गाजियाबाद में एक 55 साल की महिला के नाक में ब्लैक और व्हाइट फंगस मिला है।
यूपी में कोरोना के खतरे के बीच गाजियाबाद में एक 55 साल की महिला के नाक में ब्लैक एंड व्हाइट फंगस मिला है। डायबिटीज की पेशेंट महिला को कुछ समय से बुखार आ रहा था। अस्पताल मे ंभर्ती होने के बाद डॉक्टरों ने महिला की जांच कराई।
इलाज के दौरान डॉक्टर ने साइनस का सैंपल गौतमबुद्धनगर की एक प्राइवेट पैथोलॉजी लैब में भेजा। जांच में पाया गया कि महिला ब्लैक एंड व्हाइट फंगस से संक्रमित है। जिसके बाद महिला का इलाज चल रहा है।
बेहद मंहगा है इलाज
डॉक्टरों का कहना है कि इसका इलाज बेहद महंगा है। इन दोनों बीमारी में 60 हजार रुपए के 1 दिन में इंजेक्शन लगते हैं। ये इंजेक्शन 21 दिन तक लगते हैं। अस्पताल का खर्चा अलग होता है। डॉक्टर त्यागी का कहना है कि उसके बाद इन स्लाइड में दिख रहे सैंपल उन्होंने पैथोलॉजी लैब में जांच के लिए भेजें।
पैथोलॉजी लैब में यह सैंपल 24 तारीख को भेजे गए थे और 27 तारीख में यह रिपोर्ट आई जिसमें पता चला कि इस महिला को ब्लैक और व्हाइट दोनों फंगस मिले हैं।
बीमारी का पता नाक की एंडोस्कोपी से चला
डॉक्टर के मुताबिक नॉर्मल आंख से इन फंगस का पता करना नामुनकिन है। इसके लिए नाक की एंडोस्कोपी की जाती है। शक होने पर सैंपल पैथोलॉजी लैब भेजा जाता है। जिसकी रिपोर्ट के बाद पता चल पाता है कि मरीज को क्या बीमारी है।
महंगे इलाज को देखते हुए डॉक्टर ने सरकार से गुजारिश की है कि इन दोनों बीमारी के इंजेक्शन से गरीब लोगों को छूट दी जाए।
डाइबिटीज मरीज को इस बीमारी से ज्यादा खतरा
डॉ. गुलेरिया का कहना है कि कोरोना वायरस और डाइबिटीज के मरीज को ब्लैक फंगस का खतरा ज्यादा होता है। डॉ. गुलेरिया बताते हैं कि ब्लैक फंगस उन्हीं लोगों पर अटैक कर पाता है जिनकी इम्यूनिटी कमजोर होती है। चूंकि डाइबिटीज मरीज स्टेरॉइड्स का इस्तेमाल करते हैं, इसलिए उनका इम्यूनिटी लेवल कम हो जाता है, इस कारण ब्लैक फंगस को उन्हें अपना शिकार बनाने का मौका मिल जाता है।
रोकथाम के उपाय
डॉ. त्रेहन बताते हैं कि इस बीमारी को जितनी जल्दी पहचान लिया जाए, इलाज उतना ही आसान होता है। वहीं, डॉ. गुलेरिया बताते है कि ब्लैक फंगस और व्हाइट की रोकथाम के लिए तीन चीजें बहुत जरूरी है। पहला शुगर कंट्रोल बहुत अच्छा होना चाहिए, दूसरा हमें स्टेरॉयड कब देने हैं इसके लिए सावधान रहना चाहिए और तीसरा स्टेरॉयड की हल्की या मध्यम डोज देनी चाहिए।
1. शुगर कंट्रोल- खून में चीनी की मात्रा बढ़ने नहीं दें। जो लोग डायबिटिक हैं, उन्हें अपने ब्लड शुगर को कंट्रोल रखना चाहिए।
जो डायबिटिक नहीं हैं, लेकिन नियमित तौर पर स्टेरॉइड्स ले रहे हैं, उन्हें अपना ब्लड शुगर हमेशा चेक करते रहना चाहिए।
2. स्टेराइड गाइडलाइंस का सख्त पालन - स्टेरॉइड लेने के गाइडलाइंस को फॉलो जररू करें।
3. स्टेरॉइड के बेवजह इस्तेमाल से परहेज - स्टेरॉइड देने से बचना चाहिए।अगर जरूरत पड़े तो कम डोज दें ना कि बहुत ज्यादा। इस तरह की दूसरी दवाइयां भी तभी दी जाएं जब बहुत जरूरी हों।