
₹382 करोड़ की परियोजना में ₹251.82 करोड़ जारी, 4,000 कामकाजी महिलाओं को मिलेगा सुरक्षित आवास (फोटो सोर्स : WhatsApp News Group)
UP Govt Speeds Up Construction of 8 Working Women Hostels,: शहरी क्षेत्रों में रोजगार की तलाश में आने वाली कामकाजी महिलाओं को सुरक्षित, किफायती और सम्मानजनक आवास उपलब्ध कराने के उद्देश्य से उत्तर प्रदेश सरकार ने आठ श्रमजीवी महिला छात्रावासों के निर्माण कार्य को तेज कर दिया है। कुल ₹382 करोड़ की स्वीकृत परियोजना में से ₹251.82 करोड़ की पहली किस्त जारी कर दी गई है, जो कुल राशि का लगभग 66 प्रतिशत है। इससे निर्माण कार्य को गति मिली है और संबंधित एजेंसियों ने समयबद्ध तरीके से कार्य पूर्ण करने की दिशा में कदम बढ़ा दिए हैं।
यह परियोजना भारत सरकार की एसएएससीआई (SASCI) योजना के अंतर्गत संचालित की जा रही है और केंद्र व राज्य सरकार के समन्वित प्रयासों का परिणाम है। सरकार का स्पष्ट उद्देश्य है कि रोजगार के लिए शहरों में आने वाली महिलाओं को सुरक्षित ठिकाना मिले, जिससे वे आत्मविश्वास के साथ कार्य कर सकें।
परियोजना के तहत राजधानी लखनऊ में तीन, गौतमबुद्ध नगर में चार और गाजियाबाद में एक छात्रावास का निर्माण किया जा रहा है। इन सभी छात्रावासों की क्षमता 500-500 महिलाओं की होगी। इस प्रकार कुल 4,000 कामकाजी महिलाओं को सीधा लाभ मिलेगा। राजधानी लखनऊ में प्रस्तावित छात्रावासों के लिए भूमि चिन्हांकन की प्रक्रिया पूरी कर संबंधित विभाग को हस्तांतरित कर दी गई है। इसी प्रकार गौतमबुद्धनगर और गाजियाबाद में भी भूमि आवंटन और प्रारंभिक प्रक्रियाएं पूरी कर निर्माण कार्य शुरू कर दिया गया है। गाजियाबाद के सूर्य नगर क्षेत्र में प्रस्तावित छात्रावास के लिए आवश्यक अनुमति की प्रक्रिया अंतिम चरण में है। संबंधित प्राधिकरणों से स्वीकृति मिलते ही वहां भी कार्य तेज गति से आगे बढ़ेगा।
प्रदेश सरकार ने अप्रैल 2025 में निर्माण कार्य के लिए सीएंडडीएस (C&DS) को कार्यदायी संस्था नामित किया है। यह संस्था परियोजना के तकनीकी क्रियान्वयन, गुणवत्ता नियंत्रण और समय सीमा के पालन की जिम्मेदारी निभा रही है। विभागीय अधिकारियों के अनुसार निर्माण कार्य की नियमित समीक्षा की जा रही है ताकि गुणवत्ता और पारदर्शिता सुनिश्चित हो सके।
सरकार का लक्ष्य है कि परियोजना को चरणबद्ध तरीके से निर्धारित समय सीमा के भीतर पूरा किया जाए। इसके लिए वित्तीय संसाधनों की उपलब्धता सुनिश्चित की गई है और पहली किस्त जारी कर दी गई है, जिससे निर्माण एजेंसियों को किसी प्रकार की आर्थिक बाधा का सामना न करना पड़े।
इन छात्रावासों में सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी गई है। परिसर में 24 घंटे सुरक्षा व्यवस्था, सीसीटीवी निगरानी, प्रवेश-निकास नियंत्रण और महिला सुरक्षा कर्मियों की तैनाती सुनिश्चित की जाएगी। इसके अलावा स्वच्छ पेयजल, साफ-सुथरे शौचालय, सामुदायिक रसोईघर या भोजनालय, सामान्य बैठक कक्ष, अध्ययन कक्ष, मनोरंजन क्षेत्र तथा आवश्यक चिकित्सा सहायता जैसी सुविधाएं भी उपलब्ध कराई जाएंगी। उद्देश्य यह है कि यहां रहने वाली महिलाओं को घर जैसा सुरक्षित और सम्मानजनक वातावरण मिल सके। सरकारी अधिकारियों का कहना है कि कई बार रोजगार के लिए शहरों में आने वाली महिलाओं को निजी छात्रावासों या किराये के कमरों में असुरक्षित और महंगे विकल्पों का सहारा लेना पड़ता है। इस योजना से उन्हें सुरक्षित और किफायती विकल्प मिलेगा।
उत्तर प्रदेश के शहरी क्षेत्रों में बड़ी संख्या में महिलाएं विभिन्न उद्योगों, सेवा क्षेत्रों, निजी कंपनियों, शैक्षणिक संस्थानों और असंगठित क्षेत्र में कार्यरत हैं। आवास की कमी और सुरक्षा संबंधी चुनौतियां उनके लिए बड़ी समस्या बनती रही हैं। इस परियोजना के माध्यम से सरकार न केवल सुरक्षित आवास उपलब्ध करा रही है, बल्कि महिला सशक्तिकरण की दिशा में ठोस कदम भी उठा रही है। सुरक्षित आवास मिलने से महिलाओं की कार्यक्षमता और आत्मविश्वास दोनों में वृद्धि होगी। वे बिना किसी भय या असुविधा के अपने करियर पर ध्यान केंद्रित कर सकेंगी। विशेषज्ञों का मानना है कि सुरक्षित आवास व्यवस्था महिलाओं की आर्थिक भागीदारी को बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। जब महिलाओं को रहने की चिंता नहीं होती, तो वे रोजगार और कौशल विकास पर अधिक ध्यान दे पाती हैं।
यह परियोजना केवल आवास निर्माण तक सीमित नहीं है, बल्कि शहरी अर्थव्यवस्था को मजबूती देने की दिशा में भी महत्वपूर्ण है। बड़ी संख्या में महिलाएं आईटी, शिक्षा, स्वास्थ्य, खुदरा व्यापार, सेवा क्षेत्र और स्टार्टअप कंपनियों में कार्यरत हैं।सरकार का मानना है कि सुरक्षित और किफायती छात्रावास सुविधा मिलने से अधिक महिलाएं रोजगार के अवसरों के लिए आगे आएंगी। इससे प्रदेश के शहरी श्रमबल में वृद्धि होगी और आर्थिक गतिविधियों को गति मिलेगी।
यह योजना केंद्र और राज्य सरकार के संयुक्त प्रयासों का परिणाम है। भारत सरकार की एसएएससीआई योजना के तहत वित्तीय प्रावधान किया गया है, जबकि राज्य सरकार ने भूमि उपलब्ध कराने, निर्माण एजेंसी नियुक्त करने और निगरानी व्यवस्था सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी निभाई है। सरकारी सूत्रों के अनुसार परियोजना की प्रगति की नियमित मॉनिटरिंग की जा रही है। संबंधित विभाग समय-समय पर स्थल निरीक्षण कर रहे हैं, ताकि निर्माण गुणवत्ता और सुरक्षा मानकों से कोई समझौता न हो।
परियोजना को चरणबद्ध तरीके से पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। निर्माण कार्य की गति बढ़ाने के लिए वित्तीय संसाधनों की उपलब्धता सुनिश्चित की गई है। अधिकारियों का कहना है कि पहली किस्त जारी होने के बाद निर्माण कार्य में तेजी आई है। गुणवत्ता नियंत्रण के लिए तकनीकी टीमों की नियुक्ति की गई है। भवन निर्माण में आधुनिक डिजाइन और टिकाऊ सामग्री का उपयोग किया जा रहा है, ताकि लंबे समय तक यह छात्रावास सुरक्षित और उपयोगी बने रहें।
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Published on:
14 Feb 2026 05:53 pm
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