Martyr Captain Anshuman Singh: कैप्टन अंशुमन सिंह की शहादत के बाद उनके परिवार के बीच अनबन की पूरे देश में चर्चा है। अंशुमन के माता-पिता ने बहू स्मृति पर कीर्ति चक्र और सेना की तरफ से मिले पैसे लेकर जाने का आरोप लगाया है। इसी बीच मिग दुर्घटना में जान गंवाने वाले कमांडर निशांत सिंह की मां प्रोमिला देवी ने सरकार से बड़ी मांग की है।
Martyr Captain Anshuman Singh: अंशुमन सिंह को हाल ही में राष्ट्रपति ने मरणोपरांत कीर्ति चक्र प्रदान किया है। अब अंशुमन के माता-पिता की ओर से दावा किया जा रहा है कि बहू कीर्ति चक्र और सेना की ओर से दिया गया पैसा लेकर मायके चली गई हैं। कुछ ऐसी ही कहानी है शहीद कमांडर निशांत सिंह की मां प्रोमिला देवी की।
प्रोमिला देवी 26 नवंबर 2020 को मिग दुर्घटना में जान गंवाने वाले कमांडर निशांत सिंह की मां हैं। अंशुमन सिंह के माता पिता के बाद शहीद कमांडर निशांत सिंह की मां प्रोमिला देवी ने भी अपनी तकलीफ सुनाई है। उन्होंने जानकारी दी कि वो तलाकशुदा हैं और बेटे की शहादत के बाद उनका कोई सहारा नहीं है। उनका दावा है कि बुढ़ापे में उनकी देखभाल करने वाला कोई नहीं है जिसके चलते उन्हें काफी मुश्किल का सामना करना पड़ रहा है।
शहीद कमांडर निशांत सिंह की मां ने NOK नियमों में बदलाव की मांग की है। उन्होंने केंद्र सरकार से नीतियों की समीक्षा करने का भी अनुरोध किया है। एक चिट्ठी में शहीद की मां प्रोमिला देवी ने लिखा है कि सेना में शहीद हुए विधवाओं को निश्चित रूप से मुआवजा मिलना चाहिए, लेकिन जो माता-पिता पूरी तरह से अपने बेटों पर निर्भर हैं उन्हें भी अनुदान का लाभार्थी होना चाहिए।
प्रोमिला सिंह ने दावा किया है कि वो अपने इकलौते बेटे कमांडर निशांत सिंह पर निर्भर थीं जो मिग 29 के साथ 26 नवंबर 2020 को अपनी जान गंवा दी थी। उन्होंने लिखा है कि उन्हें अभी भी भारतीय नौसेना से न्याय की प्रतीक्षा है। उन्हें शेष जीवन सम्मान के साथ जीने के लिए एक नियमित और न्यायसंगत पेंशन दी जाए जैसा कि उनका 35 वर्षीय इकलौता बेटा चाहता था।
मीडिया रिपोर्ट्स की मानें तो निशांत सिंह की पत्नी को एक लाख 80 हजार रुपये पेंशन के मिलती है। शहीद निशांत सिंह मां का कहना है, ‘मैंने अपने बेटे का 35 साल पालन किया। उसे सेना में भेजा लेकिन उसकी पेंशन का एक पैसा मुझे नहीं मिलता। बेटे की पेंशन का 50 प्रतिशत हिस्सा मां को मिलना चाहिए, ताकि स्वाभिमान के साथ वह जीवन यापन कर सकें। बेटे के बाद बहू ने उनका हाल तक नहीं लिया’।