भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश उपाध्यक्ष का दावा, धीरे-धीरे पूरा होगा एजेंडा
लखनऊ. मुस्लिम महिलाओं को तीन तलाक के मसले पर सुप्रीम कोर्ट के ऐतिहासिक फैसले के बाद भारतीय जनता पार्टी के नेता खासे उत्साहित हैं। उनका मानना है कि यह फैसला समान नागरिक संहिता की ओर पहला कदम है। पार्टी के प्रदेश उपाध्यक्ष प्रकाश शर्मा का दावा है कि धीरे-धीरे राष्ट्र निर्माण का समग्र एजेंडा पूरा किया जाएगा।
सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद जहां मुस्लिम महिलाओं व प्रगतिशील विचारधारा के लोगों में जोरदार उत्साह है, वहीं भारतीय जनता पार्टी के नेता इसे सरकार की सकारात्मक पैरवी का परिणाम मान रहे हैं। उत्तर प्रदेश भाजपा के उपाध्यक्ष प्रकाश शर्मा ने कहा कि उनकी पार्टी लंबे समय से समान नागरिक संहिता की पक्षधर रही है। सर्वोच्च न्यायालय का फैसला देश में समान नागरिक संहिता लागू करने की ओर पहला कदम साबित होगा। इससे न सिर्फ मुस्लिम महिलाओं के साथ वर्षों से हो रही नाइंसाफी पर लगाम लगेगी, बल्कि उन्हें जरूरी न्याय मिलेगा। इसके बाद सामाजिक साम्य के लिए जरूरी अन्य मसले भी हल होंगे। भारतीय जनता पार्टी अपनी स्थापना के समय से ही एक देश-एक विधान का नारा देती रही है। यह फैसला उस संकल्प को पूरा करने के लिए भी मार्गदर्शक साबित होगा।
मुस्लिम महिलाओं ने लड़ी लड़ाई
पेशे से वकील प्रकाश शर्मा का कहना है कि यह लड़ाई भारतीय जनता पार्टी कार्यकर्ताओं या सरकार ने नहीं शुरू की। इसकी शुरुआत वर्षों से पीड़ित मुस्लिम महिलाओं ने की। पूरी लड़ाई मुस्लिम महिलाओं ने लड़ी और आज उन्हें सफलता मिली है। सरकार की भूमिका बस इतनी है कि सरकार ने इन महिलाओं का मनोबल नहीं गिराया। उन्हें देश की अन्य महिलाओं के समान फैसले लेने के मौके व जीवन जीने का समग्र अधिकार मिल सके, यह सुनिश्चित करने के लिए सुप्रीम कोर्ट के समक्ष अपनी राय दी। अब जब महिलाओं के पक्ष में फैैसला आया है तो सरकार सुप्रीम कोर्ट के फैसले के अनुरूप अमल कर उन्हें खुशियों की सौगात देगी।
शाहबानो की पुनरावृत्ति नहीं
भारतीय जनता पार्टी में सक्रियता से पहले बजरंग दल के राष्ट्रीय संयोजक रहे प्रकाश शर्मा का कहना है कि इस समय देश में जनता की सुनने वाली व जनभावनाओं को समझने वाली सरकार है। इसलिए इस बार किसी भी तरह शाहबानो प्रकरण की पुनरावृत्ति नहीं होगी। उन्होंने याद दिलाया कि देश में तो हिन्दू कोड बिल का भी विरोध हुआ था। उस बिल के माध्यम से हिन्दू समाज में पुरुषों व महिलाओं को समान अधिकार दिये गए। उस समय लोगों ने इस बिल का विरोध किया था किन्तु बाद में सभी ने स्वीकार किया। यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि तमाम मुस्लिम नेता सर्वोच्च न्यायालय तक की अवज्ञा कर रहे हैं।