लखनऊ

‘लोकतंत्र बचाओ, अराजकता हटाओ’ अभियान का समापन: जानिए पश्चिमी यूपी और ब्रज में भाजपा के क्या हैं सियासी मायने

UP BJP Mission 2027 Strategy: ‘लोकतंत्र बचाओ, अराजकता हटाओ’ अभियान भाजपा के लिए 2027 की चुनावी तैयारियों का शंखनाद है। युवा और महिला वोटरों तक पहुंच बढ़ाने के साथ क्षेत्रीय मुद्दों को राष्ट्रवादी फ्रेम में पेश करने की कोशिश दिखती है।
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Updated: 5 Nov 2026, 6:03 PM IST
Loktantra Bachao Arajakta Hatao
लोकतंत्र बचाओ, अराजकता हटाओ अभियान (Photo-IANS)

BJP Loktantra Bachao Padayatra: भारतीय जनता पार्टी ने 3 से 5 नवंबर 2026 तक उत्तर प्रदेश के छह संगठनात्मक क्षेत्रों में ‘लोकतंत्र बचाओ, अराजकता हटाओ’ पदयात्रा अभियान चलाया। यह अभियान विपक्ष के एसआईआर (स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन) और चुनाव आयोग पर लगाए गए आरोपों के जवाब में शुरू किया गया था। लखनऊ, बरेली, गोरखपुर, प्रयागराज, कानपुर और गाजियाबाद में वरिष्ठ नेताओं के नेतृत्व में ये पदयात्राएं निकाली गईं। हर कार्यक्रम में कम से कम 25 हजार कार्यकर्ताओं की भागीदारी का लक्ष्य रखा गया था। आखिरी दिन 5 नवंबर को पश्चिमी उत्तर प्रदेश की पदयात्रा गाजियाबाद में हुई, जिसका नेतृत्व मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने किया। पश्चिमी यूपी की राजनीतिक संवेदनशीलता, एनसीआर से निकटता और 2027 विधानसभा चुनाव की दृष्टि से गाजियाबाद पर विशेष फोकस स्वाभाविक था।

गाजियाबाद से विपक्ष पर बरसे सीएम योगी आदित्यनाथ

राजनगर एक्सटेंशन में आयोजित पदयात्रा में योगी आदित्यनाथ ने तिरंगा हाथ में लेकर मार्च का नेतृत्व किया। करीब 1.4 किलोमीटर की पदयात्रा के साथ जनसभा भी हुई। पश्चिमी उत्तर प्रदेश के विभिन्न जिलों से कार्यकर्ता पहुंचे। सुरक्षा व्यवस्था कड़ी रखी गई और कई मार्गों पर ट्रैफिक डायवर्जन लागू किया गया। योगी ने भाषण में कांग्रेस और इंडिया गठबंधन पर निशाना साधते हुए कहा कि वे प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व वाले ‘नए भारत’ की प्रगति में बाधा बन रहे हैं। उन्होंने राम मंदिर, प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत चार करोड़ घर, काशी विश्वनाथ धाम और विकास कार्यों का जिक्र करते हुए विपक्ष पर संवैधानिक संस्थाओं पर सवाल उठाने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि कांग्रेस स्वार्थ के लिए दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र की विश्वसनीयता को कमजोर करने की कोशिश कर रही है।

बरेली में जेपी नड्डा और केशव प्रसाद ने विपक्ष को घेरा

3 नवंबर को ब्रज क्षेत्र की पदयात्रा बरेली में निकाली गई। इसमें केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा और उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य शामिल हुए। करीब दो किलोमीटर की पदयात्रा में हजारों कार्यकर्ता शामिल हुए। नड्डा ने चुनाव आयोग के एसआईआर का बचाव करते हुए कहा कि विपक्ष संस्थाओं पर भरोसा तोड़ने की कोशिश कर रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि हारने पर ईवीएम और आयोग को दोष देना विपक्ष की आदत बन गई है। ब्रज क्षेत्र जाट, मुस्लिम और अन्य समुदायों की मिश्रित राजनीति वाला इलाका है। यहां की पदयात्रा पश्चिमी यूपी से जुड़े क्षेत्रों में भाजपा की पैठ मजबूत करने का प्रयास थी। गाजियाबाद और बरेली दोनों कार्यक्रम एक ही अभियान की कड़ी हैं, जो पश्चिमी और ब्रज क्षेत्रों को जोड़ते हैं।

भाजपा का राजनीतिक संदेश

‘लोकतंत्र बचाओ, अराजकता हटाओ’ का मूल मतलब विपक्ष के आरोपों को पलटकर उन्हें अराजकता फैलाने वाला बताना है। भाजपा एसआईआर को पारदर्शी चुनाव व्यवस्था का हिस्सा बता रही है और कह रही है कि विपक्ष हार स्वीकार नहीं कर पा रहा। संदेश में विकास, सुशासन, राष्ट्रवाद और 2027 चुनाव की तैयारी प्रमुख है। पश्चिमी यूपी में योगी के व्यक्तित्व और कानून-व्यवस्था पर जोर है, जबकि ब्रज में संस्थागत मुद्दों और संगठनात्मक मजबूती पर फोकस दिखता है। दोनों जगह संदेश एक ही है-भाजपा लोकतंत्र की रक्षक है और विपक्ष बाधा।

विपक्ष की प्रतिक्रियाएं

समाजवादी पार्टी और कांग्रेस ने अभियान को सत्ता का प्रचार करार दिया। अखिलेश यादव ने कहा कि भाजपा खुद अराजकता फैला रही है। विपक्ष का आरोप है कि ये पदयात्राएं जमीनी मुद्दों से ध्यान हटाने और 2027 के लिए संगठनात्मक रैली हैं। वे इसे ‘बी टीम’ वाली राजनीति और झूठे नैरेटिव का हिस्सा बता रहे हैं। वैकल्पिक कथा में वे बेरोजगारी, महंगाई और संस्थाओं की स्वतंत्रता का मुद्दा उठा रहे हैं।

गाजियाबाद और बरेली के सियासी मायने

पश्चिमी यूपी (गाजियाबाद) में भाजपा की ताकत शहरी मध्यवर्ग, विकास कार्यों और योगी की छवि पर टिकी है, लेकिन जातीय समीकरण और किसान मुद्दे चुनौती हैं। ब्रज (बरेली) में पारंपरिक वोट बैंक और संगठनात्मक नेटवर्क मजबूत है, पर विपक्षी ध्रुवीकरण का खतरा बना रहता है।
दोनों जगह भीड़ और संगठन का प्रदर्शन भाजपा की तैयारियों को दर्शाता है। मीडिया कवरेज में योगी वाली पदयात्रा को ज्यादा प्रमुखता मिली। संदेश की प्रभावशीलता इस बात पर निर्भर करेगी कि यह सिर्फ कार्यकर्ताओं तक सीमित रहता है या आम वोटर तक पहुंचता है।

2027 की चुनावी तैयारियों का शंखनाद

यह अभियान भाजपा के लिए 2027 की चुनावी तैयारियों का शंखनाद है। युवा और महिला वोटरों तक पहुंच बढ़ाने के साथ क्षेत्रीय मुद्दों को राष्ट्रवादी फ्रेम में पेश करने की कोशिश दिखती है। भविष्य की रणनीति में जिला स्तर तक ऐसे कार्यक्रमों का विस्तार और डिजिटल प्रचार शामिल हो सकता है। गाजियाबाद और बरेली की पदयात्राएं भाजपा के संगठनात्मक आत्मविश्वास और विपक्षी नैरेटिव को चुनौती देने का प्रयास हैं। 2027 में इन संदेशों का कितना असर पड़ता है, यह जमीनी हकीकत तय करेगी।

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5 Nov 2026, 6:03 PM IST
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