है।
लखनऊ. गोरखपुर में जेल में बंद 23 कैदियों में एचआईवी की पुष्टि होने के बाद स्वास्थ्य महकमे के साथ ही जेल प्रशासन भी हरकत में आ गया है। पिछले कुछ महीनों में एचआईवी के मामले सामूहिक रूप से सामने आने के बाद इस ताजा मामले ने हड़कंप मचा दिया है और एड्स नियंत्रण को लेकर चल रहे जागरूकता कार्यक्रमों पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। इससे पहले उन्नाव में एक गाँव में एक साथ 76 से अधिक लोगों में एचआईवी की पुष्टि हुई थी जबकि कुछ दिनों पहले गोरखपुर में एक महिला के यौन शोषण में लिप्त 13 लोगों में एचआईवी की पुष्टि हुई थी।
जनपदों में स्वास्थ्य महकमा और जेल प्रशासन अलर्ट
वैसे तो जिला स्तर पर समय-समय पर एचआईवी परीक्षण के लिए कैम्प लगाए जाते रहे हैं और जिला कारागारों में कई बार कैदियों के एचआईवी पॉजिटिव होने के मामले सामने आये हैं लेकिन इतने बड़े पैमाने पर एक साथ एचआईवी पॉजिटिव होने का यह पहला मामला सामने आया है। झांसी एआरटी सेंटर के सीनियर मेडिकल ऑफिसर डॉ आदर्श श्रीवास्तव कहते हैं कि जिला कारागार में समय-समय पर कैदियों की जांच के लिए जेल प्रशासन की मदद से स्वास्थ्य परीक्षण के लिए कैम्प आयोजित किये जाते रहे हैं। गोरखपुर में सामने आये मामले के सवाल पर वे कहते हैं कि एक साथ किसी जेल में इतने मामले कभी उनके संज्ञान में नहीं आये हैं।
पहले भी आये हैं बड़े मामले
इससे पहले एचआईवी से हड़कंप तब मचा था जब उन्नाव जिले के बांगरमऊ में एक झोलाछाप डॉक्टर के कारण 76 से भी ज्यादा लोगों में एचआईवी फ़ैल गया था। इस घटना के बाद सूबे की स्वास्थ्य सेवाओं और एड्स नियंत्रण को लेकर चल रहे जागरूकता कार्यक्रमों पर भी सवाल खड़े हुए थे। उन्नाव के मामले के सामने आने से पहले गोरखपुर में भी सामूहिक एचआईवी का अनोखा मामला सामने आया था। यहाँ एक विधवा महिला का राशन कार्ड बनवाने के लिए 13 लोगों ने यौन शोषण किया जिसके बाद सभी एचआईवी पॉजिटिव हो गए थे।