उक्त बयान के चलते चौतरफा वार झेल रही भाजपा ने तुरंत डिप्टी सीएम से इस बारे में बात की।
लखनऊ. यूपी डिप्टी सीएम दिनेश शर्मा द्वारा दिए गए विवादित बयान से विपक्षी दलों को तो मौका मिल ही गया है, भाजपा के अंदरखाने में भी हड़कंप मच गया है। डिप्टी सीएम के बयान से भाजपा किनारा करने की कोशिश कर रही है, वहीं दिनेश शर्मा से इस बारे में बात की जा रही है। आपको बता दें कि उपमुख्यमंत्री ने एक बयान में य दावा किया था कि रामायण के समय में भी टेस्ट ट्यूब जैसी कोई तकनीक थी। उन्होंने सीता के जन्म को इस सिद्धांत से जोड़ते हुए कहा कि जनक जी ने जो हल चलाया और घड़े के अंदर से निकली बेबी सीता जी बन गई, ये कोई ना कोई टेक्नोलॉजी, जैसे आजकल का टेस्ट ट्यूब बेबी है, वैसा कुछ रहा होगा। दिनेश शर्मा के इस बयान के बाद विपक्ष ने उन्हें घेरना शुरू कर दिया है। सपा प्रवक्ता पंखुड़ी पाठक ने तो यह तक कह दिया कि "आपसे तो ऐसी उम्मीद नहीं थी"। वहीं सुनिस सिंह यादव का कहना है, "आज यूपी के उपमुख्यमंत्री माता सीता को टेस्टट्यूब बेबी बता रहे हैं! श्री राम को बेचने वालों की बुद्धि प्रभु ने हर ली है!"
भाजपा ने कहा - भाषण देते समय संयत रहे-
दिनेश शर्मा के इस बयान से भाजपा भी बैकफुट पर आती दिखी। उक्त बयान के चलते चौतरफा वार झेल रही भाजपा ने तुरंत डिप्टी सीएम से इस बारे में बात की। उपमुख्यमंत्री दिनेश शर्मा की इस टिप्पणी पर अप्रसन्नता जाहिर करते हुए उन्हें भाषण देते समय संयत रहने को कहा। बीजेपी सूत्रों कहना है कि पार्टी के महासचिव भूपेन्द्र यादव ने दिनेश शर्मा से बात की और उन्हें अवगत कराया कि पार्टी उनके विवादित बयान से खुश नहीं है। शर्मा के उक्त बयान की आलोचना के बाद पार्टी ने अपनी नाखुशी जाहिर की है। माता सीता के साथ हिन्दुओं की आस्था जुड़ी है और पार्टी को लगा कि उनके बयान से पार्टी की छवि को नुकसान पहंच सकता है।
सबसे पहले पत्रकार नारद थे-
इससे पहले भी उपमुख्यमंत्री ने मथुरा में हिंदी पत्रकारिता दिवस के एक कार्यक्रम में संबोधित करते हुए कुछ ऐसा ही बयान दिया था। उन्होंने नारद को पहला पत्रकार बताया दिया था। शर्मा का कहना था कि पत्रकारिता कोई आधुनिककाल से ही शुरू नहीं हुई। ये महाभारत काल से चली आ रही है।