भातखंडे संस्कृति विश्वविद्यालय ने सत्र 2026-27 पीएचडी प्रवेश प्रक्रिया शुरू कर दी है। नृत्य, गायन और वादन विषयों में शोध के इच्छुक अभ्यर्थी 25 जून तक ऑनलाइन आवेदन कर सकेंगे।
PhD Admission: भातखंडे संस्कृति विश्वविद्यालय ने शैक्षणिक सत्र 2026-27 के लिए पीएचडी प्रवेश प्रक्रिया प्रारंभ कर दी है। संगीत, नृत्य और वादन के क्षेत्र में उच्चस्तरीय शोध करने के इच्छुक विद्यार्थियों के लिए यह एक महत्वपूर्ण अवसर माना जा रहा है। विश्वविद्यालय प्रशासन की ओर से जारी सूचना के अनुसार अभ्यर्थी समर्थ पोर्टल के माध्यम से 25 जून तक ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं।
विश्वविद्यालय देशभर में भारतीय शास्त्रीय संगीत और सांस्कृतिक शिक्षा के लिए विशेष पहचान रखता है। यहां से बड़ी संख्या में कलाकार, शोधकर्ता और संगीत विशेषज्ञ निकल चुके हैं, जिन्होंने राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन किया है। ऐसे में पीएचडी कार्यक्रम में प्रवेश को लेकर विद्यार्थियों में उत्साह देखा जा रहा है।
विश्वविद्यालय द्वारा इस वर्ष पीएचडी कार्यक्रम के अंतर्गत मुख्य रूप से तीन विषयों में प्रवेश दिए जाएंगे-
इन विषयों में भारतीय शास्त्रीय परंपरा, लोक संस्कृति, संगीत शास्त्र और प्रस्तुति कला से जुड़े विभिन्न शोध क्षेत्रों पर अध्ययन और अनुसंधान का अवसर मिलेगा। विश्वविद्यालय प्रशासन का कहना है कि शोधार्थियों को आधुनिक शोध सुविधाओं के साथ-साथ पारंपरिक संगीत ज्ञान की गहराई भी उपलब्ध कराई जाएगी।
पीएचडी प्रवेश के लिए आवेदन प्रक्रिया पूरी तरह ऑनलाइन रखी गई है। इच्छुक अभ्यर्थी समर्थ पोर्टल पर जाकर आवेदन कर सकते हैं। आवेदन करते समय अभ्यर्थियों को अपनी शैक्षिक योग्यता, शोध विषय से संबंधित जानकारी तथा आवश्यक दस्तावेज अपलोड करने होंगे। आवेदन की अंतिम तिथि 25 जून निर्धारित की गई है। विश्वविद्यालय प्रशासन ने अभ्यर्थियों से अंतिम तिथि का इंतजार न करने और समय रहते आवेदन पूरा करने की अपील की है।
विश्वविद्यालय सूत्रों के अनुसार आवेदन प्रक्रिया पूरी होने के बाद प्रवेश परीक्षा और साक्षात्कार आयोजित किए जाएंगे। परीक्षा में अभ्यर्थियों की विषय संबंधी जानकारी, शोध क्षमता और संगीत एवं कला के प्रति समझ का मूल्यांकन किया जाएगा। इसके बाद चयनित अभ्यर्थियों की मेरिट सूची जारी की जाएगी। अंतिम चयन विश्वविद्यालय के निर्धारित नियमों और यूजीसी के दिशा-निर्देशों के अनुसार होगा।
भातखंडे संस्कृति विश्वविद्यालय लंबे समय से भारतीय संगीत और कला परंपरा के संरक्षण और संवर्धन के लिए कार्य कर रहा है। विश्वविद्यालय में शोध कार्यों को बढ़ावा देने के लिए विशेष प्रयास किए जा रहे हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि संगीत और नृत्य के क्षेत्र में शोध की अपार संभावनाएं हैं। बदलते समय में भारतीय शास्त्रीय संगीत, लोकधुनों और पारंपरिक वाद्य यंत्रों पर गंभीर शोध की आवश्यकता लगातार बढ़ रही है। ऐसे में विश्वविद्यालय का यह कदम युवा शोधार्थियों के लिए लाभकारी साबित होगा।
पीएचडी प्रवेश प्रक्रिया शुरू होने की जानकारी मिलते ही विद्यार्थियों और संगीत प्रेमियों में उत्साह बढ़ गया है। कई अभ्यर्थियों ने इसे अपने करियर के लिए बड़ा अवसर बताया। विश्वविद्यालय परिसर और ऑनलाइन माध्यमों पर भी प्रवेश प्रक्रिया को लेकर चर्चा तेज हो गई है।
संगीत के विद्यार्थियों का कहना है कि भातखंडे संस्कृति विश्वविद्यालय जैसे प्रतिष्ठित संस्थान से पीएचडी करना उनके भविष्य को नई दिशा दे सकता है। यहां अनुभवी गुरुजनों और विशेषज्ञों का मार्गदर्शन भी मिलता है, जो शोध कार्य को मजबूत बनाता है।
विश्वविद्यालय प्रशासन ने कहा है कि सभी अभ्यर्थी आवेदन करने से पहले दिशा-निर्देशों को ध्यानपूर्वक पढ़ लें। आवेदन पत्र में किसी प्रकार की त्रुटि होने पर परेशानी हो सकती है। साथ ही अभ्यर्थियों को अपने सभी प्रमाण पत्र, फोटो और हस्ताक्षर निर्धारित प्रारूप में अपलोड करने के निर्देश दिए गए हैं।
लखनऊ विश्वविद्यालय प्रशासन ने अभ्यर्थियों को सलाह दी है कि आवेदन करने के बाद उसका प्रिंटआउट अवश्य सुरक्षित रखें ताकि भविष्य में किसी भी आवश्यकता पड़ने पर उपयोग किया जा सके। भारतीय संगीत और संस्कृति के क्षेत्र में शोध करने का सपना देखने वाले विद्यार्थियों के लिए यह एक बेहतरीन अवसर है। समय रहते आवेदन कर अभ्यर्थी अपने भविष्य को नई ऊंचाई दे सकते हैं।