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Two-Wheeler Driving License: यूपी सरकार का बड़ा फैसला संभव: 16 वर्ष के युवाओं को मिल सकता है दोपहिया ड्राइविंग लाइसेंस

Two-Wheeler Driving License Approval: उत्तर प्रदेश सरकार 16 वर्ष आयु वर्ग के किशोरों को हल्के दोपहिया वाहनों का ड्राइविंग लाइसेंस देने पर विचार कर रही है। इस संबंध में केंद्र सरकार से अनुमति मांगी गई है। सहमति मिलने के बाद नियमों और सुरक्षा प्रावधानों के साथ अंतिम निर्णय लिया जाएगा।

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लखनऊ

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Ritesh Singh

Feb 14, 2026

हल्के दोपहिया वाहनों के लिए अनुमति पर केंद्र से मांगी गई सहमति (फोटो सोर्स : WhatsApp News Group)

हल्के दोपहिया वाहनों के लिए अनुमति पर केंद्र से मांगी गई सहमति (फोटो सोर्स : WhatsApp News Group)

Two-Wheeler Driving License Student Policy Update: उत्तर प्रदेश सरकार 16 वर्ष आयु वर्ग के किशोरों को हल्के दोपहिया वाहनों के लिए ड्राइविंग लाइसेंस देने के प्रस्ताव पर गंभीरता से विचार कर रही है। इस संबंध में राज्य सरकार ने केंद्र सरकार से अनुमति मांगी है। केंद्र की सहमति मिलने के बाद अंतिम निर्णय लिया जा सकता है। यह प्रस्ताव विशेष रूप से कम क्षमता (लो इंजन पावर) वाले दोपहिया वाहनों के लिए है, जिनका उपयोग मुख्यतः छात्र-छात्राएं और किशोर वर्ग करते हैं। सरकार का मानना है कि स्पष्ट नियमों और नियंत्रित व्यवस्था के तहत यह कदम युवाओं को कानूनी दायरे में वाहन संचालन की अनुमति देगा और अवैध ड्राइविंग की समस्या को कम कर सकता है।

वर्तमान नियम क्या कहते हैं

मौजूदा मोटर वाहन नियमों के अनुसार 18 वर्ष की आयु पूर्ण करने के बाद ही सामान्य दोपहिया और चार पहिया वाहनों का ड्राइविंग लाइसेंस जारी किया जाता है। हालांकि, 50 सीसी तक की इंजन क्षमता वाले बिना गियर वाले दोपहिया वाहन के लिए 16 वर्ष की आयु में लाइसेंस का प्रावधान पहले से मौजूद है, लेकिन राज्यों में इसके क्रियान्वयन और अनुमति की प्रक्रिया अलग-अलग रही है।  उत्तर प्रदेश सरकार अब इस व्यवस्था को अधिक स्पष्ट, पारदर्शी और व्यावहारिक बनाने पर विचार कर रही है, ताकि नियमों के अनुरूप किशोरों को सीमित श्रेणी के वाहनों के संचालन की अनुमति दी जा सके।

क्यों जरूरी समझा जा रहा यह कदम

प्रदेश में बड़ी संख्या में 16 से 18 वर्ष आयु वर्ग के छात्र विद्यालय और कोचिंग संस्थानों तक आने-जाने के लिए दोपहिया वाहन चलाते हैं। अधिकांश मामलों में ये वाहन अभिभावकों के नाम पर पंजीकृत होते हैं और किशोर बिना वैध लाइसेंस के ही वाहन चलाते पाए जाते हैं। ट्रैफिक पुलिस के आंकड़ों के अनुसार नाबालिगों द्वारा वाहन चलाने के मामलों में चालान और दुर्घटनाओं की संख्या में वृद्धि देखी गई है। ऐसे में सरकार का मानना है कि यदि नियंत्रित और कानूनी ढांचे के भीतर लाइसेंस की अनुमति दी जाए, तो सड़क सुरक्षा के मानकों को बेहतर तरीके से लागू किया जा सकता है।

सुरक्षा होगी प्राथमिकता

सूत्रों के अनुसार प्रस्तावित योजना में सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाएगी। लाइसेंस केवल कम क्षमता वाले बिना गियर के दोपहिया वाहनों तक सीमित रहेगा। हेलमेट पहनना अनिवार्य होगा। स्पीड लिमिट तय की जा सकती है। यातायात नियमों की विशेष प्रशिक्षण व्यवस्था की जाएगी।इसके अलावा लाइसेंस जारी करने से पहले लिखित परीक्षा और ड्राइविंग टेस्ट अनिवार्य किया जाएगा, ताकि आवेदक को यातायात नियमों की पूरी जानकारी हो।

केंद्र से अनुमति क्यों जरूरी

ड्राइविंग लाइसेंस से संबंधित प्रावधान मोटर वाहन अधिनियम के तहत आते हैं, जो केंद्र सरकार के अधीन है। राज्य सरकारें नियमों को लागू करती हैं, लेकिन आयु सीमा या श्रेणी में बदलाव के लिए केंद्र की अनुमति आवश्यक होती है। उत्तर प्रदेश सरकार ने इसी प्रक्रिया के तहत केंद्र से अनुमति मांगी है। यदि केंद्र सरकार सहमति देती है, तो राज्य सरकार अधिसूचना जारी कर नई व्यवस्था लागू कर सकती है।

अभिभावकों और छात्रों की प्रतिक्रिया

राजधानी लखनऊ सहित अन्य जिलों में इस प्रस्ताव को लेकर मिली-जुली प्रतिक्रिया देखने को मिल रही है। कई अभिभावकों का मानना है कि लाइसेंस मिलने से बच्चों में जिम्मेदारी की भावना बढ़ेगी। कुछ अभिभावक सुरक्षा को लेकर चिंतित हैं और कड़े नियमों की मांग कर रहे हैं। छात्र वर्ग में इस प्रस्ताव को लेकर उत्साह देखा जा रहा है, खासकर उन छात्रों में जो प्रतिदिन लंबी दूरी तय करते हैं।

सड़क सुरक्षा अभियान से जोड़ा जा सकता है

सूत्रों के मुताबिक सरकार इस पहल को सड़क सुरक्षा अभियान से जोड़ सकती है। स्कूलों और कॉलेजों में विशेष जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए जा सकते हैं, जिनमें यातायात नियमों, सुरक्षित ड्राइविंग और आपातकालीन स्थिति में व्यवहार संबंधी प्रशिक्षण दिया जाएगा। यदि यह योजना लागू होती है, तो प्रदेश में सड़क सुरक्षा के प्रति जागरूकता बढ़ाने का यह एक बड़ा अवसर भी हो सकता है।

क्या हो सकते हैं संभावित लाभ

  • नाबालिगों द्वारा अवैध वाहन संचालन में कमी
  • यातायात नियमों के प्रति जागरूकता में वृद्धि
  • दुर्घटनाओं की रोकथाम के लिए बेहतर प्रशिक्षण
  • कानूनी प्रक्रिया के तहत वाहन संचालन
  • चुनौतियां भी कम नहीं

हालांकि इस प्रस्ताव के साथ कई चुनौतियां भी जुड़ी हैं

नियमों के पालन की निगरानी

  • स्पीड लिमिट का प्रभावी क्रियान्वयन
  • लाइसेंस के दुरुपयोग की रोकथाम
  • ग्रामीण क्षेत्रों में नियंत्रण
  • सरकार को इन सभी पहलुओं पर संतुलित नीति बनानी होगी।