
लखनऊ. समाजवादी पार्टी और बहुजन समाज पार्टी के गठबंधन के बाद होने वाले नुकसान की आहट देख भाजपा हाईकमान भी एक्शन में आ गया है। यूपी में कमजोर हो रही संगठन की धार के साथ ओबीसी वोटर्स को अपने पाले में लाने के लिए बीजेपी जल्द ही राष्ट्रीय महामंत्री और राज्यसभा सांसद भूपेंद्र यादव को उत्तर प्रदेश का प्रभारी बना सकती है। भूपेंद्र यादव की टीम में कई युवा चुहरों को जगह दिए जाने की भी चर्चा चल रही है। जानकारी के मुताबिक बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह 4-5 जुलाई को जब लखनऊ में रहेंगे तो उनके साथ भूपेंद्र यादव भी आएंगे। दरअसल यूपी में तीन लोकसभा उपचुनाव हारने के बाद पार्टी के अंदर वर्तमान प्रदेश प्रभारी ओम माथुर के कामकाज को लेकर सवालिया निशान लग रहे थे। ओम माथुर ने खुद भी पार्टी आलाकमान के सामने यूपी की प्रभार संभालने में असमर्थता जताई थी। जिसके बाद से वह लगाताक संगठन से दूरी भी बनाए हुए हैं।
प्रदेश अध्यक्ष के चलते बनाई दूरी
विधानभा चुनाव 2017 से पहले ओम माथुर को यूपी का प्रभार दिया गया था। ओम माथुर की रणनीति के चलते भाजपा ने प्रचंड जीत दर्ज की थी। निकाय चुनाव में पार्टी की जीत में भी ओममाथुर का अहम किरदार रहा। लेकिन फूलपुर, गोरखपुर और कैराना में पार्टी को मिली हार के बाद ओम माथुर के काम पर संगठन के अंदर विरोध शुरू हो गया। सूत्रों की मानें तो बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र नाथ पांडेय के साथ भी उनकी नहीं बन रही। इसका इशारा ओम माथुर ने कानपुर में किया था। इसी के बाद उन्होंने पार्टी हाईकमान से अनुरोध किया था कि उनकी जगह दूसरे नेता को प्रदेश की जिम्मेदारी दी जाए।
ओबीसी वोटर्स के चलते भाजपा का दांव
विधानसभा चुनाव से पहले प्रदेश की बागडोर केशव प्रसाद मौर्य के पास थी और ओम माथुर के साथ उनकी केमिस्ट्री बनती थी। केशव के डिप्टी सीएम बनने के बाद प्रदेश की बागडोर महेंद्र नाथ पांडेय के हाथों में आ गई। वहीं सपा और बसपा ने गठबंधन का ऐलान कर दिया। दलित, ओबीसी और मुस्लिम वोटर्स के बल पर मायावती और अखिलेश ने उपचुनावों में भाजपा को पटखनी दे दी। इसी के बाद चर्चा चल रही थी कि भाजपा भी यूपी का प्रभार ओबीसी समाज के नेता के हाथों में देगा। भूपेंद्र यादव ओबीसी समाज से आते हैं और उनकी गिनती भाजपा के अंदर खास रणनीतिकार के तौर पर होती है। कई राज्यों के प्रभारी रहते हुए भूपेंद्र यादव ने वहां कमल खिलाया। संघ के सबसे पसंदीदा नेताओं में से भी उन्हें देखा जाता है। भूपेंद्र यादव के पास इस समय बिहार और गुजरात का प्रभार है।
चुनाव के बाद नहीं दिखे ओम माथुर
विधानसभा चुनाव के बाद से ही यूपी प्रभारी ओम प्रकाश माथुर ने कानपुर में हुई कार्यसमिति के बाद से प्रदेश का रुख नहीं किया है। जबकि इस बीच कई अहम घटनाक्रम हुए हैं। इसके पीछे पार्टी के ताकतवर पदाधिकारी से उनकी नाराजगी बताई जा रही है। उन्होंने राष्ट्रीय नेतृत्व से खुद को कार्यमुक्त करने का भी आग्रह किया है। सूत्रों की मानें तो नए प्रदेश अध्यक्ष से उनका तालमेल नहीं बैठ पा रहा है। ओम माथुर डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्या के करीबी माने जाते हैं। विधानसभा चुनाव के बाद ओम माथुर ने केशव के हाथों में यूपी की बागडोर देने की सिफारिश भी की थी। लेकिन पार्टी हाईकमान ने संघ के इशारे पर योगी आदित्यनाथ को सीएम की कुर्सी पर बिठा दिया। अब संघ के इशारे पर एक बार फिर बीजेपी में ये चौंकाने वाला फैसला होने वाला है।
संगठन की बात सरकार तक पहुंचाएंगे
संघ के इशारे पर भूपेंद्र यादव को यूपी का प्रभारी मंत्री बनाया जा सकता है। जानकारों की मानें तो संघ ने जमीनी स्तर पर लोकसभा चुनाव को लेकर सर्वे करवाया। जहां पार्टी की हालत खराब बताई गई। साथ ही संगठन के अंदर भी खपटपट चल रही है। इन्हीं को देखते हुए भूपेंद्र यादव को यहां का प्रभार दिया जा सकता है। भाजपा के एक नेता का कहना है कि संगठन की सरकार नहीं सुनती। शिकायत के बाद भी जिम्मेदार अधिकरियों पर कार्रवाई नहीं की जाती। इसी के बाद संघ ने भूपेंद्र यादव को यूपी का प्रभार देने के लिए भाजपा हाईकमान से कहा है। भूपेंद्र यादव जहां वोटर्स को अपने पाले में लाने का कार्य करेंगे, वहीं सरकार व संगठन के बीच तालमेल भी बैठाएंगे।