लखनऊ

Mission UP: बिहार की तर्ज पर यूपी में सपा के पुराने शासन को मुद्दा बना रही भाजपा

UP Assembly Elections BJP vs SP: योगी आदित्यनाथ ने बिठूर की सभा में अपने भाषण के दौरान सपा के शासनकाल को दंगों, भ्रष्टाचार, परिवारवाद और प्रदेश में अराजकता से जोड़ते हुए आरोप लगाए। लखनऊ में अमित शाह ने 1990 में अयोध्या में कारसेवकों पर गोलीबारी का मुद्दा उठाया।
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Updated: 3 Nov 2026, 7:20 PM IST
Yogi Adityanath Amit Shah
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, केंद्रीय मंत्री जे.पी. नड्डा, BJP के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ (फोटो: IANS/वीडियो ग्रैब)

BJP Campaign Strategy UP: उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव से पहले भाजपा के नेताओं के बयानों में समाजवादी पार्टी (सपा) के पुराने शासनकाल का जिक्र बढ़ गया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कानपुर के बिठूर में आयोजित सभा में सपा सरकार के कार्यकाल को लेकर निशाना साधा, वहीं केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने लखनऊ में भाजपा की प्रदेश कार्यसमिति की बैठक में अयोध्या में कारसेवकों पर गोलीबारी का मुद्दा उठाया। भाजपा के प्रचार में कानून-व्यवस्था, दंगों, माफिया, परिवारवाद और धार्मिक स्थलों से जुड़े मुद्दे प्रमुखता से शामिल हैं।

योगी आदित्यनाथ ने बिठूर की सभा में अपने भाषण के दौरान सपा के शासनकाल को दंगों, भ्रष्टाचार, परिवारवाद और प्रदेश में अराजकता से जोड़ते हुए आरोप लगाए। उन्होंने सपा पर तुष्टीकरण की राजनीति करने और हिंदू धार्मिक विरासत की उपेक्षा करने का आरोप भी लगाया। इसके मुकाबले उन्होंने अपनी सरकार के दौरान मंदिरों और धार्मिक स्थलों के विकास का उल्लेख किया। भाजपा के उत्तर प्रदेश इकाई के आधिकारिक सोशल मीडिया हैंडल पर उनके भाषण का एक अंश भी साझा किया गया, जिसमें उन्होंने सपा को इन्हीं मुद्दों पर घेरा।

इसके पांच दिन बाद लखनऊ में भाजपा की प्रदेश कार्यसमिति की बैठक में अमित शाह ने सपा के संस्थापक मुलायम सिंह यादव के मुख्यमंत्री रहते हुए 1990 में अयोध्या में हुई पुलिस गोलीबारी का जिक्र किया। उन्होंने सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव को निशाने पर लेते हुए कहा कि अयोध्या की उस घटना को जनता नहीं भूलेगी। शाह ने राम मंदिर निर्माण का उल्लेख करते हुए सपा के पुराने शासनकाल और मौजूदा भाजपा सरकार के कार्यकाल के बीच तुलना भी की।

भाजपा नेताओं के बयानों में भी सपा शासनकाल का जिक्र

भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी ने प्रदेश कार्यसमिति की बैठक में आगामी विधानसभा चुनाव को विकास और विनाश तथा जातिवाद और राष्ट्रवाद के बीच मुकाबले के रूप में पेश किया। उन्होंने पार्टी कार्यकर्ताओं से विपक्ष के आरोपों का तथ्यों के साथ जवाब देने को कहा।

उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने सपा के कथित गुंडाराज और माफिया शासन की वापसी नहीं होने देने की बात कही थी। इससे पहले अक्टूबर में उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने भी सपा के शासनकाल की कानून-व्यवस्था और माफिया संस्कृति को लेकर हमला बोला था।

भाजपा के प्रचार अभियान में सपा और भाजपा सरकारों के कार्यकाल की तुलना करने वाली सामग्री भी शामिल है। इसमें माफिया अतीक अहमद की बेनामी संपत्तियों पर कार्रवाई, निवेशकों की कानून-व्यवस्था को लेकर पुरानी चिंताओं और प्रदेश में पर्यटन के विकास जैसे विषयों का उल्लेख किया गया है। पार्टी के कुछ प्रचार संदेशों में कब्रिस्तानों की चारदीवारी पर खर्च, महानवमी पर अवकाश और राम मंदिर आंदोलन से जुड़े घटनाक्रमों को भी तुलना का आधार बनाया गया है।

बिहार चुनाव के प्रचार में भी उठाया था पुराना शासनकाल

बिहार विधानसभा चुनाव 2025 में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) के प्रचार में राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के पुराने शासनकाल को प्रमुखता से उठाया गया था। तत्कालीन मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के लंबे कार्यकाल के बावजूद चुनाव प्रचार में लालू प्रसाद यादव और राजद सरकारों के दौर को लेकर जंगलराज का मुद्दा उठाया गया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और नीतीश कुमार ने अपनी सभाओं में उस दौर की कानून-व्यवस्था का उल्लेख किया था। जनता दल (यूनाइटेड) के चुनावी वीडियो में भी पुराने शासनकाल की याद दिलाने वाले संदेश शामिल थे।

उत्तर प्रदेश में भाजपा के मौजूदा प्रचार में भी सपा के शासनकाल की घटनाओं का उल्लेख किया जा रहा है। इसमें केवल कानून-व्यवस्था और माफिया ही नहीं, बल्कि अयोध्या में कारसेवकों पर गोलीबारी, धार्मिक आयोजनों और तुष्टीकरण के आरोपों से जुड़े मुद्दे भी शामिल हैं।

भाजपा बोली- उपलब्धियों की तुलना भी रख रहे

भाजपा का कहना है कि पार्टी जनता के सामने अपनी उपलब्धियां भी रख रही है और दोनों सरकारों के कार्यकाल की तुलनात्मक जानकारी भी दे रही है। उन्होंने बिजली व्यवस्था, एक्सप्रेसवे, हवाई अड्डों और मेडिकल कॉलेजों का उल्लेख करते हुए कहा कि 2017 के बाद प्रदेश में बदलाव आया है। उन्होंने कानून-व्यवस्था में सुधार को भी सरकार की उपलब्धि बताया।

सपा ने कहा- मौजूदा मुद्दों से ध्यान हटाने की कोशिश

सपा के राज्यसभा सांसद जावेद अली ने भाजपा की इस रणनीति पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि भाजपा पुराने मुद्दों को दोहरा रही है, जबकि सपा के शासनकाल में काम बेहतर हुआ था। उन्होंने लोकसभा चुनाव और हाल के विधान परिषद चुनावों का भी उल्लेख किया।

सपा प्रवक्ता फखरुल हसन ने कहा कि उनकी पार्टी अपने कार्यकाल की उपलब्धियों की बात करती है, जबकि भाजपा सपा पर केंद्रित रहती है। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार जैसे मुद्दों के बजाय चुनावी विमर्श को सांप्रदायिक दिशा देने की कोशिश कर रही है।

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3 Nov 2026, 7:20 PM IST
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