लखनऊ

मायावती की बसपा नहीं हुई कमजोर, कमाई में बनी अरबपति, लोकसभा चुनावों में सभी को पटखनी देने को तैयार

मायावती संगठन और बूथ लेवल के कार्यकर्ताओं को मजबूत करने में भी लगी हैं...

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Feb 08, 2018
mayawati says Dalits are being targeted in BJP government

लखनऊ. उत्तर प्रदेश के विधानसभा चुनाव 2017 में करारी हार के बाद भी मायावती और बहुजन समाज पार्टी बिल्कुल भी कमजोर नहीं पड़ी है। बीएसपी की इनकम में विधानसभा चुनाव 2017 की हार का तनिक भी असर नहीं पड़ा है। इलेक्शन वॉच की रिपोर्ट के मुताबिक बसपा की इनकम में जबर्दस्त इजाफा हुआ है। इलेक्शन वॉच की रिपोर्ट के मुताबिक बसपा की 2015-16 की कुल आय 47.385 करोड़ हुआ करती थी। जो यूपी विधानसभा चुनाव से पहले मतलब 2016-17 में बढ़कर 173.58 करोड़ रुपये हो गई। इसके साथ ही मायावती संगठन और बूथ लेवल के कार्यकर्ताओं को मजबूत करने में भी लगी हैं। कुल मिलाकर मायावती ने हार नहीं मानी है और लोकसभा चुनावों में सभी को पटखनी देने के लिए तैयारी कर रही हैं।

एडीआर की रिपोर्ट

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एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म (एडीआर) रिपोर्ट के मुताबिक नोटबंदी का मायावती की बहुजन समाज पार्टी पर जरा भी असर नहीं पड़ा। विधानसभा चुनाव के दौरान बहुजन समाज पार्टी ने खूब चंदा कमाया। जिन पांच प्रमुख पार्टियों ने अपनी सालाना आय चुनाव आयोग के सामने घोषित की है उन सबकी मिलाकर कुल इनकम 299.54 करोड़ रुपए है। इसमें बहुजन समाज पार्टी की हिस्सेदारी 57.95 फीसदी है। दूसरे नंबर पर सीपीएम है, जिसकी हिस्सेदारी 33.47 फीसदी है।


ये हैं एडीआर रिपोर्ट के आंकड़े

बहुजन समाज पार्टी

एडीआर की रिपोरेट के मुताबिक बहुजन समाज पार्टी को 2016-17 में हुई कुल इनकम में चंदे, ग्रांट और कांट्रिब्यूशन के रूप में 75.26 करोड़ रुपए मिले। जबकि सदस्यता शुल्क के रूप में 64.62 करोड़ रुपए मिले। वहीं बसपा को 33.69 करोड़ रुपए ब्याज ब्याज के रूप में मिले हैं।

मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी

मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (सीपीएम) को सदस्यता के रूप में 40.55 करोड़ रुपए मिले। जबकि वॉलंटियर कांट्रिब्यूशन के रूप में 36.72 करोड़ रुपए मिले। वहीं ब्याज के तौर पर सीपीएम को 18.22 करोड़ रुपए मिले।

राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी

राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) को 9.66 करोड़ रुपए कूपन से मिले, 6.62 करोड़ ग्रांट, चंदा और कांट्रिब्यूशन के रूप में मिले। जबकि सदस्यता शुल्क के रूप में 61 लाख रुपए मिले।

ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस

वहीं ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) को सदस्यता शुल्क के रूप में सबसे ज्यादा 2.52 करोड़ रुपए मिले। जबकि चंदे के रूप में 2.17 करोड़ रुपए आए। वहीं कूपन से 84 लाख रुपए मिले।

भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी

भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (सीपीआई) को सदस्यता शुल्क के रूप में 80 लाख रुपए, पार्टी फंड और इलेक्शन फंड के रूप में 56 लाख रुपए और ब्याज के रूप में 53 लाख रुपए मिले।

बीजेपी-कांग्रेस ने नहीं दी डीटेल

2015-16 में चुनाव आयोग को दिए गए ब्योरे के मुताबिक भारतीय जनता पार्टी की आमदनी सबसे ज्यादा 570.86 करोड़ रुपए थी। जबकि इस दौरान कांग्रेस की कमाई 261.56 करोड़ रुपए थी। आपको बता दें कि पिछले वित्तीय वर्ष की कोई भी डीटेल बीजेपी और कांग्रेस ने अब तक चुनाव आयोग को नहीं सौंपी है।

चुनाव आयोग को देनी थी डीटेल

वहीं एडीआर के स्टेट कोऑर्डिनेटर संजय सिंह के मुताबिक चुनाव आयोग ने 19 नवंबर 2014 को राजनीतिक दलों को लेटर लिखकर उनकी आय-व्यय की रिपोर्ट चुनाव आयोग को देने के लिए कहा था। वित्तीय वर्ष 2016-17 के लिए पॉलिटिकल पार्टी द्वारा ऑडिट रिपोर्ट पेश करने की आखिरी तारीख 30 अक्टूबर 2017 थी। लेकिन इस दौरान केवल बसपा, टीएमसी और सीपीएम ने ही अपना ब्योरा दिया था। इसके अलावा सीपीआई और एनसीपी ने भी तय समय के बाद ब्योरा जमा करी दिया था। जबकि बीजेपी और कांग्रेस ने अब तक अपना ब्योरा नहीं दिया है।

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Updated on:
08 Feb 2018 12:28 pm
Published on:
08 Feb 2018 12:24 pm
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